56 छात्रों से ग्लोबल पहचान तक: अगले 10 साल में दुनिया में गूंजेगा IIM जम्मू का नाम, एलजी सिन्हा ने जताया भरोसा
एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि आत्मविश्वास और नई सोच के साथ आगे बढ़ने पर आईआईएम जम्मू अगले दशक में वैश्विक स्तर पर पहचान और सम्मान हासिल कर सकता है।
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जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भरोसा जताया है कि अगर भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) जम्मू इसी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता रहा तो अगले दशक में यह संस्थान वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दुनिया भर में आईआईएम जम्मू का नाम गर्व और सम्मान के साथ लिया जाएगा।
आईआईएम जम्मू के दस साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उपराज्यपाल ने बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, शिक्षकों, छात्रों, पूर्व छात्रों और अन्य गणमान्य लोगों को संबोधित किया। उन्होंने संस्थान की अब तक की यात्रा को जम्मू-कश्मीर के शैक्षणिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय बताया।
56 छात्रों से शुरू हुआ सफर
मनोज सिन्हा ने कहा कि आईआईएम जम्मू की शुरुआत एक दशक पहले कनाल रोड स्थित अस्थायी परिसर में महज 56 छात्रों के साथ हुई थी। आज यह संस्थान देश के तेजी से उभरते बिजनेस स्कूलों में शामिल है और प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान बनाने के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय है।
आईआईएम जम्मू देश का पांचवां ऐसा आईआईएम बन गया है, जिसके पास एएमबीए और ईएफएमडी दोनों की मान्यता है। संस्थान ने फ्रांस, मोरक्को, दक्षिण कोरिया, ग्रीस, ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, पोलैंड, स्वीडन, ताइवान और हाल में ब्राजील के संस्थानों के साथ शैक्षणिक साझेदारी भी विकसित की है।
शोध के क्षेत्र में भी बड़ी छलांग
उपराज्यपाल ने कहा कि संस्थान के शोध कार्य में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2017 में जहां सिर्फ दो शोध पत्र प्रकाशित हुए थे वहीं इस साल यह संख्या करीब 350 तक पहुंच गई है। आईआईएम जम्मू ने एक के बाद एक कई उपलब्धियां हासिल की हैं और उसकी कुछ पहलें दूसरे बिजनेस स्कूलों के लिए प्रेरणा और उदाहरण बन चुकी हैं।
अपनी अलग पहचान बनाने की जरूरत
सिन्हा ने कहा कि अब संस्थान को अपनी उपलब्धियों को नई खोज और नए विचारों में बदलने की जरूरत है। आईआईएम जम्मू से प्रशासन, सतत विकास और सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर नए समाधान तलाशने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि किसी महान संस्थान की पहचान तब बनती है जब देश किसी कठिन सवाल का सामना करता है और उसके जवाब के लिए ऐसे संस्थानों की ओर देखता है।
चार क्षेत्रों पर फोकस का सुझाव
उपराज्यपाल ने आईआईएम जम्मू के लिए चार प्रमुख प्राथमिकताएं भी गिनाईं। इनमें भारतीय कारोबारी वास्तविकताओं पर आधारित विशिष्ट अकादमिक पहचान विकसित करना, वास्तविक परियोजनाओं के जरिए छात्रों को व्यावहारिक अनुभव देना, सीमावर्ती अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास पर शोध को बढ़ावा देना और ऐसे स्नातक तैयार करना जो कंपनियों के नेतृत्व के साथ नए उद्यम भी खड़े कर सकें, शामिल हैं।
कहा कि असली परीक्षा कॉरपोरेट बोर्डरूम, बाजार और वास्तविक जीवन में होती है, जहां जानकारी अधूरी होती है, राय अलग-अलग होती हैं और समस्याओं के तैयार जवाब नहीं मिलते।
सिन्हा ने हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड और व्हार्टन जैसे संस्थानों के उदाहरण देते हुए कहा कि इन संस्थानों ने अपनी अलग सोच और विचार को लंबे समय तक लगातार आगे बढ़ाकर वैश्विक प्रतिष्ठा हासिल की। आईआईएम जम्मू भी आज ऐसे ही महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है और आज लिए गए फैसले आने वाले कई दशकों तक उसकी पहचान तय कर सकते हैं।