फ्लोरीकल्चर पार्कों में कचरे से बनेगी जैविक खाद
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शहर के छोटे-बड़े पार्कों में पौधों की टहनियों पत्तों का कचरा अब दुविधा के बजाय सुविधा का माध्यम बनेगा। फ्लोरीकल्चर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संयुक्त प्रयास से शहर के पार्कों में आन साइट कंपोस्टिंग की कवायद शुरू कर दी गई है।
जैविक कचरे को जलाने के बजाय उसे खाद बनाकर पार्कों में इस्तेमाल किया जाएगा। फ्लोरीकल्चर विभाग के गांधीनगर स्थित कंपार्टमेंट नंबर एक में विभाग और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के मालियों को प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा आन साइट कंपोस्टिंग का प्रशिक्षण दिया गया।
इस अवसर पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की म्यूनिसिपल सालिड वेस्ट इंचार्ज साइंटिस्ट अनुराधा ने रासायनिक खाद के प्रभावों की विस्तार से जानकारी दी।
कर्मचारियों को ऑन साइट कंपोस्टिंग की प्रायोगिक जानकारी दी गई
उन्होंने बताया कि रासायनिक खाद से कुछ समय के लिए अच्छे नतीजे जरूर मिलते हैं, लेकिन इससे दुष्प्रभाव कहीं अधिक होते हैं। यदि लोगों की आवाजाही के लिहाज से व्यस्त रहने वाले पार्क जैसे सार्वजनिक स्थल के जैविक कचरे का ठीक से प्रबंधन किया जाए तो कई समस्याओं का हल हो सकता है।
उन्होंने कहा कि शहरी जीवन से जुड़े कुल कचरे में से पचास से पचपन फीसदी जैविक श्रेणी का होता है, जिसे खाद बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस अवसर पर विभागीय मुलाजिमों को बाकायदा ऑन साइट कंपोस्टिंग की प्रायोगिक जानकारी दी गई। फ्लोरीकल्चर विभाग के निदेशक अशोक कुमार गुप्ता ने कहा जैविक कचरे को खाद में परिवर्तित करने के अभियान को ज्यादा से ज्यादा विस्तार दिया जाएगा।