200 से अधिक आतंकी ढेर नहीं किए होते तो आज संख्या 400 के करीब होती : जीओसी
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कश्मीर घाटी में मौजूदा स्थिति पिछले वर्ष से बहुत बेहतर है। हालांकि स्थिति नाजुक काफी है, लेकिन अभी तक अधिकतर जगहों पर हालात सामान्य देखने को मिली है। कभी कभार बंद की कॉल दी जाती है। इसको छोड़ अक्सर शिक्षण संस्थान और व्यवसाय खुले दिखाई दिए हैं। बंद का खास असर इन दिनों नहीं देखने को मिलता है। कुछ छिटपुट हिंसक घटनाओं को छोड़ हालात सामान्य हैं। इसलिए हम उम्मीद रखते हैं कि इस विंटर सीजन में पर्यटकों की संख्या अच्छी रहेगी। यह बातें जीओसी जेएस संधू ने कही।
कश्मीर मसले का क्या कोई राजनीतिक हल है। इस पर जीओसी का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा पहले से ही दिनेश्वर शर्मा को वार्ताकार के रूप में नियुक्त किया गया है। वो युवाओं सहित कई संगठनों के प्रतिनिधियों से बात कर रहे हैं, ताकि कश्मीर के मसलों को हल करने या उसके किसी अच्छे समाधान तक पहुंचाने के लिए एक रोड मैप तैयार कर सके। देखते हैं कि वो कितना कारगर साबित होते हैं।
200 आतंकी ढेर करने के बावजूद आतंकियों की संख्या में कमी नहीं आ रही। इस पर जीओसी ने कहा कि आतंकियों को मार गिराने की प्रक्रिया जारी है। इसके बावजूद कुछ युवा हैं, जो हथियार उठाकर आतंकी संगठनों में शामिल हो रहे हैं। पाकिस्तान द्वारा भी आतंकियों को घुसपैठ करवाकर कश्मीर में भेजा जा रहा है। अगर इस वर्ष 200 से अधिक आतंकियों को नहीं मार गिराया होता, तो शायद घाटी में सक्रिय आतंकियों की संख्या 400 तक होती।
कड़ी सुरक्षा के बावजूद आतंकियों की घुसपैठ पर उन्होंने कहा कि आतंकियों को सीमा पार से अंडर घुसपैठ करते समय रोकना काफी मुश्किल काम है। बर्लिन वॉल की दीवार भी ईस्ट बर्लिन के लोगों को वेस्ट बर्लिन में दाखिल होने में कामयाब नहीं रही। यहां तक कि बार्डर और बाउंड्री वॉल के होते हुए भी अमरीका भी मैक्सिको के लोगों को दाखिल होने से नहीं रोक पाया। हमारी जो नियंत्रण रेखा है वह उन सबके मुक़ाबले काफी कठिन है।
अधिकतर महीने खराब मौसम, पहाड़ी क्षेत्र, गहरी खाई आदि हैं। इन चुनौतियों के बावजूद हमारा काउंटर इंन्फ़िलट्रेशन ग्रिड मजबूत है और इसके चलते हम काफी सक्षम हैं घुसपैठ को रोकने में। कुछ आतंकी सीमा के इस पार आने में सफल ज़रूर हुए हैं लेकिन करीब 70 आतंकियों को हमने इस वर्ष घुसपैठ के दौरान ही मार गिराया गया है।
हाजिन ऑपरेशन बड़ा सफल ऑपरेशन रहा
हाजिन ऑपरेशन रहा सफल ऑपरेशन
जीओसी का कहना है कि हाजिन ऑपरेशन बड़ा सफल ऑपरेशन रहा है, क्योंकि इसमें हमने छह पाकिस्तानी आतंकियों को ढेर किया। इनमें से कुछ बड़े ही महत्वपूर्ण थे। इनमें से एक महमूद भाई भी था, जो लश्कर का बांदीपोरा ज़िले का मुख्य कोआर्डिनेटर था। वही लश्कर के सभी ग्रुप को इलाके में रिसीव करता था। साथ ही लखवी का भतीजा भी।
हाजिन के इलाके में अधिकतर आतंकियों का सफाया कर दिया गया, जो बड़ी सफलता रही। जहां तक काजीगुंड ऑपरेशन की बात है, वो एक अच्छा उदाहरण रहा है। तेज़ी और समन्वय से संचालित ऑपरेशन के रूप में। आतंकियों द्वारा काफिले पर हमला करने के तुरंत बाद जवाबी कार्रवाई की गई।
तीनों आतंकियों का मारा जाना आतंकी संगठन को बड़ा झटका था। अभी तक के कानवाई हमलों में शुरू में अबू इस्माइल इसके पीछे था, रेहमान भाई भी शामिल था। उन्हें शुरू में ही मार गिराया गया। उनमें से फुरकान और अबू माविया ही बचे थे, जिन्हें काजीगुंड ऑपरेशन में मार गिराया गया।
युवाओं का आतंकवाद में शामिल होना चिंताजनक
युवाओं में अलगाव है। खासकर दक्षिणी कश्मीर के युवाओं में। इस कारण युवाओं की एक ख़ासी संख्या आतंकवाद में शामिल हो रही। यह चिंता का विषय है। हमने इसको लेकर कई अभिभावकों से भी बात की, जो स्वयं इस पीड़ा से जूझ रहे हैं।
काफी अभिभावकों की ओर से घर वापसी के लिए अपील की विडियो सामने आई है। 4 से 5 ऐसे अभिभावक हैं जो हमारे संपर्क में हैं, जिन्होंने अपने बच्चों से संपर्क किया है और उम्मीद है कि वो भी घर वापसी करेंगे।
इस्लामिक स्टेट की घाटी में मौजूदगी नहीं
जीओसी का कहना है कि इस्लामिक स्टेट की कोई मौजूदगी नहीं है कश्मीर घाटी में। जहां तक ज़ाकिर मूसा की बात है, उन्होंने अपने आपको अल कायदा से जोड़ा है ना कि इस्लामिक स्टेट से। ज़ाकिर मूसा अल कायदा नहीं है, बल्कि उसके साथ जुड़ा हुआ है।
यह ग्रुप हमारे लिए कोई थ्रेट नहीं है। यह छोटा ग्रुप है। पिछले कुछ समय से बैंक लूट की घटनाओं को अंजाम दिया जा चुका है। नूरपुरा त्राल में ज़ाकिर के ग्रुप द्वारा लूट को अंजाम दिया गया।
जीओसी के अनुसार आतंकवाद कश्मीर में अगले कुछ वर्षों तक जारी रहेगा, क्योंकि लश्कर, हिज़्ब और जैश के अलावा अब हरकतुल मुजाहिदीन और अल बदर जैसे संगठनों का नाम सामने आ रहा है, जिन्हें पाकिस्तान फंडिंग करता है।
एनआईए का प्रभाव
इससे ज़रूर पत्थरबाज़ी पर असर पड़ा है। इससे पता चला है कि अलगाववादी अपनी जेब गरम कर अपने बच्चों और नजदीकी लोगों को इसका फायदा पहुंचा रहे थे। उनके ही बच्चे थे जो इनमें से कई व्यवसाय चला रहे थे।
कश्मीर के लोग जूझ रहे, उनके (अलगाववादी) नजदीकी लोग विदेशों या अन्य जगहों पर मज़े कर रहे। एनआईए रेड से वह साबित हो गया। इससे लोगों तक एक संदेश गया कि जिन लोगों को वे अपना मार्गदर्शक मान रहे हैं, वो इस लायक नहीं।
कश्मीर के युवाओं को यह समझना होगा कि इन सब हालातों के बीच आखिर फायदा किसको हो रहा है। यह भी सोचना होगा कि यह पाकिस्तानी आतंकी यहां आकार क्या वो कश्मीर के हित के लिए आ रहे हैं या पाकिस्तान के अपने हित के लिए।