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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   government can strict in kashmir

कश्मीर में शांति बहाली की सभी कोशिशें नाकाम, हिंसा पर सख्ती के मूड में सरकार

Tue, 06 Sep 2016 11:58 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू Updated Tue, 06 Sep 2016 11:58 AM IST
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घाटी में हिंसा - फोटो : Amar Ujala
दो दिन का जम्मू-कश्मीर दौरा पूरा दिल्ली लौट चुके सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल ने शिद्दत से महसूस किया है कि अमन की राह में अब भी बाधाओं के पहाड़ खड़े हैं।
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बातचीत की पहल पर अलगाववादियों का रुख नकारात्मक रहा। आतंक का पोषण करने वाले कट्टरपंथियों को इस पहल के नाकाम होने में अपनी जीत नजर आने लगी है।

लश्कर-ए-तैयबा ने सर्वदलीय टीम के लिए दरवाजा बंद करने पर अलगाववादियों की सराहना कर अपने हिंसक मंसूबे जाहिर कर दिए हैं। केंद्र की नरमी और केंद्रीय दल की पहल के बावजूद विश्वास का माहौल बनाने की कोशिश उम्मीद के अनुरूप आगे नहीं बढ़ पाई। नतीजा यह कि कश्मीर को हिंसा की आग में अभी और झुलसना पड़ सकता है।

सर्वदलीय समिति का दौरान रहा विफल?

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kashmir - फोटो : PTI
दौरे की समाप्ति पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह अपनी कोशिशों पर इत्मीनान में नजर आए। उन्होंने कहा कि दौरे को विफल नहीं कहा जा सकता। उन्हें इस बात पर संतोष है कि कश्मीर में जमीन के सच से रूबरू होने के बाद अब संसद में विपक्षी दलों का सहयोग सरकार को मिलेगा।

उन्होंने कहा कि सर्वदलीय टीम में विपक्ष के कई ऐसे सांसद शामिल थे, जो अब तक कश्मीर को सही तरीके से समझ नहीं पाए थे। अब उन्होंने हालात को खुद महसूस किया है। जाहिर है राजनाथ का इशारा उस ओर था कि अब कश्मीर में सख्ती की स्थिति में विपक्ष सरकार की मजबूरी को समझ सकेगा। 

सर्वदलीय टीम के सदस्य राजद सांसद जय प्रकाश नारायण यादव ने अमर उजाला से कहा कि राष्ट्र हित सबसे ऊपर है। कश्मीर में हालात खराब हैं, टीम के सदस्यों ने अलगाववादियों से बातचीत की पहल की। सभी हित धारकों को सुनना जरूरी है। लेकिन, समस्या से निपटने के लिए बनने वाली रणनीति में देश की अखंडता को सबसे अधिक महत्व दिया जाना जरूरी है।
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भाजपा-पीडीपी पर खड़े हो रहे कई सवाल

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सुरक्षा के कड़े इंतजाम - फोटो : Amar Ujala
सीपीएम के सीताराम येचुरी ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सभी पक्षों से बातचीत की बात कही थी। इस पर आम सहमति बनी इसलिए विपक्षी सदस्य अलगाववादियों से मिलने गए।

येचुरी ने यह भी कहा कि कश्मीर के कई प्रतिनिधिमंडलों ने भाजपा और पीडीपी के गठबंधन पर सवाल खड़े किए। जदयू के सदस्य शरद यादव ने भी गठबंधन एजेंडे को लागू नहीं किए जाने पर गुस्से की ओर इशारा किया। 

टीम के दौरे के बाद केंद्र के एक्शन प्लान में कश्मीर पर बदली रणनीति सामने आ सकती है। अलगाववादियों से मिलने की कोशिशों पर जम्मू में हुए विरोध ने सर्वदलीय टीम के सामने नया एजेंडा भी प्रस्तुत किया। जम्मू की भावना देश के अन्य हिस्सों से मिलती-जुलती हो सकती है।

नतीजतन केंद्र अब सिर्फ नरमी की राह पर चलने में संकोच कर सकता है। पेलेट गन का विकल्प, अलगाववादियों को पाकिस्तान की फंडिंग पर एनआईए जांच पर ब्रेक और बीएसएफ की वापसी से केंद्र ने जो नरमी का संदेश दिया, उसके अनुकूल परिणाम फिलहाल दिख नहीं रहे हैं। टीम ने जम्मू दौरे के बाद लद्दाख दौरे की बात कर यह संकेत दिया है कि कश्मीर को अलग से नहीं बल्कि पूरे देश के आइने में ही देखा जाएगा। 
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