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अब तक पूरा नहीं हो सका 15 वर्ष पहले शुरू हुए पुल का निर्माण कार्य
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अंजी तवी पर बनाए गए पुल के सिरे पर ग्रामीणों ने स्वयं भरी मिटटी।
- फोटो : REASI
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रियासी। मिनी सचिवालय से लगभग पांच किलोमीटर दूर पंचायत कयाला सुकेतर के ग्रामीण अंजी तवी पर बनाए जा रहे पुल का इंतजार 15 वर्षों से कर रहे हैं। लेकिन, इस पुल का निर्माण कार्य खत्म होने का नाम ही नहीं लेता।
15 वर्ष पहले कयाला के वार्ड 4 व अन्य क्षेत्र को जोड़ने के लिए अंजी तवी पर पुल बनाने का काम शुरू किया था। पुल को बनाने का काम जेकेपीसी को दिया गया। लगभग नौ वर्ष पहले पुल को बनाकर तैयार तो कर दिया गया, लेकिन वन विभाग की तरफ से अनापत्ति पत्र देने में की गई देेरी के कारण पुल तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं मिला। ग्रामीणों को पुल होने के बाद भी तवी के बीच से ही गुजरना पड़ता था। बाद में पुल के दोनों सिरों पर ग्रामीण ने स्वयं मिट्टी व पत्थर का मलबा डाला। लेकिन, मौजूदा समय में बारिश होने के कारण काफी मलबा बह चुका है।
ग्रामीण मोहम्मद रफीक बताते हैं कि पुल के सिरों को जमीन से जोड़ने के लिए ग्रामीणों ने स्वयं इसका काम किया। पुल बनने का फायदा कयाला के लोगों को ही नहीं, बल्कि भागा, कोटली व दलमाड़ी के ग्रामीणों को भी होगा, जो यहां से पैदल दूध, आदि बेचने रियासी जाते हैं।
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मोहम्मद शरीफ ने कहा कि जेकेपीसीसी को चाहिए कि वह पुल के दोनों तरफ पक्की स्लैब डालने का काम पूरा करे। ताकि, ग्रामीणों को इसका फायदा मिल सके। अंजी पार एक सरकारी स्कूल भी है, जहां स्थानीय बच्चे पढ़ाई करते हैं। वहां पढ़ाई कराने वाले अध्यापक रियासी व अन्य क्षेत्रों से आते हैं। पुल के पूरी तरह बनने के बाद उनको भी आवाजाही में परेशानी नहीं होगी।
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पुल बनाने का काम जिस ठेकेदार को दिया गया था, उसको लगभग 13 लाख का भुगतान किया जाना है। फंड उपलब्ध न होने के कारण काम को कुछ दिनों के लिए रोका गया है। साथ ही फंड जारी करने के लिए लिखा गया है। उम्मीद है कि इस महीने फंड जारी होते ही पुल के दोनों तरफ स्लैब डालने का काम पूरा कर दिया जाएगा।
- जफर, जेईई जेकेपीसीसी व साइट इंचार्ज
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15 वर्ष पहले कयाला के वार्ड 4 व अन्य क्षेत्र को जोड़ने के लिए अंजी तवी पर पुल बनाने का काम शुरू किया था। पुल को बनाने का काम जेकेपीसी को दिया गया। लगभग नौ वर्ष पहले पुल को बनाकर तैयार तो कर दिया गया, लेकिन वन विभाग की तरफ से अनापत्ति पत्र देने में की गई देेरी के कारण पुल तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं मिला। ग्रामीणों को पुल होने के बाद भी तवी के बीच से ही गुजरना पड़ता था। बाद में पुल के दोनों सिरों पर ग्रामीण ने स्वयं मिट्टी व पत्थर का मलबा डाला। लेकिन, मौजूदा समय में बारिश होने के कारण काफी मलबा बह चुका है।
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ग्रामीण मोहम्मद रफीक बताते हैं कि पुल के सिरों को जमीन से जोड़ने के लिए ग्रामीणों ने स्वयं इसका काम किया। पुल बनने का फायदा कयाला के लोगों को ही नहीं, बल्कि भागा, कोटली व दलमाड़ी के ग्रामीणों को भी होगा, जो यहां से पैदल दूध, आदि बेचने रियासी जाते हैं।
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मोहम्मद शरीफ ने कहा कि जेकेपीसीसी को चाहिए कि वह पुल के दोनों तरफ पक्की स्लैब डालने का काम पूरा करे। ताकि, ग्रामीणों को इसका फायदा मिल सके। अंजी पार एक सरकारी स्कूल भी है, जहां स्थानीय बच्चे पढ़ाई करते हैं। वहां पढ़ाई कराने वाले अध्यापक रियासी व अन्य क्षेत्रों से आते हैं। पुल के पूरी तरह बनने के बाद उनको भी आवाजाही में परेशानी नहीं होगी।
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पुल बनाने का काम जिस ठेकेदार को दिया गया था, उसको लगभग 13 लाख का भुगतान किया जाना है। फंड उपलब्ध न होने के कारण काम को कुछ दिनों के लिए रोका गया है। साथ ही फंड जारी करने के लिए लिखा गया है। उम्मीद है कि इस महीने फंड जारी होते ही पुल के दोनों तरफ स्लैब डालने का काम पूरा कर दिया जाएगा।
- जफर, जेईई जेकेपीसीसी व साइट इंचार्ज

अंजी कयाला के स्थानीय निवासी मोहम्मद रफीक।- फोटो : REASI

अंजी कयाला के स्थानीय निवासी मोहम्मद शरीफ।- फोटो : REASI