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10 लाख के इनामी मसरत को मुफ्ती सरकार ने रिहा किया

Sat, 07 Mar 2015 08:29 PM IST
Updated Sat, 07 Mar 2015 08:29 PM IST
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hurriyat leader masrat alam released

भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार में भाजपा के तमाम विरोधों के बावजूद जम्मू कश्मीर के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री मुफ्ती मुहम्मद ने आज एक बेहद चौंकाने वाला फैसला किया है। मुस्लिम संघ के प्रमुख और हुर्रियत के वरिष्ठ नेता मसरत आलम को रिहा कर दिया गया है।

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मसरत आलम पिछले साल से यानी 2010 से जेल में बंद थे। मसरत आलम वही शख्स है, जिस पर कश्मीर घाटी में 2010 में भारत विरोधी प्रदर्शन आयोजित करने का आरोप है। तब घाटी में भड़की इस हिंसा में लगभग 112 लोगों की मौत हो गई थी। 10 लाख के इनामी मसरत को 2010 में श्रीनगर के बाहरी इलाके से गिरफ्तार किया था।
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भाजपा मसरत आलम की रिहाई का पहले से ही विरोध कर रही है। सूत्रों के मुताबिक मुफ्ती के इस फैसले से भाजपा में जबर्दस्त नाराजगी है, हालांकि पार्टी ने अभी तक इस पर खुलकर कुछ नहीं कहा है।
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रियासत के गृह विभाग के सूत्रों ने मसरत की रिहाई की पुष्टि करते हुए बताया था कि उनको बारमूला जेल से उन्हें रिहा कर दिया गया है। मुफ्ती सरकार की यह पहली राजनीतिक रिहाई है।

कौन है मसरत आलम ?
42 वर्षीय मसरत आलम बारामूल की जेल में कैद अकेला राजनीतिक कैदी थे। वह बीते चार सालों से पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत कैद थे। हालांकि उस पर कोई आपराधिक मामला नहीं है।

मसरत आमल विज्ञान से स्नातक है और इंटरनेट और सोशल मीडिया पर काफी अच्छी पकड़ रखता है। कश्मीर में मसरत आलम को सैय्यद अली शाह गिलानी का उत्तराधिकारी माना जाता है। (फोटो- सोशल मीडिया से)

राज्य सरकार के निर्देशों का अनुपालन किया जाएगा: के. राजेन्द्र

hurriyat leader masrat alam released

कश्मीर पुलिस महानिदेशक के. राजेन्द्र ने कहा था कि, राजनीतिक कैदियों की रिहाई पर राज्य सरकार के निर्देशों का अनुपालन किया जाएगा। सूत्रों का ये भी कहना है, प्रमुख गृह सचिव सुरेश कुमार ने सिविल सचिवालय में उनके ऑफिस का दौरा किया क्योंकि शनिवार और रविवार को ऑफिस बंद रहते इसलिए वह सप्ताह में पांच दिन में कामकाज निपटाना चाहते हैं।

आपको बताते चलें क‌ि मुफ्ती मोहम्मद सईद ने अलगाववादियों और आतंकियों को राहत देने की काफी समय से वकालत करती रही हैं। मुफ्ती ने व‌िधानसभा चुनावों के दौरान अपनी रैल‌ियों और जनसभाओं में कहा था कि अगर उनकी जम्मू कश्मीर में सरकार बनती है तो वह राजनैतिक कैदियों को राहत देने के लिए अध्यादेश लाएगी। इस अध्यादेश के जरिए अलगाववादियों और आतंकियों को राहत देने की कोशिश की जाएगी।

इससे पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद ही मुफ्ती ने घाटी में शांतिपूर्ण चुनाव के लिए पाकिस्तान, हुर्रियत और आतंकवादियों का धन्यवाद किया था। ज‌िसको लेकर काफी हंगामा हुआ था। इस बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी सफाई देनी पड़ी थी।

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