{"_id":"5dcac33e8ebc3e5b28216d7a","slug":"foreign-terrorists-wiped-out-in-kashmir-now-only-local-terrorists-remain-in-valley","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कश्मीर में विदेशी आतंकियों का सफाया, अब सिर्फ 200 स्थानीय दहशतगर्द ही बचे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कश्मीर में विदेशी आतंकियों का सफाया, अब सिर्फ 200 स्थानीय दहशतगर्द ही बचे
Tue, 12 Nov 2019 08:05 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Tue, 12 Nov 2019 08:05 PM IST
विज्ञापन
आतंकी (प्रतीकात्मक तस्वीर)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कश्मीर में अब आतंकवाद स्थानीय आतंकियों पर टिक गया है। विदेशी आतंकियों का एक तरह से कश्मीर से सफाया हो चुका है। पुलवामा, बांदीपोरा, कुपवाड़ा, शोपियां और अनंतनाग जिलों में इक्का दुक्का विदेशी आतंकी हो सकते हैं।
लेकिन सूत्रों का कहना है कि अब कश्मीर में 200 के आसपास ही आतंकी बचे हैं, जो स्थानीय हैं। यह भी आपस में रिश्तेदार हैं। यहीं सबसे बड़ा कारण है, इनको ढेर करने में सुरक्षा एजेंसियों को नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ रही है।
जानकारी के अनुसार कश्मीर में सक्रिय स्थानीय आतंकियों में औसत हर चार आतंकी आपस में रिश्तेदार हैं। इसलिए इनकी मूवमेंट भी आसान हो रही है। कहीं ने कहीं इनको पनाह मिल जाती है। वह रिश्तेदारी का लाभ उठाकर अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। कश्मीर में इन आतंकियों का कमान देने वाले भी नहीं है।
विज्ञापन
तमाम आतंकी कमांडर मारे जा चुके हैं। विदेशी आतंकी भी नहीं है। कश्मीर में सक्रिय आतंकियों की गिनती अब 30 फीसदी तक रह गई है। भारतीय सेना इन आतंकियों को आतंकवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रही है।
विज्ञापन
लेकिन सूत्रों का कहना है कि अब कश्मीर में 200 के आसपास ही आतंकी बचे हैं, जो स्थानीय हैं। यह भी आपस में रिश्तेदार हैं। यहीं सबसे बड़ा कारण है, इनको ढेर करने में सुरक्षा एजेंसियों को नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ रही है।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार कश्मीर में सक्रिय स्थानीय आतंकियों में औसत हर चार आतंकी आपस में रिश्तेदार हैं। इसलिए इनकी मूवमेंट भी आसान हो रही है। कहीं ने कहीं इनको पनाह मिल जाती है। वह रिश्तेदारी का लाभ उठाकर अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। कश्मीर में इन आतंकियों का कमान देने वाले भी नहीं है।
विज्ञापन
तमाम आतंकी कमांडर मारे जा चुके हैं। विदेशी आतंकी भी नहीं है। कश्मीर में सक्रिय आतंकियों की गिनती अब 30 फीसदी तक रह गई है। भारतीय सेना इन आतंकियों को आतंकवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रही है।
कुछ ही दिन पहले सेना की तरफ से दावा किया गया था कि पिछले कुछ महीनों में 50 स्थानीय आतंकी आतंकवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में आ गए हैं। यहीं प्रयास सेना की तरफ से जारी हैं।
एक सैन्य अफसर ने कहा कि स्थानीय आतंकी आपस में रिश्तेदार हैं। इनके सवाईव करने का मुख्य कारण ही यहीं है।
एक सैन्य अफसर ने कहा कि स्थानीय आतंकी आपस में रिश्तेदार हैं। इनके सवाईव करने का मुख्य कारण ही यहीं है।