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MSME For Bharat: औद्योगिक नीति पर संकट, जीएसटी घटने से प्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री को सता रही इंसेंटिव की चिंता

Tue, 16 Sep 2025 12:34 PM IST
निकिता गुप्ता गौरव रावत अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
गौरव रावत अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Tue, 16 Sep 2025 12:34 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर की फार्मा इंडस्ट्री जीएसटी दरों में कटौती के चलते इंसेंटिव कम होने से चिंतित है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ने और इकाइयों के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। उद्योगपति सरकार से स्पष्ट नीति और प्रोत्साहन योजना की मांग कर रहे हैं ताकि निवेश और रोजगार सुरक्षित रह सके।

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Due to reduction in GST, the state's pharma industry is worried about incentives
MSME - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

जम्मू-कश्मीर की फार्मा इंडस्ट्री इन दिनों असमंजस और संकट के दौर से गुजर रही है। प्रदेश की यह इंडस्ट्री निर्यात का सबसे बड़ा आधार है। इन दिनों जीएसटी की दरें घटने के बाद इंसेंटिव को लेकर चिंता में हैं। फैक्ट्रियों को डर है कि जिस प्रोत्साहन राशि का भरोसा सरकार ने औद्योगिक नीति 2021 में दिया था, प्रदेश में फिलहाल फार्मा सेक्टर की साठ से ज्यादा इकाइयां काम कर रही हैं।

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इनमें से ज्यादातर जम्मू संभाग के बाड़ी ब्राह्मणा और कठुआ औद्योगिक क्षेत्रों में हैं। प्रदेश सरकार ने 2021 में नई औद्योगिक नीति लागू की थी। इसके तहत निवेशकों को कई रियायतें देने का वादा किया गया था। सबसे बड़ा आकर्षण दस साल तक नेट एसजीएसटी की पूरी वापसी और मशीनरी व अन्य निवेश पर 30 प्रतिशत पूंजी निवेश इंसेंटिव था। इसी भरोसे पर प्रदेश में तीस से ज्यादा नई फार्मा इकाइयां पिछले चार वर्षों में स्थापित हुईं।
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जीएसटी कटौती ने बिगाड़ा इंसेंटिव का खेल
बीते दिनों सरकार ने दवाइयों पर जीएसटी घटा दिया। आम दवाइयों पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दी गई है, जबकि कुछ जीवनरक्षक और गंभीर बीमारियों की दवाइयों पर जीएसटी पूरी तरह खत्म कर दिया गया। जीएसटी घटने से दवा निर्माताओं को मिलने वाला जीएसटी इंसेंटिव भी घट जाएगा।
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बाड़ी ब्राह्मणा के दवा निर्माता प्रदीप जैन का कहना है कि इंसेंटिव कम होने से उत्पादन की लागत बहुत बढ़ जाएगी। कई इकाइयों के बंद होने का खतरा है और रोजगार पर भी असर पड़ेगा। नई स्थापित हुईं इकाइयों को बहुत फर्क पड़ेगा। इसी तरह गंग्याल के अंकित गुप्ता का कहना है कि इंसेंटिव घट गया तो हम बाकी राज्यों की कंपनियों से मुकाबला नहीं कर पाएंगे। उन्होंने मांग की कि सरकार इस ओर ध्यान दे, ताकि दवा निर्माताओं को इसका खामियाजा न उठाना पड़े।

सबसे ज्यादा निर्यात फार्मा सेक्टर से होता 
जम्मू-कश्मीर से होने वाले कुल निर्यात में फार्मा सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है, यह सेक्टर प्रदेश के कुल निर्यात का लगभग 45 प्रतिशत संभालता है। दवाइयां और संबंधित उत्पाद यहां से देश और विदेश तक भेजे जाते हैं।

फार्मा इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार साफ-साफ बताए कि जीएसटी दरें घटने के बाद उन्हें इंसेंटिव किस रूप में मिलेगा। उद्योगपतियों का कहना है कि नीति में जो प्रावधान लिखे गए थे, उन पर अमल जरूरी है, वरना प्रदेश की सबसे बड़ी निर्यातक इंडस्ट्री का भविष्य अंधेरे में पड़ सकता है। 

बीते वर्षों में फार्मा सेक्टर से निर्यात और हिस्सेदारी 

वित्त वर्ष कुल निर्यात(अमेरिकी डॉलर में) प्रदेश के निर्यात में हिस्सेदारी (% में)
2024-25 31.92 45.80
2023-24 59.75 30.98
2022-23 56.39 26.50
2022-23 64.70 26.50

स्रोत - भारत सरकार का निर्यात पोर्टल 
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