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बच्चे नहीं आए तो बंद कर दिए प्राइमरी स्कूल

Thu, 27 Nov 2014 08:28 PM IST
Updated Thu, 27 Nov 2014 08:28 PM IST
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girls primary school closed in jammu

जम्मू जिले के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घट रही है। इसी के चलते अब सरकारी स्कूलों में ताला लगने लगा है। शिक्षा विभाग के पास इसकी पूरी जानकारी है, लेकिन अभी तक शिक्षा बंद पडे़ स्कूल को खुलवाने में कामयाबी हासिल नहीं कर पाया है। वहीं बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित अभिभावकों ने निजी स्कूलों में दाखिले का मन बनाना शुरू कर दिया है।

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सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत करीब दो वर्ष से पूरे राज्य में बड़ा जागरूकता अभियान छेड़ रखा है। लगातार रैलियों का आयोजन करके लोगों को बताया जा रहा है कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता भरी शिक्षा प्रदान की जा रही है।
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बच्चों को कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध की जा रही है, लेकिन जागरूकता अभियान के बावजूद सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के बजाए कम हो रही है। हालात यह बन गए हैं कि शिक्षा जोन भलवाल स्थित गर्ल्स प्राइमरी स्कूल कोट गढ़ी में दस महीने पहले ही ताला लग चुका है।
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निजी स्कूलों में दाखिले का मन बनाना शुरू किया

girls primary school closed in jammu

पहले स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या पर्याप्त थी। जैसे जैसे गांव के आसपास निजी स्कूल खुलने लगे तो ग्रामीणों ने अपने बच्चों को सरकारी स्कूल के बजाए निजी स्कूलों में पढ़ाना शुरू कर दिया। दिन व दिन विद्यार्थियों की संख्या घटने लगी और दस महीने पहले हालात यह बन गए कि शिक्षा विभाग को मजबूरन स्कूल में ताला लगाना पड़ा।

शिक्षकों को विभाग ने दूसरे स्कूल में स्थानांतरित कर दिया। बीच में जोनल एजूकेशन आफिसर ने विलेज एजूकेशन कमेटी के सदस्यों व ग्रामीणों के साथ बैठक करके स्कूल को खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिली और फिर किसी ने भी इस तरफ ध्यान नहीं दिया। करीब दस महीने से स्कूल बंद पड़ा है। स्कूल की इमारत का कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

...तो हो सकते हैं कई स्कूल बंद

जिले के दूर दराज ग्रामीण इलाकों में स्थित अन्य कई सरकारी प्राइमरी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घट रही है। अभिभावक बच्चों का भविष्य निजी स्कूलों में सुरक्षित मान रहे हैं। इसलिए दिन व दिन सभी का रुझान निजी स्कूलों की तरफ बढ़ता जा रहा है। अगर जल्द इसके लिए शिक्षा विभाग ने प्रयास किए नहीं किए तो आने वाले समय में कई निजी स्कूल बंद हो सकते हैं।

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