अनंतनाग से लेकर पुलवामा तक कई बार आतंकी निशाने पर रहे जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान
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कश्मीर में राज्य पुलिस को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। अब तक आतंकियों के निशाने पर सेना और सेना के कैंप रहते थे, लेकिन पिछले दो सालों से आतंकियों के निशाने पर राज्य पुलिस भी है। पहली बार कश्मीर घाटी में जिला पुलिस लाइन पर फिदायीन हमला किया गया है।
इस हमले के बाद सभी जिला पुलिस लाइन की सुरक्षा बढ़ा गई है। आतंकियों की इस बदली रणनीति ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। आतंकी वुरहान वानी के मरने के बाद से लगातार पुलिस को घाटी में आतंकियों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है।
बुरहान को पुलिस ने मौत के घाट उतारा था। इसके बाद से ही लगातार पुलिस निशाने पर है। इससे पहले आतंकी पुलिस के अफसरों और सिपाहियों को निशाना बनाते रहे हैं।
कश्मीर में कब कब आतंकियों ने सुरक्षाबलों को बनाया निशाना
17 जून 2017
आतंकियों ने अनंतनाग के अच्छाबल रोड पर कुलगाड़ गांव पर घात लगाकर पुलिस पार्टी पर हमला किया। इसमें सब इंस्पेक्टर फिरोज अहमद सहित 6 पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी गई।
23 जून 2017
कश्मीर के उपद्रवियों ने मस्जिद में पहुंचे डीएसपी अयूब पंडित की पीट-पीटकर हत्या कर दी।
27 जुलाई 2017
शोपियां में कांस्टेबल की गोली मारकर आतंकियों ने हत्या कर दी। 27 जुलाई को ही आतंकियों ने कुलगाम जिले के खुदवानी क्षेत्र में रहने वाले एसपी दाऊद का घर जला दिया।
28 मई 2017
आतंकियों ने कैश वैन पर ग्रेनेड हमला कर चार पुलिस कर्मियोें की हत्या कर दी।
6 मार्च 2017
आतंकियों ने पुलिस को खुली चेतावनी देकर कहा कि पुलिस कर्मी आतंकियों के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान से दूर रहें। अन्यथा उनके परिवारों को मौत के घाट उतार दिया जाएगा।