बिना पैसे कैसे होगी बिजली सप्लाई
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रियासत में बिजली विभाग के 48000 ट्रांसफार्मरों और कुल मिलाकर 7000 करोड़ के करीब के बिजली ढांचे की मरम्मत के लिए विभाग के पास धन का अभाव समस्या पैदा कर रहा है। सालाना बिजली विभाग को ढांचे की मरम्मत और रखरखाव के लिए करीब 210 करोड़ की दरकार है, लेकिन विभाग के पास 41 करोड़ का फंड ही उपलब्ध है।
अप्रैल महीने में खराब मौसम के चलते तापमान में गिरावट से अभी चाहे ढांचे पर ओवरलोड ज्यादा नहीं है, लेकिन गर्मी शुरू होने के साथ ही ढांचे पर ओवरलोड बढ़ने पर असली समस्या शुरू होगी। रियासत में पहले से ही बिजली की मांग और उपलब्धता में अंतर करीब 1000 मेगावाट से ज्यादा का है।
गर्मियों में इसमें और बढ़ोतरी हो जाती हैं और ढांचे पर ओवरलोड पड़ने पर हालात बदतर हो जाते हैं। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूरी रियासत में विभाग का करीब 7000 करोड़ का ढांचा हैं।
इसमें 48000 के करीब बिजली ट्रांसफार्मर हैं। विभाग को कुल ढांचागत संपत्ति का तीन फीसदी मरम्मत और रखरखाव के लिए चाहिए। 210 करोड़ की राशि की जरूरत है, जबकि विभाग के पास केवल 41 करोड़ की राशि ही उपलब्ध है।
13459 मिलियन यूनिट बिजली खर्च
उपमुख्यमंत्री एवं बिजली मंत्री डा. निर्मल सिंह के अनुसार रियासत में बिजली की आपूर्र्ति में सुधार की दिशा में उचित कदम उठाए जा रहे हैं। बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ बैठकें की गई हैं और यह सिलसिला जारी रखा जाएगा। जितने फंड की जरूरत होगी, उपलब्ध करवाया जाएगा।
रियासत जम्मू कश्मीर में करीब 13459 मिलियन यूनिट बिजली खर्च करने पर सरकार की ओर से 6266.13 करोड़ का खर्च किया गया है, जबकि फरवरी 2015 तक विभाग को राजस्व केवल 1527.67 करोड़ की राशि का ही आ पाया है। कुल मिलाकर करीब 4163 करोड़ का घाटा बिजली के क्षेत्र में सालाना रियासती सरकार को उठाना पड़ रहा है।
जम्मू कश्मीर में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन उपलब्धता में पिछले साल से कुछ खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। बिजली की मांग 2657 मेगावाट के करीब है, जबकि बिजली की खरीद करने के बावजूद भी उपलब्धता 1600 मेगावाट के करीब ही है।