राजधानी शिफ्ट करने में हर बार खर्च होते हैं दो अरब से ज्यादा
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जम्मू-कश्मीर में 143 साल पुरानी दरबार मूव की परंपरा के तहत शुक्रवार को शीतकालीन राजधानी जम्मू में सचिवालय बंद हो गया। दरबार मूव से जुड़े शेष कार्यालय शनिवार को बंद हो जाएंगे।
भौगोलिक परिस्थितियों के चलते रियासत में 1872 में डोगरा शासनकाल में शुरू की गई दरबार मूव की परंपरा में सियासी नफा-नुकसान में बंधकर राजकीय कोष को एक बार फिर 200 करोड़ से ज्यादा का खर्च उठाना पड़ेगा।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार करीब 8000 दरबार मूव कर्मचारियों को टीए भत्ते के तौर पर ही प्रत्येक कर्मचारी को दस हजार रुपये तो दिए ही जाएंगे।
इसके अलावा इतने कर्मचारियों के लिए श्रीनगर में रहने के लिए क्वार्टरों और होटलों में व्यवस्था करने पर भी करोड़ों की राशि खर्च हो जाएगी।
परमानेंट हो सकते थे 61 हजार कर्मचारी
सचिवालय, राजभवन, हाई कोर्ट, पुलिस मुख्यालय, आयोगों के दफ्तर और दरबार मूव से जुड़े अन्य कार्यालयों के सामान और रिकार्ड के अलावा कर्मचारियों और अधिकारियों को श्रीनगर पहुंचाने के लिए परिवहन का खर्च भी 18 से बीस करोड़ रुपये हो जाएगा।
1872 में डोगरा महाराजा गुलाब सिंह ने दरबार मूव की परंपरा रियासत की भौगोलिक स्थिति खासतौर से परिवहन के सीमित साधन होने की वजह से शुरू की थी।
तब बैल गाड़ी और घोड़ा गाड़ी से ही यात्रा होती थी, जो कि अब मोटर गाड़ी, ट्रेन और हवाई जहाज से बेहद आसान हो चुकी है, लेकिन सियासी फैसला लेने में सरकारों की इच्छा शक्ति की कमी से इस परंपरा को ढोया जा रहा है।
रियासत में दरबार मूव परंपरा पर 200 करोड़ से भी ज्यादा की राशि का खर्च अगर नए सिस्टम को लागू कर रुके तो विभिन्न विभागों में सालों से अस्थायी कर्मचारी के तौर पर काम कर रहे करीब 61 हजार कर्मचारियों को नियमित किया जा सकता है।
नेता बोले, जारी रहनी चाहिए परंपरा
दरबार मूव की परंपरा पर भारी-भरकम राशि तो खर्च होती है। रियासत में सभी राजनीतिक, सामाजिक और अन्य संगठनों को आपसी विश्वास में लेकर किसी नई प्रणाली को शुरू जब तक नहीं किया जाता, तब तक दरबार मूव की परंपरा जारी रहनी चाहिए। नई प्रणाली शुरू हो तो बेहतर होगा।
रविंद्र शर्मा, मुख्य प्रवक्ता कांग्रेस
दरबार मूव पर ही सालाना करीब 300 करोड़ की राशि खर्च कर दी जाती है। पैंथर्स पार्टी का मानना है कि सरकारों में सियासी इच्छाशक्ति की कमी से भारी भरकम राशि के दुरुपयोग को नहीं रोका जा रहा है। जम्मू में भी सचिवालय समेत अन्य ढांचा मौजूद है और श्रीनगर में भी। दोनों जगह 12 महीने सचिवालय काम करने चाहिए। इससे तीन सौ करोड़ की बर्बादी तो रुकेगी ही, करीब हजारों डेलीवेजरों को नियमित किया जा सकता है। नई भर्ती नीति जैसी युवा विरोधी नीतियों की जरूरत नहीं पड़ेगी।
बलवंत सिंह मनकोटिया, अध्यक्ष नेशनल पैंथर्स पार्टी
दरबार मूव जैसी परंपरा से राजकोष पर बोझ पड़ता है। पार्टी स्तर पर ऊपर उठकर सभी सियासी दलों को एक मंच पर आकर निर्णय लेने की जरूरत है। निजी राय है कि दरबार मूव से पैसे और समय दोनों की बर्बादी को रोका जाना चाहिए।
चौधरी जुल्फिकार अली, उपभोक्ता एवं जन वितरण मंत्री, जम्मू कश्मीर