सरहद पार से साथ आए थे चारों फिदायीन
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सरहद पार से चार आतंकी घुसपैठ कर भारतीय सीमा में प्रवेश करने में सफल हुए थे। माना जा रहा है कि शुक्रवार को कठुआ (राजबाग) में थाने पर हमला करने वाले और शनिवार को सांबा में सैन्य शिविर पर हमला करने वाले फिदायीन ने एक साथ ही घुसपैठ की थी। हीरानगर सब डिवीजन से ये आतंकी अलग-अलग हो गए।
शुक्रवार की सुबह राजबाग पुलिस थाने पर हमला हुआ तो शनिवार को सांबा सैन्य शिविर पर। आतंकियों के एक साथ घुसपैठ करने और बाद में अलग-अलग दिशाओं की तरफ जाने की कहानी तब पुख्ता हो गई जब तलाशी अभियान के दौरान पुलिस और सेना की संयुक्त टीम ने हरिया चक नर्सरी से चार जोड़ी जूतों सहित अन्य सामान बरामद किया।
टीए की 158वीं बटालियन, 11 जैक एलआई और पुलिस के संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान हरिया चक नर्सरी से बरामद हुए सामान में चार जोड़ी जूते, एक ट्रैक सूट, दो ग्राउंड शीट, रेनकोट, कोल्ड ड्रिंक की बोतलें और टाफियां शामिल हैं। पुलिस जांच के दौरान जूते गीले पाए गए। ऐसे में इस आशय की पुष्टि मानी जा रही है कि चारों आतंकी हरिया चक नर्सरी में एक साथ मौजूद थे।
वहां से कपड़े बदलकर वह राजबाग और सांबा की ओर बढ़ गए। शुक्रवार को आतंकियों ने सबसे पहले बाइक सवार को अगवा किया था। उसका शव हरिया चक नर्सरी से ही बरामद हुआ था। शनिवार को बरामद हुए सामान का स्थान शव बरामदगी के स्थान से कुछ ही मीटर की दूरी पर था।
सीमावर्ती गांवों में पसरी दहशत
कठुआ के राजबाग और सांबा में सैन्य शिविर पर फिदायीन हमले से अरनिया क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों के लोगों के होश उड़ गए हैं। महज चौबीस घंटों के दरम्यान हुए दो आतंकी हमलों के बाद सीमावर्ती पशोपेश में हैं कि वह घर छोड़ें या नहीं। अरनिया सेक्टर हमेशा से ही पाकिस्तानी गोलाबारी का निशाना रहा है।
चार दिन पहले ही ओक्ट्राय और चाम्लेयाल पोस्टों पर भारत और पाकिस्तान के बीच फ्लैग मीटिंग हुई थी। इसमें तय हुआ था कि दोनों देश सीमा पर शांति बहाली रखेंगे। इसके लोगों को तसल्ली हुई थी कि अब वह कुछ सुकून से तारबंदी के दायरे में भी खेतीबाड़ी कर सकेंगे, लेकिन यह उम्मीदें धरी की धरी रह गई हैं।
लगातार हमले कर आतंकियों ने फिर से दहशत पैदा कर दी है। सरपंच रघुवीर सिंह, जगदीश राज, अवतार सिंह, पूर्व पंच बलदेव सिंह, किसान अमरनाथ, गोपालदास, मोनू गुप्ता आदि ने कहा कि पाकिस्तान का फ्लैग मीटिंग करना सिर्फ धोखा था। आतंकियों के साथ मिलकर पाकिस्तान कभी भी वारदात को अंजाम दे सकता है, जैसा कठुआ और सांबा में हुआ भी।
सीमावर्ती ग्रामीणों का कहना है कि अब तो पहले से अधिक दहशत का माहौल हो गया है। उन्होंने कहा कि अब डर है कि कहीं आतंकी अरनिया क्षेत्र में गांवों को भी निशाना नहीं बना लें। चौबीस घंटों में ही दो हमलों का खौफ गांव के लोगों में साफ देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अब वह इस असमंजस में हैं कि गांव छोड़ें या नहीं। कहीं पाकिस्तान और आतंकी उनके गांवों को भी निशाना नहीं बना लें।