{"_id":"5bbe6ad3867a55284770d00c","slug":"in-anantnag-men-wearing-burqa-to-cast-vote","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीडीपी विधायक व यासीन मलिक के गढ़ में भी पड़े वोट, पुरुष बुर्का डाल पहुंचे वोट डालने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीडीपी विधायक व यासीन मलिक के गढ़ में भी पड़े वोट, पुरुष बुर्का डाल पहुंचे वोट डालने
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला, जम्मू
Updated Thu, 11 Oct 2018 02:40 AM IST
विज्ञापन
जम्मू-कश्मीर निकाय चुनाव
घाटी में निकाय चुनाव के दूसरे चरण के मतदान में भले ही कम वोटिंग हुई, लेकिन इसमें एक बड़ा फर्क भी नजर आया। आतंकियों की धमकी और अलगाववादियों के बहिष्कार की घोषणा के बाद भी जम्हूरियत पर लोगों ने विश्वास जताया। श्रीनगर में अलगाववादियों के प्रभाव वाले सभी 19 वार्ड (जहां बुधवार को मतदान हुआ) में मतदाता घरों से बाहर निकले। आतंकवाद से सबसे अधिक प्रभावित दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग में बुर्का में पुरुष मतदाता वोट डालने पहुंचे। उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा में जमकर वोट पड़े। श्रीनगर के बाहरी इलाके से लगते इस शिया बहुल इलाके में बूथों पर मतदाताओं की कतार थी।
विज्ञापन
खास बात यह भी रही कि श्रीनगर के जिन इलाकों में मतदान था वहां तो दुकानें बंद रहीं, लेकिन कई इलाकों में अलगाववादियों के बंद को दरकिनार करते हुए दुकानें खुलीं। श्रीनगर
विज्ञापन
के एक वार्ड को छोड़कर लगभग सभी वार्ड में लोग घरों से बाहर निकले। सुबह छह बजे मतदान शुरू होने के साथ ही कुछ वार्डों में मतदाता पहुंच गए थे। हालांकि, बाद में दिन
विज्ञापन
चढ़ने के साथ मतदान को लोग निकले।
जेके एलएफ प्रमुख यासीन मलिक का मतदान वाला इलाका गढ़ माना जाता है। यह क्षेत्र हब्बाकदल विधानसभा में आता है जहां से पीडीपी की विधायक आशिया नक्काश (पूर्व मंत्री) हैं। घाटी के अनंतनाग, बांदीपोरा, बारामुला, कुपवाड़ा व श्रीनगर जिले में हुए चुनाव में सभी स्थानों पर वोट पड़ने से अलगाववादियों व आतंकियों में हताशा भी है। अलगाववादी गिलानी, मीरवाइज व यासीन मलिक के ज्वाइंट रजिस्टेंस लीडरशिप का बयान भी आया है, जिससे उनकी हताशा झलकती है। इसमें उन्होंने कहा है कि घाटी की अवाम ने चुनाव का बहिष्कार तथा विरोध कर अपने इरादे जता दिए हैं।
मुस्लिम बहुल बनिहाल में भी मतदान
जम्मू संभाग के मुस्लिम बहुल रामबन जिले के बनिहाल में भी मतदान ठीकठाक हुआ। किश्तवाड़ व डोडा में भी लोगों ने वोट डाले। कुल मिलाकर मुस्लिम बहुल इन इलाकों में भी
मतदान हुआ। अलगाववादियों के आह्वान पर अक्सर इन इलाकों में बंद का असर देखने को मिलता है।