बजट में दिखी तबाही से उबरने की झलक
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रियासत में पिछले दिनों आई बाढ़ की तबाही से बने घाव पर मरहम लगाने की झलक मुफ्ती सरकार के पहले बजट में दिखी। बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास को सबसे बड़ी चुनौती मानते सरकार ने इनके लिए कई छूट की घोषणा की है, ताकि उनकी देनदारी कम की जा सके और बर्बाद उद्योग, व्यापार, पर्यटन उद्योग को दोबारा पटरी पर लाया जा सके।
सरकार की ओर से उद्योग तथा व्यापार जगत को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से सितंबर से मार्च 2015 तक सात महीने तक का बिजली किराया माफ करने की घोषणा की गई। ट्रांसपोर्ट क्षेत्र को राहत देते हुए बाढ़ के चलते प्रभावित वाहनों को सितंबर से दिसंबर 2014 तक पैसेंजर टैक्स जमा करने से छूट दे दी गई है।
बाढ़ के बाद बर्बाद ढांचों को दोबारा खड़ा करने के लिए स्टांप ड्यूटी में दी गई छूट की सीमा को अक्टूबर 2015 से बढ़ाकर 31 मार्च 2016 कर दिया गया है। सितंबर में आई बाढ़ से पर्यटन उद्योग को भी भारी नुकसान पहुंचा था।
पर्यटन उद्यमियों को राहत देते हुए सरकार ने बाढ़ से प्रभावित हुए होटल उद्योग को मार्च 2016 तक जीएसटी से छूट और होटलों, लाज एवं गेस्ट हाउस के लिए विदेशों से मंगवाए जाने वाले सामान पर एंट्री टैक्स जून तक माफ करने की घोषणा की है।
विश्व बैंक से मिलेंगे 2500 लाख डालर
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि बाढ़ के बाद दोबारा से चीजों को पटरी पर लाने के लिए कई उपाय करने होंगे। इसके तहत आधारभूत संरचनाओं की स्थापना के साथ-साथ आम लोगों की जिंदगी को पटरी पर लाने के प्रयास करने होंगे। वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों तथा आम नागरिकों को उनकी देनदारियों, बैंक लोन के भुगतान तथा सरकारी टैक्स से छूट देनी होगी।
इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए अलग राहत एवं पुनर्वास मंत्रालय का गठन किया है। यह विभाग राहत एवं पुनर्वास से जुड़ी सभी गतिविधियों का समन्वय करेगी। इसके साथ ही विश्व बैंक 2500 लाख डालर देने को तैयार है। प्रोजेक्ट मानीटरिंग यूनिट का गठन किया गया है जो विश्व बैंक की सहायता से चलने वाले प्रोजेक्ट की निगरानी करेगा।
पीडब्ल्यूडी (आरएंडबी), सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण तथा श्रीनगर नगर निगम में तीन प्रोजेक्ट शुरू भी कर दिए गए हैं। सरकार ने आम लोगों की जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए आर्थिक गतिविधियों को दोबारा सुचारु करने पर बल दिया है। इसके तहत व्यापार तथा उत्पादन दोनों क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने पर जोर है। यह इस उद्देश्य को ध्यान में रखकर किया गया कि यदि दुकान चल गई तो मकान तो बन ही जाएंगे।
गिर गई रियासत की कमाई
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि बाढ़ के चलते राज्य की आय भी प्रभावित हुई है। रियासत की आय 1.5 प्रतिशत की दर से गिरकर 88000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
प्रति व्यक्ति आमदनी भी 59279 से गिरकर 58888 तक पहुंच गया। इससे राजस्व में भी 4100 करोड़ घटा है। वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू ने बजट भाषण में कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के लिए 43960 करोड़ रुपये का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था।
उन्होंने कहा कि वे न तो पूर्ववर्ती सरकार के नुकसान के आकलन से सहमत हैं और न ही इसके तरीके से। इसलिए दोबारा से नई चीजों को समाहित करते हुए पुनर्वास कार्यक्रम बनाने की जरूरत है।