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जम्मू कश्मीर की महबूबा सरकार को उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग से बड़ा झटका

Fri, 24 Mar 2017 10:52 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू Updated Fri, 24 Mar 2017 10:52 PM IST
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election commission gives orders against mehbooba mufti government
महबूबा मुफ्ती सईद - फोटो : PTI

जम्मू कश्मीर की महबूबा सरकार को उपचुनावों से पहले बड़ा झटका लगा है। चुनाव आयोग ने चुनाव की तिथि घोषित होने के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के उपाध्यक्ष पदों पर की गई नियुक्तियों को रद करने का आदेश जारी किया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी शांतमनु ने इसकी पुष्टि की है।

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उन्होंने बताया कि आयोग ने राज्य सरकार से चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक पीएसयू में नियुक्तियों को स्थगित रखने को कहा है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि इस संबंध में कोई आदेश चुनाव घोषित होने की तिथि नौ मार्च या इसके बाद जारी किया गया हो तो उसे तत्काल प्रभाव से रद माना जाए। 
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सूत्रों का कहना है कि नेकां की आपत्ति के बाद चुनाव आयोग की दिल्ली में हुई बैठक के बाद यह फैसला लिया गया है। बीते 10 मार्च को रियासती सरकार ने 16 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति की थी। इनमें पीडीपी, भाजपा तथा पीपुल्स कांफ्रेंस के कार्यकर्ता शामिल थे। चुनाव की घोषणा के एक दिन बाद की गई इन नियुक्तियों के सियासी मायने निकाले जा रहे थे।

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नेकां-कांग्रेस ने किया स्वागत, भाजपा-पीडीपी खामोश

election commission gives orders against mehbooba mufti government
भाजपा - फोटो : DEMO Photo

कहा जा रहा था कि श्रीनगर तथा अनंतनाग उपचुनाव में फायदे के लिए सरकार ने इन नियुक्तियों को मंजूरी दी है। सभी की नियुक्ति 80 हजार रुपये वेतन पर की गई थी। इनमें से कई उपाध्यक्षों ने पदभार ग्रहण कर लिया है और कामकाज भी शुरू कर दिया है। 

पीएसयू में नियुक्ति के बाद ही बवाल शुरू हो गया। नेकां की ओर से चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई। उसका कहना था कि यह नियुक्तियां आचार संहिता का उल्लंघन है। साथ ही सरकार के इस फैसले से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होगी। नेकां के कश्मीर संभाग के अध्यक्ष नसीर असलम वानी ने आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की थी। 

चुनाव आयोग के फैसले का नेकां और कांग्रेस ने स्वागत किया है जबकि भाजपा व पीडीपी खामोश है। मुख्य विपक्षी दल नेकां के महासचिव अली मोहम्मद सागर का कहना है कि यह नियुक्तियां सरासर आचार संहिता का उल्लंघन थी। सरकार की ओर से चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की अब भी कोशिशें जारी हैं। उद्घाटन किए जा रहे हैं। नियुक्तियां की जा रही हैं। यह सब धड़ल्ले से चल रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कम से कम आचार संहिता उल्लंघन पर संज्ञान तो लिया गया। कांग्रेस प्रवक्ता रविंद्र शर्मा ने कहा कि आचार संहिता उल्लंघन पर नकेल कसा जाना स्वागत योग्य कदम है। भाजपा और पीडीपी की ओर से नेता टिप्पणी करने से कतराते रहे।

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