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सोशल साइटों से ज्यादा प्यार डिप्रेशन को दावत दे रहा है। इन साइटों से घंटों चिपके रहना नकारात्मक सोच के साथ व्यक्तिगत विकास को प्रभावित कर रहा है।
इसकी चपेट में किशोर और युवा तेजी से आ रहे हैं। बेचैनी बढ़ने के साथ मानसिक विकास पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है। मनोचिकित्सकों के पास अभिभावक अपने लाडलों की ऐसी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं।
आज तेजी से खासकर किशोरों में सोशल साइटों के जरिये पूरी दुनिया से जुड़ने की होड़ लगी है।
12-14 घंटे तक लोग कर रहे थे फेसबुक
मनोरंजन और महत्वपूर्ण जानकारियां पाने के लिए यह माध्यम बेहतर है लेकिन एक दिन में आधे से भी ज्यादा समय इन साइटों से जुड़े रहने के कारण यह डिप्रेशन की ओर धकेल रहा है।
साइक्रेटरी अस्पताल में कार्यरत मनोचिकित्सक डा. मनु अरोड़ा के अनुसार जम्मू में अब खासकर फेसबुक एडिक्शन के मामले सामने आ रहे हैं।
ताजा मामलों में पीड़ित 12-14 घंटे फेसबुक के साथ चिपके रहे हैं। इससे किशोरों की दिनचर्या, अध्ययन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
कमेंट और लाइक के लिए बच्चों की उड़ी नींद
अब उन्हें जरूरी चीजों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय यही सोच रहती है कि उन्हें कमेंट पर किसने लाइक किया। इस चलन ने किशोरों से नींद भी दूर कर दी है।
लैपटाप, कंप्यूटर और एक बड़े वर्ग के मोबाइल से लंबे समय तक जुड़े रहने के कारण डिप्रेशन हावी हुआ है। सोशल साइट से जुड़े युवा राहुल का कहना है कि इन साइटों के माध्यम से ही दुनिया से जुड़ा जा सकता है।
लेकिन इसमें ध्यान रहे कि इन्हें अपनी जरूरत के मुताबिक ही उपयोग करें। शहर में साइबर कैफे चला रहे रवि गुप्ता ने कहा कि कैफे पर फेसबुक जैसी सोशल साइट के इस्तेमाल के लिए अभी भी युवा पहुंचते हैं।
लक्षण
पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित न होना
इंटरनेट प्रयोग पर रोक लगाने पर तनाव में आना
अनिद्रा की समस्या बढ़ना
बचाव
सोशल साइटों को निर्धारित समय में ही प्रयोग करें
मनोरंजन और जानकारियों के लिए ही उपयोग करें
पढ़ाई के समय साइटों का प्रयोग न करें
अभिभावक बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान दें