कहीं इस बार भी घाटी में कोहराम ना मचा दे बारिश
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बाढ़ की हालिया विभीषिका से भी रियासत सरकार ने सबक नहीं सीखा है। अगर अब भी नहीं जागे तो इस बार भी बरसात कहीं कोहराम न मचा दे। सितंबर 2014 में जम्मू-कश्मीर में बाढ़ के कहर के बीतने के पांच महीने के बाद भी क्षतिग्रस्त सार्वजनिक ढांचे की स्थायी मरम्मत नहीं हुई है।
स्थायी मरम्मत के लिए विभागों के पास पैसा नहीं है। अस्थायी मरम्मत करके ही किसी तरह से सर्दियों में काम निकाला गया। अबकी बरसात तक अगर नदियों, दरियाओं में सुरक्षा बांधों से लेकर सड़कों, पुलों, बिजली और पानी के ढांचे की स्थायी मरम्मत न हुई तो बाढ़ में बड़ी तबाही मच सकती है।
राज्यपाल एनएन वोहरा भी केंद्र सरकार से बाढ़, राहत पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्य के लिए 44 हजार करोड़ के वित्त पैकेज को जल्द जारी करने की अपील कर चुके हैं। इस सप्ताह आखिरी दिनों में उनका दिल्ली जाने का प्रस्ताव भी है।
चिनाब के तटबंध से है भारी खतरा
जम्मू संभाग में सरकारी विभागों के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बाढ़ की दृष्टि से सबसे संवेदनशील चिनाब दरिया और तवी नदी में बाढ़ से सैकड़ों की संख्या में सुरक्षा बांधों को भारी क्षति पहुंची थी।
अभी तक सुरक्षा बांधों की स्थायी मरम्मत नहीं हो पाई है।
समस्या यह है कि बाढ़ नियंत्रण विभाग के पास स्थायी मरम्मत के लिए पैसा नहीं है। सिर्फ चिनाब और तवी नदी के सुरक्षा बांधों के लिए विभाग को करीब 500 करोड़ चाहिए। अगर बरसात तक सुरक्षा बांधों की स्थायी मरम्मत पैसे की कमी की वजह से रुकी रही तो फिर बड़ी तबाही का कारण बन सकती है।
बाढ़ से तवी में बने पीएचई विभागों के प्लांटों को क्षति पहुंचने के बाद अब तक अस्थायी मरम्मत करके ही काम चलाया जा रहा है। पीएचई विभाग को मरम्मत कार्य के लिए 27.50 करोड़ की जरूरत है। बिजली विभाग के ढांचे जिसमें खंभे, ट्रांसफार्मरों से लेकर अन्य ढांचा शामिल है, की भी अस्थायी तौर पर मरम्मत ही हो पाई है।
पुल न बने तो बरसात में हो जाएगी दिक्कत
बरसात में जम्मू शहर में तवी पर बने चौथे पुल को भारी नुकसान होने के साथ करीब 60 गांवों के लोगों तक पहुंचने का माध्यम पुल फ्लाएं मंडाल पुल का तो एक हिस्सा ही पूरी तरह से बह गया था। सेना ने अस्थायी तौर पर पैंटून ब्रिज बनाया था, उससे अस्थायी तौर पर तो लोग सुविधा ले पा रहे हैं, लेकिन तवी में जल स्तर बढ़ने पर पूरा इलाका कट जाएगा।
सैकड़ों की संख्या में सड़कों को भी मरम्मत का इंतजार है। सड़क एवं भवन निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर अब्दुल हमीद शेख का कहना है कि फ्लाएं मंडाल पुल के लिए बीस करोड़ की राशि मंजूरी हुई है। सड़कों और अन्य पुलों के लिए अभी राशि मंजूर होने का इंतजार भी है।
बाढ़ नियंत्रण विभाग जम्मू के चीफ इंजीनियर एचसी जैरथ का कहना है कि चिनाब दरिया के सुरक्षा बांधों की स्थायी मरम्मत के लिए करीब 400 करोड़ की जरूरत है। इसकी डीपीआर तैयार कर सरकार के पास फंडिंग के लिए भेजी गई है। पैसे मिले तो स्थायी मरम्मत का काम शुरू होगा। तवी नदी के सुरक्षा बांधों की स्थायी मरम्मत के लिए भी करीब सौ करोड़ की जरूरत है। इसकी डीपीआर तैयार हो रही है।