नदी किनारे स्थित घरों को खाली करवाया
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किश्तवाड़ में पांच दिनों से लगातार बारिश होने के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बारिश से कई घरों को नुकसान हुआ है। ज्यादातर नुकसान इंद्रवाल, मढ़वा, वाड़वन और नागसैनी इलाकों में हुआ है। यहां तक कि मढवा तहसील के कुछ उन इलाकों को खाली भी करवाया गया है, जो नदी के समीम स्थित थे। यहां तक कि जिला प्रशासन ने उन लोगों के लिए राशन भी भेज दिया है।
वहीं जिला मुख्यालय को जोड़ने वाले सभी संपर्क मार्ग जगह-जगह बंद पड़े हैं। कई जगह मार्ग पर पस्सियां आई हुई हैं। सरतल, छात्रू, ठाकराई, पलमाड़, पाडर, बोंजवाह के अलावा किश्तवाड़-बटोत राष्ट्रीय राजमार्ग भी बंद है। शहर में आवश्यक वस्तुएं भी नहीं पहुंच पा रही हैं।
जानकारी के अनुसार मुगल मैदान में स्कूल जाने के लिए बनाया पुल भी पानी के बहाव से टूट गया है। छात्रू में भी कई जगह छोटे-छोटे पुल टूट गए हैं। चिनाब नदी का जलस्तर भी बढ़ गया है। एनएचपीसी की तरफ से भी डलहस्ती पावर स्टेशन का दूल में बनाए बांध को खोलना पड़ा, इसके लिए उन्होंने चेतावनी दे दी है कि चिनाब के आस-पास कोई न जाए।
पंचैरी में पंद्रह परिवार हुए बेघर
मूसलाधार बारिश ने उधमपुर की पंचैरी तहसील में खूब कहर बरसाया है। पंचैरी में चुबुनाला इलाके में पांच ग्रामीणों के घर भूस्खलन से तबाह हो गए हैं। इसके अलावा कौठी लैड़ इलाके में दस से ज्यादा मकान जमीन धंसने से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। दोनों स्थानों से लोगों को पहले ही निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया था। इसलिए जानमाल का नुसान नहीं हुआ।
जानकारी के अनुसार चुबुनाला और कोठी लैड़ इलाके में शुक्रवार शाम को ही जमीन धंसने व मकानों का क्षतिग्रस्त होना शुरू हो गया था। इसलिए ग्रामीण अपने मकानों से जरूरत का सामान निकाल कर अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों के घरों में पहुंच गए थे। शनिवार की सुबह अचानक ही दोनों स्थानों पर जमीन धंसने लगी और देखते ही देखते ग्रामीणों के घर मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गए।
पंचैरी मार्ग तीन दिन से पूरी तरह से बंद पड़ा है, इसलिए प्रशासन की तरफ से ग्रामीणों तक किसी तरह की मदद नहीं पहुंचाई जा सकी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले वर्ष भी कुदरत के कहर से करीब 12 परिवार पूरी तरह से बेघर हो गए थे। इस बार भी उनके लिए पहले जैसी ही स्थिति बन चुकी हैं। उनकी राज्य सरकार व प्रशासन से अपील है कि समय पर उनके पास राहत पहुंचाई जाए।
राज्यपाल ने भी लिया हालात का जायजा
राज्यपाल एनएन वोहरा ने भी शनिवार को राज्य में बाढ़ से पैदा हुए हालात का जायजा लिया। उन्होंने खुद शहर और आसपास के क्षेत्रों में झेलम नदी के पानी से डूबे हुए इलाकों का दौरा कर हालात को देखा। इसके बाद उन्होंने राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की भी उच्चस्तरीय बैठक में की।
राज्यपाल ने विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों खासतौर पर रेडक्रास द्वारा प्रशिक्षित किए गए लोगों से भी बाढ़ प्रभावितों की सहायता में आगे आने का आग्रह किया है।
इसके बाद राज्यपाल एनएन वोहरा ने 16वीं कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल एचके सिंह से भी राजोरी और पुंछ जिलों में बाढ़ से पैदा स्थिति और राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। जीओसी ने राज्यपाल को बताया कि इन दोनों जिलों में बाढ़ में फंसे एक हजार से अधिक लोगों को सेना ने बचा लिया है। इन लोगों को सेना द्वारा स्थापित राहत शिविरों में रखा गया है।
बाढ़ में 1 लाख हेक्टेयर पर लगी फसल हुई नष्ट
बाढ़ का असर राजोरी की मुख्य फसल मक्की पर भी पड़ा है। 50 फीसदी फसल बारिश की भेंट चढ़ गई है। यदि बारिश न रुकी तो फसल पूरी तरह से नष्ट हो सकती है। जानकारी के अनुसार जिले में एक लाख हेक्टेयर पर मक्की की फसल लगी हुई है। जो अब पक गई थी।
किसानों को कुछ ही दिन में इसकी कटाई का काम शुरू करना था, लेकिन जमीन में पानी इस कदर है कि मक्की नीचे गिरने लगी है। जबकि जो खड़ी फसल है, वह भी पीली पड़ गई है या फिर उसके दाने पानी की वजह से गल गए हैं। जो खाने लायक नहीं रहे। कम मानसून के बावजूद इस साल मक्की की फसल बहुत अच्छी थी, लेकिन बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इसमें 20 हजार हेक्टेयर तो एलओसी पर भी बरबाद हुई है।
बारिश रुकने के आसार नहीं: पिछले छह दिन से हो रही बारिश अब भी रुकने का नाम नहीं ले रही। छह दिन से लगातार बारिश जारी है। शनिवार को भी दिनभर बारिश होती रही। जिसने सामान्य जनजीवन को पूरी तरह से अस्त व्यस्त कर दिया है। बाढ़ प्रभाविक इलाकों का दौरा: भाजपा के जिला प्रधान भारत भूषण वैद्य और भारतीय जनता युवा मोर्चा के राज्य महा सचिव रंजीत तारा ने शनिवार को बाढ़ से प्रभावित इलाकों का दौरा किया और लोगों की समस्याएं सुनीं।
लोगों से कहा गया है कि वह भाजपा की तरफ से उनकी हर एक संभव मदद की जाएगी। साथ ही यह भी कहा कि जिला प्रशासन को भी चाहिए कि इन लोगों की मदद करे।