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जिस पानी ने उजाड़ा, उसी को पीकर बुझाई प्यास

Wed, 10 Sep 2014 11:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उधमपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, उधमपुर Updated Wed, 10 Sep 2014 11:46 AM IST
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for survival family drink dirty flood water

जम्मू के चक बजालता के मोहम्मद सलीम के परिवार ने दो दिन तक खड्ड में बहता हुआ पानी पीकर गुजारा किया। गांवों तक जाने का मार्ग कट गया। रास्ता दलदल बन गया और पानी की मोटर जमीन में दब गई। प्यास बुझाने के लिए वही पानी पिया, जिसने घर उजाड़ दिया।

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बजालता गांव का रास्ता पिछले चार दिनों से कटा हुआ है। पंजतीर्थी से सिदद्ड़ा होते हुए बजालता को जाने वाला मार्ग सिद्दड़ा पुल के कुछ कदम पहले ही पहाड़ी गिरने से बंद हो गया है। बजालता मार्ग भी बुरी तरह से भूस्खलन का शिकार हुआ है। बिजली के खंभे टूट गए हैं। पानी के लिये टैंकरों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
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कई एकड़ कृषि भूमि खड्ड में तबदील हो गई है। पहली नजर में देखने पर पता नहीं चलता है कि खेत और नाले में क्या अंतर है। गांव का पोल्ट्री फार्म मुर्गियों की बजाय झाड़ियों और कीचड़ से भरा है। गांव के लियाकत अली की भी चार एकड़ फसल लगी भूमि बर्बाद हो गई। मकान बुरी तरह से टूट गया। दुधारू भैंस पानी में बह गई।
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आप बिस्कुट लाई हो

मां के साथ चारपाई पर दुबके बैठे पांच वर्ष के शहराज से बात करने की कोशिश की तो जुबान से चार ही शब्द निकले, आप बिस्कुट लाई हो। मां सलीमा कहती है कि शहराज चार दिनों से बिस्कुट की रट लगाए है। 63 वर्ष के सलीम खान के घर में कुछ नहीं बचा है। जेब में दो रुपये नहीं हैं कि पोते शहराज को बिस्कुट ला दे।

शनिवार को थी सोनू की शादी

सिद्दड़ा से कुछ किलोमीटर दूर गांव मंझीह के सोनू कुमार की शनिवार को शादी थी। बाढ़ ने ऐसा कहर बरपाया कि शादी तो बहुत दूर की बात घर तक का निशां मिट गया। शुक्रवार की सुबह जिस घर में शादी की बातें हो रही थी उसी घर का शनिवार दोपहर तक कोई अंश शेष नहीं बचा। परिवार ने किसी तरह से पहाड़ी पर चढ़कर जान बचाई


इरफान ने बचाई बीस लोगों की जान

गांव मंझीह में बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए इरफान ने अपनी जान की परवाह नहीं की। उसने गांव के बीस लोगों की जान बचाने का साहसी काम किया। गांवों के कच्चे मकान बाढ़ में धंस गये। फंसे लोगों की चीख पुकार सुन मदद के लिए इरफान ने हिम्मत दिखाई और बीस लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

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