पाक की गोलाबारी के बाद बिगड़ी सीमावर्ती ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था
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अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गोलाबारी अब बंद है। इससे राहत तो जरूर है, लेकिन पिछले दिनों हुई भारी गोलाबारी से सीमावर्ती ग्रामीण इलाकों की अर्थ व्यवस्था चरमरा गई है। कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें रोजी-रोटी की चिंता सता रही है। इनकी जमीन गोलों की जद में है और मवेशी मारे जा चुके हैं।
गोलाबारी से मिले जख्मों की बात करते ही सीमावर्ती ग्रामीण कराह उठते हैं। सीमा पर रहने वाले ज्यादातर लोगों की रोजी-रोटी उनके मवेशियों और खेतीबाड़ी पर निर्भर करती है। सीमा पार से हुई भारी गोलाबारी में लोगों की रोजी-रोटी छिन गई है। कई ऐसे किसान हैं, जिनके मवेशी मारे जा चुके हैं।
आरएस पुरा के गांव जोड़ा फार्म में पाकिस्तानी गोलाबारी की वजह से 127 मवेशी मारे गए। इनमें भैंस, गाय, भेड़, बकरी शामिल हैं। गांव के रहने वाले मोलवी रोशन दीन का कहना है कि हम लोग पूरी तरह से मवेशियों पर निर्भर हैं।
मवेशियों के दूध से ही गुजारा होता है। गोलाबारी में मवेशी मारे गए। अब रोजी-रोटी का कोई साधन नहीं है। गांव सुचेतगढ़ में भी एक ही घर में सात मवेशी मारे गए।
सरकार के मुआवजे से असंतुष्ट लोग
जान जाने पर पांच लाख रुपये, गाय भैंस मारे जाने पर 30 हजार, भेड़-बकरी मारे जाने पर 30 हजार रुपये का मुआवजा केंद्र सरकार की तरफ से तय किया गया है। इससे लोग असंतुष्ट हैं। गांव सुचेतगढ़ के दर्शन का कहना है कि इससे कई गुणा अधिक दाम पर उनके मवेशी हैं।
इतने मुआवजे से क्या होगा। वहीं कई लोगों के घर भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। गांव सुचेतगढ़ के सुदर्शन चौधरी के घर को भी काफी नुकसान पहुंचा। परिवार का कहना है कि इतनी मेहनत से घर बनाए गए हैं। एक गोले से क्षतिग्रस्त हो गया।
राशि बढ़ाने पर करेंगे विचार
पाकिस्तानी गोलाबारी से हुए नुकसान का आंकलन कर लिया गया है। धीरे-धीरे प्रभावित लोगों को राहत देने की कोशिश की जा रही है। राहत राशि बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा। लोगों की हर संभव मदद की जाएगी। साथ ही घरों में बनाए जाने वाले बंकरों का निर्माण भी जल्द किया जाएगा।
हेमंत शर्मा, मंडलायुक्त, जम्मू