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नमक, चीनी और तेल में कटौती बचा सकती है इन गंभीर जानलेवा बीमारियों से, बढ़ा सकती है जीने का समय
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Sat, 01 Dec 2018 03:38 AM IST
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heart attack
- फोटो : Demo Pic
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भारत में यदि नमक का सेवन घटाकर डब्ल्यूएचओ की सिफारिश के मुताबिक प्रतिदिन 5 ग्राम की सीमा पर ला दिया जाए तो हर साल दिल का दौरा पड़ने से लाखों लोगों को मरने से बचाया जा सकता है। इसके अलावा, नमक के साथ ही चीनी और तेल का सेवन दैनिक आहार में घटाने से किडनी में खराबी, मधुमेह, सोरोसिस और आघात के मामले भी काफी घटाए जा सकते हैं। यह कहना है डाक्टरों और एफएसएसएआई के लोगों का। आहार से तेल, चीनी और नमक को कम करना एफएसएसएआई की स्वस्थ भारत यात्रा के प्रमुख संदेशों में से एक है जो देश का दौरा कर रहा है।
डाइटीशियन, दीप्ति रावत का कहना है कि, “भारतीय प्रतिदिन 10.98 ग्राम नमक खाते हैं जोकि डब्ल्यूएचओ द्वारा की गई 5 ग्राम सीमा की सिफारिश से दोगुने से अधिक है। यह दिलचस्प है कि स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है, भारत हर साल करीब 28 लाख मौतों के साथ विश्व की ह्रदय की बीमारी की राजधानी के रूप में उभरा है। प्रतिदिन के भोजन में नमक का उपभोग कम करके ह्रदय की समस्याएं आसानी से घटाई जा सकती हैं।“
एक अन्य महामारी जो हमें घूर रही है वह है हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप। गांवों में रह रहे प्रत्येक चार भारतीयों में से एक और शहरी क्षेत्र में रह रहे प्रत्येक तीन में से एक हाइपरटेंशन से ग्रस्त है। नमक का सेवन घटाकर इस समस्या से बड़ी आसानी से निजात पाई जा सकती है क्योंकि जरूरत से अधिक सोडियम धमनियों को संकुचित कर देता है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है।
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अधिक मात्रा में नमक का सेवन कई बीमारियों से जुड़ा है। जैसे कि किडनी खराब होना और खून की नसों पर अधिक दबाव इत्यादि।
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डाइटीशियन, दीप्ति रावत का कहना है कि, “भारतीय प्रतिदिन 10.98 ग्राम नमक खाते हैं जोकि डब्ल्यूएचओ द्वारा की गई 5 ग्राम सीमा की सिफारिश से दोगुने से अधिक है। यह दिलचस्प है कि स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है, भारत हर साल करीब 28 लाख मौतों के साथ विश्व की ह्रदय की बीमारी की राजधानी के रूप में उभरा है। प्रतिदिन के भोजन में नमक का उपभोग कम करके ह्रदय की समस्याएं आसानी से घटाई जा सकती हैं।“
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एक अन्य महामारी जो हमें घूर रही है वह है हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप। गांवों में रह रहे प्रत्येक चार भारतीयों में से एक और शहरी क्षेत्र में रह रहे प्रत्येक तीन में से एक हाइपरटेंशन से ग्रस्त है। नमक का सेवन घटाकर इस समस्या से बड़ी आसानी से निजात पाई जा सकती है क्योंकि जरूरत से अधिक सोडियम धमनियों को संकुचित कर देता है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है।
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अधिक मात्रा में नमक का सेवन कई बीमारियों से जुड़ा है। जैसे कि किडनी खराब होना और खून की नसों पर अधिक दबाव इत्यादि।
भारत दुनिया की मधुमेह की राजधानी के तौर पर जाना जाता है। देश में मधुमेह के मामलों की संख्या वर्ष 2017 में 7.2 करोड़ रही जो दुनिया के मधुमेह के रोगियों का करीब आधा है। हाल ही में एफएसएसएआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मधुमेह के मामलों की संख्या 2025 तक दोगुना होने की आशंका है।
केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के डॉ. डी हिमांशु का कहना है कि, “जब बात चीनी के उपभोग की हो तो भारतीयों को कोई भी मात नहीं दे सकता। हम चीनी का उपभोग करने के मामले में दुनिया में पहले पायदान पर हैं और उत्पादन के मामले में दूसरे पायदान पर। इस देश में खाने की कई आदतें हैं जैसे भोजन के बाद मीठा लेना। ये आदतें चीनी के अधिक उपभोग के लिए जिम्मेदार हैं। जिस तेजी से मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज बढ़ रही है, वह चिंताजनक है।“
भारतीय बहुत अधिक तेल और चिकनी चीजों का भी सेवन कर रहे हैं जिससे मोटापा और स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याएं पैदा हो रही हैं। मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या के लिहाज से भारत दुनिया में तीसरे पायदान पर हैं और 1.7 करोड़ मोटे बच्चों के साथ वर्ष 2025 तक इसके दूसरे पायदान पर पहुंचने की आशंका है।
आहार विशेषज्ञ और एफएसएसएआई नमक, चीनी और तेल का उपयोग घटाने की पुरजोर ढंग से वकालत करते हैं ताकि न केवल मौतों की संख्या घटे, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य में सुधार भी आ सके। उनका यह भी सुझाव है कि सोडियम के प्रभाव को काटने वाले पोटैशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ ग्रहण करने से ब्लड प्रेशर घटाने में मदद मिलती है। सोडियम का प्रभाव संतुलित करने के लिए आलू, टमाटर, नारंगी, सफेद बीन्स और गैर वसा वाले योगर्ट जैसी खाद्य वस्तुओं का सेवन किया जाना चाहिए।
केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के डॉ. डी हिमांशु का कहना है कि, “जब बात चीनी के उपभोग की हो तो भारतीयों को कोई भी मात नहीं दे सकता। हम चीनी का उपभोग करने के मामले में दुनिया में पहले पायदान पर हैं और उत्पादन के मामले में दूसरे पायदान पर। इस देश में खाने की कई आदतें हैं जैसे भोजन के बाद मीठा लेना। ये आदतें चीनी के अधिक उपभोग के लिए जिम्मेदार हैं। जिस तेजी से मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज बढ़ रही है, वह चिंताजनक है।“
भारतीय बहुत अधिक तेल और चिकनी चीजों का भी सेवन कर रहे हैं जिससे मोटापा और स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याएं पैदा हो रही हैं। मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या के लिहाज से भारत दुनिया में तीसरे पायदान पर हैं और 1.7 करोड़ मोटे बच्चों के साथ वर्ष 2025 तक इसके दूसरे पायदान पर पहुंचने की आशंका है।
आहार विशेषज्ञ और एफएसएसएआई नमक, चीनी और तेल का उपयोग घटाने की पुरजोर ढंग से वकालत करते हैं ताकि न केवल मौतों की संख्या घटे, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य में सुधार भी आ सके। उनका यह भी सुझाव है कि सोडियम के प्रभाव को काटने वाले पोटैशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ ग्रहण करने से ब्लड प्रेशर घटाने में मदद मिलती है। सोडियम का प्रभाव संतुलित करने के लिए आलू, टमाटर, नारंगी, सफेद बीन्स और गैर वसा वाले योगर्ट जैसी खाद्य वस्तुओं का सेवन किया जाना चाहिए।