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J&K: पीओके विस्थापितों के वन टाइम सेंटलमेंट पर विवाद बढ़ा

Fri, 24 Mar 2017 07:59 PM IST
बृ़जेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू
बृ़जेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू Updated Fri, 24 Mar 2017 07:59 PM IST
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disputes emerged for the displaced of POK
पीओके विस्थापितों के वन टाइम सेंटलमेंट पर विवाद - फोटो : फाइल फोटो

पीओके विस्थापितों के वन टाइम सेंटलमेंट पर विवाद बढ़ गया है। तमाम बंदिशों की वजह से विस्थापित केंद्र सरकार की इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। केंद्र सरकार ने 1947 के पीओके तथा 1965 व 1971 के छंब के 36384 विस्थापितों के लिए 2000 करोड़ पैकेज की घोषणा की है। इसमें प्रत्येक को साढ़े पांच लाख रुपये मिलेंगे।

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हालात यह है कि अब तक मात्र 3135 लोगों ने ही इसके लिए आवेदन किया है। विस्थापितों के नुमाइंदों की ओर से आए दिन प्रदर्शन हो रहे हैं। साथ ही नियमों को सरल करने के लिए अधिकारियों की मिन्नतें भी की जा रही हैं। 
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केंद्र सरकार की ओर से पहली किस्त के रूप में 500 करोड़ रुपये जारी कर दिया गया है। डिविजनल कमिश्नर कार्यालय की ओर से मार्च तक नौ हजार लोगों को पैकेज के तहत लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। यह राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में जमा की जाएगी। बताते हैं कि विस्थापितों से मांगे गए आवेदन पत्र के साथ कई प्रकार की बंदिशें लगाई गई हैं।

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आधार कार्ड न होने से भी हो रही है समस्या

disputes emerged for the displaced of POK
आधार कार्ड न होने से भी हो रही है समस्या - फोटो : FILE PHOTO

सबसे बड़ी बाधा स्टेट सब्जेक्ट (राज्य के नागरिक होने का प्रमाणपत्र) को लेकर है। ज्यादातर लोगों के पास स्टेट सब्जेक्ट नहीं है। इसके साथ ही वारिसाना हक को लेकर भी परिवार में विवाद है। कई परिवार इस वजह से आवेदन नहीं कर पा रहे हैं कि उनके बीच वारिस को लेकर फैसला नहीं हो पाया है। आधार कार्ड न होने का भी रोना है। कई परिवारों के पास आधार कार्ड तक नहीं हैं जिसके चलते वे फार्म जमा नहीं कर पा रहे हैं। 

नेकां, कांग्रेस, पैंथर्स पार्टी के साथ ही विस्थापितों की संस्थाएं लगातार सरकार की ओर से वन टाइम सेटलमेंट के लिए बनाए गए नियमों को लेकर आपत्ति जता चुके हैं। 1947 के विस्थापितों के लिए काम करने वाली संस्था एसओएस इंटरनेशनल के चेयरमैन राजीव चुन्नी का कहना है कि शोर ज्यादा है पर काम कुछ भी नहीं हो रहा है। यह 70 साल से पुराना मामला है।

मीरपुर, मुजफ्फराबाद और पुंछ के लोग पाकिस्तान की ओर से कब्जा कर लिए जाने के बाद पुंछ से लेकर कठुआ और आरएस पुरा से लेकर लेह-कारगिल तक बसे हुए हैं। सभी जगह का प्रशासन फार्म जमा करने के लिए अलग-अलग नियम बता रहा है। उनका कहना है कि पहले 25 लाख रुपये, बच्चों को प्रोफेशनल तथा टेक्निकल इंस्टीट्यूट में दाखिले में आरक्षण और बेरोजगारों के लिए रोजगार पैकेज की बात कही  गई थी, लेकिन यह सब कुछ भी नहीं हुआ। 

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