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फैक्स मशीन को लेकर ट्विटर वार, उमर बोले फैक्स मशीन अब भी काम नहीं कर रही, राजभवन ने दिया यह जवाब
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Sun, 02 Dec 2018 10:30 PM IST
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उमर अब्दुल्ला
- फोटो : फाइल
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राजभवन का फैक्स मशीन रविवार को एक बार फिर चर्चा में रहा। इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला व राजभवन के बीच ट्विटर वार भी हुई। ज्ञात हो कि पिछले महीने सरकार बनाने के दावे के केंद्र बिंदु में भी राजभवन की फैक्स मशीन थी।
उमर ने दावा किया है कि उन्होंने रविवार को राज्यपाल सत्यपाल मलिक को एक पत्र भेजने की कोशिश की लेकिन फैक्स मशीन अब भी काम नहीं कर रही है। वे राज्य में स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) दिए जाने की प्रक्रिया में प्रस्तावित बदलावों से जुड़ी खबरों को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए फैक्स भेजने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने ट्विटर पर यह खत साझा भी किया। उमर ने ट्वीट कर कहा कि मैं जम्मू कश्मीर के राज्यपाल को एक खत फैक्स करने की कोशिश कर रहा हूं लेकिन फैक्स मशीन अब भी काम नहीं कर रही है।
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फोन पर जवाब देने वाले ऑपरेटर ने कहा कि रविवार होने की वजह से फैक्स ऑपरेटर छुट्टी पर है। मैं कल फिर से प्रयास करूंगा। इस बीच मैं इस खत को सोशल मीडिया पर डालने के लिए मजबूर हूं। उन्होंने 21 नवंबर की एक पोस्ट को रीट्वीट करते हुए कहा-राजभवन को तत्काल एक नई फैक्स मशीन की जरूरत है।
उमर के ट्वीट के बाद राजभवन की ओर से भी स्थिति को साफ करने के लिए ट्वीट किया गया। इसमें कहा गया कि उमर अब्दुल्ला की ओर से राजभवन को भेजा गया फैक्स प्राप्त हो गया है। इसकी प्राप्ति की सूचना उमर के सलाहकार तनवीर सादिक को शाम 3.44 बजे ही दे दी गई थी।
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I’m trying to fax a letter to @jandkgovernor but the fax machine still isn’t working. The operator who answered the phone says the fax operator is on holiday as it’s a Sunday. Will attempt again tomorrow in the mean time am forced to put the letter out through social media. pic.twitter.com/SykDQQPiOU
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) December 2, 2018
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उमर ने दावा किया है कि उन्होंने रविवार को राज्यपाल सत्यपाल मलिक को एक पत्र भेजने की कोशिश की लेकिन फैक्स मशीन अब भी काम नहीं कर रही है। वे राज्य में स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) दिए जाने की प्रक्रिया में प्रस्तावित बदलावों से जुड़ी खबरों को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए फैक्स भेजने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने ट्विटर पर यह खत साझा भी किया। उमर ने ट्वीट कर कहा कि मैं जम्मू कश्मीर के राज्यपाल को एक खत फैक्स करने की कोशिश कर रहा हूं लेकिन फैक्स मशीन अब भी काम नहीं कर रही है।
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फोन पर जवाब देने वाले ऑपरेटर ने कहा कि रविवार होने की वजह से फैक्स ऑपरेटर छुट्टी पर है। मैं कल फिर से प्रयास करूंगा। इस बीच मैं इस खत को सोशल मीडिया पर डालने के लिए मजबूर हूं। उन्होंने 21 नवंबर की एक पोस्ट को रीट्वीट करते हुए कहा-राजभवन को तत्काल एक नई फैक्स मशीन की जरूरत है।
Raj Bhavan clarifies that letter faxed by Sh. Omar Abdullah, former Chief Minister J&K, was received by the Raj Bhavan and its receipt was confirmed to Sh. Tanvir Sadiq, Advisor to Sh. Omar Abdullah, at 3:44 PM today.
— Office of J&K Governor (@jandkgovernor) December 2, 2018
उमर के ट्वीट के बाद राजभवन की ओर से भी स्थिति को साफ करने के लिए ट्वीट किया गया। इसमें कहा गया कि उमर अब्दुल्ला की ओर से राजभवन को भेजा गया फैक्स प्राप्त हो गया है। इसकी प्राप्ति की सूचना उमर के सलाहकार तनवीर सादिक को शाम 3.44 बजे ही दे दी गई थी।
नेकां पीआरसी में किसी भी बदलाव का करेगी विरोध
नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी पीआरसी जारी करने की प्रक्रिया में किसी भी बदलाव का विरोध करेगी। उन्होंने राज्य प्रशासनिक परिषद (एसएसी) के निर्देशों को रियासत की जनसांख्यिकी बिगाड़ने का प्रयास बताते हुए कहा कि यह जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे के लिए हानिकारक है। उन्होंने राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा कि ऐसे समय में आपको पत्र लिखने के लिए बाध्य हैं जब आप पीआरसी नियमों में परिवर्तन करने पर विचार कर रहे हैं।
एसएसी राज्य में संस्थानों के कामकाज और प्रक्रियाओं में एकपक्षीय रूप से परिवर्तन ला रहा है। यह लोकतंत्र और सह भागीदारी शासन की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य में किसी भी राजनीतिक पार्टी या अन्य हितधारक के साथ इस पर कोई मशविरा नहीं किया गया। इससे संवेदनशील जम्मू-कश्मीर में शांति भंग हो सकती है। विधानसभा भंग है और चुनाव अगले कुछ महीनों में होने वाले हैं। इससे आपके प्रशासन के कदम पर सवाल उठाए जा सकते हैं। उम्मीद है कि आप इस संबंध में अपने निर्णय को वापस लेंगे।
एसएसी राज्य में संस्थानों के कामकाज और प्रक्रियाओं में एकपक्षीय रूप से परिवर्तन ला रहा है। यह लोकतंत्र और सह भागीदारी शासन की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य में किसी भी राजनीतिक पार्टी या अन्य हितधारक के साथ इस पर कोई मशविरा नहीं किया गया। इससे संवेदनशील जम्मू-कश्मीर में शांति भंग हो सकती है। विधानसभा भंग है और चुनाव अगले कुछ महीनों में होने वाले हैं। इससे आपके प्रशासन के कदम पर सवाल उठाए जा सकते हैं। उम्मीद है कि आप इस संबंध में अपने निर्णय को वापस लेंगे।