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बच्चा बिलख रहा हो, तो चुनाव की कौन सोचे?

Sun, 26 Oct 2014 11:52 AM IST
Updated Sun, 26 Oct 2014 11:52 AM IST
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EC's move to hold Jammu and Kashmir polls in peak winter

झारखंड के साथ जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद कश्मीर घाटी में कई लोगों ने नाराजगी जताई है। झारखंड और जम्मू कश्मीर में 25 नवंबर से मतदान शुरू होगा और 23 दिसंबर को मतगणना होगी।

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जम्मू-कश्मीर में भारत समर्थक राजनीतिक दलों की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। कई समूहों का कहना है कि भयानक बाढ़ से उबरने के लिए भारत सरकार की ओर से कश्मीर को और अधिक समय दिया जाना चाहिए था। जम्मू के कुछ इलाक़ों और कश्मीर को 7 सितंबर 2014 को विनाशकारी बाढ़ का सामना करना पड़ा था।
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चुनाव मज़ाक है

EC's move to hold Jammu and Kashmir polls in peak winter

अब्दुल राशिद भट्ट की हिम्मत टूट चुकी है। वे अपने तीन भाइयों की 11 बेटियों सहित लंबे-चौड़े परिवार के अकेले रखवाले बचे हैं। अब्दुल कहते हैं, 'यह सब एक मज़ाक ही तो है। हम इंतज़ार करते रहे कि प्रधानमंत्री मोदी हमारे पास आएंगे पर हमसे मिलने के बजाय वे सियाचिन घूमते रहे।

चुनाव का मक़सद शासन का फ़ायदा जनता तक पहुंचाना होता है। इस बार तो जैसे अफ़रातफ़री मची है। अधिकारी अब चुनावों में मशगूल हो जाएंगे और हमारी केस फ़ाइलें फिर धूल फांकने लगेंगी।'

उनकी पत्नी सारा भट्ट कहती हैं कि उन इलाक़ों में मतदान एक मज़ाक ही साबित होगा जहां लोग बेघर हो चुके हैं।सारा भट्ट ने कहा, 'वो मां मतदान के बारे में कैसे सोचे जिसका बच्चा दूध के लिए बिलख रहा है।'

मामूली राहत राशि

EC's move to hold Jammu and Kashmir polls in peak winter

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़ हाल की बाढ़ में 60 हज़ार से अधिक लोगों के घर तबाह हो गए। कश्मीर को एक लाख करोड़ रुपए की संपत्ति का नुक़सान उठाना पड़ा है।

नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर सत्तारूढ़ दल के एक प्रमुख नेता ने बताया, 'हमने 44000 करोड़ रुपए के राहत पैकेज की घोषणा की पर प्रधानमंत्री की ओर से मात्र 700 करोड़ रुपए की मामूली रकम का ऐलान किया गया। यही नहीं, इसका कुछ हिस्सा बाढ़ राहत कार्य में केंद्रीय बलों को उनकी मदद के एवज़ में चुकाना होगा।'

स्थानीय एसेंबली के निर्दलीय सदस्य इंजीनियर अब्दुल राशिद ने कहा, 'जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मसला उठाया तो हमारे प्रधानमंत्री ने कहा कि यह मौक़ा राजनीतिक मसलों पर बात करने का नहीं है क्योंकि कश्मीर की जनता परेशान है।'

वे कहते हैं, 'मैं प्रधानमंत्री से पूछता हूं कि अब हालात बेहतर कैसे हो गए जबकि अभी भी हज़ारों बेघर इधर-उधर भटक रहे हैं और जीवन पटरी से उतर चुका है।'

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हिंदूबहुल इलाके

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मुख्य चुनाव अधिकारी वीएस संपत ने बताया कि शनिवार से चुनावी आचार संहिता लागू हो गई है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 87 सीटें हैं। पारंपरिक तौर पर जम्मू के हिंदूबहुल इलाक़े कांग्रेस का गढ़ माने जाते रहे हैं लेकिन ये बीते दौर की बात हो चुकी है।

स्थानीय भाजपा नेता खालिद जहांगीर कहते हैं, 'मोदी लहर आज भी बरक़रार है और हम इस बार पिछली बार की 11 सीटों को तिगुना करेंगे।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह सहित भाजपा के शीर्ष नेताओं ने जम्मू-कश्मीर में अगली सरकार बनाने की आशा पाल रखी है। उन्होंने अपने चुनावी अभियान को 'मिशन 44' का नाम दिया है।
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