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Jammu News: हुनर का कोई जेंडर नहीं, तकनीकी ट्रेड में आगे आएं बेटियां
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- आईटीआई में 23 लड़कों के बीच अकेली छात्रा ने छोड़ा इलेक्ट्रीशियन ट्रेड, बदलनी होगी सोच
- ब्यूटीशियन और कंप्यूटर तक सीमित न रहे पसंद, इलेक्ट्रीशियन-प्लंबिंग में भी हैं अवसर
रिया सरमाल
जम्मू। हुनर किसी जेंडर का मोहताज नहीं होता। मशीनों पर काम करना हो या बिजली की वायरिंग, तकनीकी कौशल सीखने और उसमें कॅरिअर बनाने की क्षमता लड़कियों में भी उतनी ही है जितनी लड़कों में।
इसके बावजूद सरकारी आईटीआई जम्मू में इलेक्ट्रीशियन और प्लंबिंग जैसे ट्रेड में छात्राओं की भागीदारी कम है। ब्यूटीशियन, कंप्यूटर और स्टेनोग्राफी जैसे विकल्पों में उनकी रुचि अधिक दिखती है। संस्थान में छात्राओं के लिए तकनीकी शिक्षा के दरवाजे खुले हैं। यहां ब्यूटीशियन, कंप्यूटर, स्टेनोग्राफी, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबिंग, बसोहली पेंटिंग और फुलकारी सहित कई ट्रेड उपलब्ध हैं। हर बैच में करीब 24 विद्यार्थियों की क्षमता है। जरूरत है कि छात्राएं अपनी पसंद और संभावनाओं का दायरा बढ़ाएं और उन ट्रेड को भी आजमाएं, जिन्हें अक्सर लड़कों से जोड़कर देखा जाता है।
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23 लड़कों के बीच अकेली छात्रा ने छोड़ा ट्रेड
इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में दाखिला लेने वाली एक छात्रा ने कोर्स छोड़ दिया। कक्षा में 23 छात्र थे। यह उदाहरण तकनीकी ट्रेड में छात्राओं की कम भागीदारी को सामने लाता है। इंस्टक्टर सोनिका के अनुसार संस्थान विद्यार्थियों पर किसी खास ट्रेड को चुनने के लिए दबाव नहीं डाल सकते। विकल्प देना जरूरी है, लेकिन विद्यार्थियों को रुचि और भविष्य की संभावनाओं के आधार पर फैसला करना होता है।
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परंपरागत सोच से आगे, हुनर से बनाएं पहचान
आईटीआई के प्रिंसिपल राशिद शेख का कहना है कि छात्राओं को तकनीकी ट्रेड अपनाने के लिए आगे आना चाहिए। वे भी लड़कों की तरह प्रशिक्षण लेकर इन क्षेत्रों में अपनी जगह बना सकती हैं। इलेक्ट्रीशियन या प्लंबिंग जैसे ट्रेड चुनना केवल एक कोर्स में दाखिला लेना नहीं, बल्कि अपनी क्षमता पर भरोसा जताना भी है। छात्राओं के लिए जरूरी है कि वे कॅरिअर का चुनाव रूढ़ धारणाओं के बजाय अपनी रुचि, हुनर और अवसरों को देखकर करें। सही प्रशिक्षण और आत्मविश्वास के साथ तकनीकी क्षेत्र भी उनके लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत रास्ता बन सकता है।
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आईटीआई में ये कोर्स भी
वेल्डर, ट्रैक्टर मैकेनिक, राजमिस्त्री, वुडवर्क कारपेंटर, इलेक्ट्रीशियन, रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग टेक्निशियन, हेल्थ सेनेटेरी इंस्पेक्टर, ड्राफ्टमैन सिविल।
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- ब्यूटीशियन और कंप्यूटर तक सीमित न रहे पसंद, इलेक्ट्रीशियन-प्लंबिंग में भी हैं अवसर
रिया सरमाल
जम्मू। हुनर किसी जेंडर का मोहताज नहीं होता। मशीनों पर काम करना हो या बिजली की वायरिंग, तकनीकी कौशल सीखने और उसमें कॅरिअर बनाने की क्षमता लड़कियों में भी उतनी ही है जितनी लड़कों में।
इसके बावजूद सरकारी आईटीआई जम्मू में इलेक्ट्रीशियन और प्लंबिंग जैसे ट्रेड में छात्राओं की भागीदारी कम है। ब्यूटीशियन, कंप्यूटर और स्टेनोग्राफी जैसे विकल्पों में उनकी रुचि अधिक दिखती है। संस्थान में छात्राओं के लिए तकनीकी शिक्षा के दरवाजे खुले हैं। यहां ब्यूटीशियन, कंप्यूटर, स्टेनोग्राफी, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबिंग, बसोहली पेंटिंग और फुलकारी सहित कई ट्रेड उपलब्ध हैं। हर बैच में करीब 24 विद्यार्थियों की क्षमता है। जरूरत है कि छात्राएं अपनी पसंद और संभावनाओं का दायरा बढ़ाएं और उन ट्रेड को भी आजमाएं, जिन्हें अक्सर लड़कों से जोड़कर देखा जाता है।
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23 लड़कों के बीच अकेली छात्रा ने छोड़ा ट्रेड
इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में दाखिला लेने वाली एक छात्रा ने कोर्स छोड़ दिया। कक्षा में 23 छात्र थे। यह उदाहरण तकनीकी ट्रेड में छात्राओं की कम भागीदारी को सामने लाता है। इंस्टक्टर सोनिका के अनुसार संस्थान विद्यार्थियों पर किसी खास ट्रेड को चुनने के लिए दबाव नहीं डाल सकते। विकल्प देना जरूरी है, लेकिन विद्यार्थियों को रुचि और भविष्य की संभावनाओं के आधार पर फैसला करना होता है।
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परंपरागत सोच से आगे, हुनर से बनाएं पहचान
आईटीआई के प्रिंसिपल राशिद शेख का कहना है कि छात्राओं को तकनीकी ट्रेड अपनाने के लिए आगे आना चाहिए। वे भी लड़कों की तरह प्रशिक्षण लेकर इन क्षेत्रों में अपनी जगह बना सकती हैं। इलेक्ट्रीशियन या प्लंबिंग जैसे ट्रेड चुनना केवल एक कोर्स में दाखिला लेना नहीं, बल्कि अपनी क्षमता पर भरोसा जताना भी है। छात्राओं के लिए जरूरी है कि वे कॅरिअर का चुनाव रूढ़ धारणाओं के बजाय अपनी रुचि, हुनर और अवसरों को देखकर करें। सही प्रशिक्षण और आत्मविश्वास के साथ तकनीकी क्षेत्र भी उनके लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत रास्ता बन सकता है।
आईटीआई में ये कोर्स भी
वेल्डर, ट्रैक्टर मैकेनिक, राजमिस्त्री, वुडवर्क कारपेंटर, इलेक्ट्रीशियन, रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग टेक्निशियन, हेल्थ सेनेटेरी इंस्पेक्टर, ड्राफ्टमैन सिविल।