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पेट्रोल पंपों से हिसाब मांग सकता है आयोग
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Mon, 24 Nov 2014 08:37 PM IST
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विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों की तरफ से चुनाव प्रचार में किसी तरह की कसर नहीं रखी जा रही है। दिन-रात चुनाव प्रचार के लिए पार्टियों के वाहन दौड़ रहे हैं और वाहनों में लगातार पेट्रोल और डीजल भरा जा रहा है, लेकिन इस्तेमाल किए जा रहे पेट्रोल, डीजल का कोई भी हिसाब नहीं रखा जा रहा है। इसी को लेकर चुनाव आयोग सख्ती करने की तैयारी कर रहा है। जल्द चुनाव आयोग पेट्रोल पंपों के मालिकों से भरे जा रहे डीजल, पेट्रोल का हिसाब मांग सकता है।
25 अक्तूबर को चुनाव का ऐलान होने के बाद से ही राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव प्रचार में तेजी ला दी थी। वर्तमान समय में हर रोज सैकड़ों वाहन चुनाव प्रचार करते हुए नजर आ रहे हैं। हर रोज पार्टियां हजारों रुपयों का तेल भरवाने में खर्च कर रही है। इस राशि को चुनाव प्रचार में खर्च की जाने वाली राशि में शामिल करने के लिए पेट्रोल पंपों से पार्टियों के कार्यकर्ता बिल नहीं ले रहे हैं।
इतना ही नहीं, पार्टियों की तरफ से लगातार कार्यकर्ताओं के छोटे और बड़े वाहनों में नि:शुल्क पेट्रोल दिया जा रहा है। जब भी कहीं चुनावी रैलियों का आयोजन हो रहा है तो कार्यकर्ताओं को रैली निकालने के लिए नि:शुल्क तेल भरवा कर दिया जा रहा है। इसी को लेकर अब चुनाव आयोग ने सख्ती करने का मन बना लिया है।
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चुनाव आयोग पेट्रोल पंपों के मालिकों को राजनीतिक पार्टियों के वाहनों में भरे जाने वाले डीजल और पेट्रोल का हिसाब रखने के निर्देश दे सकता है। फिर इस राशि को पार्टियों के चुनाव के खर्च में शामिल किया जा सकता है। इसके लिए चुनाव आयोग जल्द ही पेट्रोल पंपों के मालिकों से भी संपर्क कर सकता है।
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25 अक्तूबर को चुनाव का ऐलान होने के बाद से ही राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव प्रचार में तेजी ला दी थी। वर्तमान समय में हर रोज सैकड़ों वाहन चुनाव प्रचार करते हुए नजर आ रहे हैं। हर रोज पार्टियां हजारों रुपयों का तेल भरवाने में खर्च कर रही है। इस राशि को चुनाव प्रचार में खर्च की जाने वाली राशि में शामिल करने के लिए पेट्रोल पंपों से पार्टियों के कार्यकर्ता बिल नहीं ले रहे हैं।
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इतना ही नहीं, पार्टियों की तरफ से लगातार कार्यकर्ताओं के छोटे और बड़े वाहनों में नि:शुल्क पेट्रोल दिया जा रहा है। जब भी कहीं चुनावी रैलियों का आयोजन हो रहा है तो कार्यकर्ताओं को रैली निकालने के लिए नि:शुल्क तेल भरवा कर दिया जा रहा है। इसी को लेकर अब चुनाव आयोग ने सख्ती करने का मन बना लिया है।
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चुनाव आयोग पेट्रोल पंपों के मालिकों को राजनीतिक पार्टियों के वाहनों में भरे जाने वाले डीजल और पेट्रोल का हिसाब रखने के निर्देश दे सकता है। फिर इस राशि को पार्टियों के चुनाव के खर्च में शामिल किया जा सकता है। इसके लिए चुनाव आयोग जल्द ही पेट्रोल पंपों के मालिकों से भी संपर्क कर सकता है।