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साल भर में दुगने हो हुए दहेज के मामले

Mon, 15 Dec 2014 01:28 AM IST
Updated Mon, 15 Dec 2014 01:28 AM IST
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Dowry-related case were twice in a year

जागरूकता अभियान के बावजूद महिलाओं से मारपीट और उन्हें घर से निकालने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। दहेज के लिए अब भी महिलाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्हें जान से मारने तक की कोशिशें भी हो रही हैं।

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महिला पुलिस सेल के आंकड़े पर गौर करें, तो पता चलता है कि जिस दहेज उत्पीड़न को खत्म करने के लिए तमाम तरह के प्रयास किए जा रहे हैं, उनका अभी पूरी तरह से समाज पर असर नहीं हुआ है। सालभर में दहेज उत्पीड़न के मामलों का दुगना होना इस बात का संकेत है कि स्थिति अभी पूरी तरह बदली नहीं है।
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जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 में जम्मू महिला पुलिस सेल में दहेज उत्पीड़न के 53 मामले सामने आए। वहीं इस वर्ष अब तक 113 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से अधिकतर मामले ऐसे हैं, जिनमें नवविवाहिताएं शामिल हैं।
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तमाम प्रयास असफल

Dowry-related case were twice in a year

यह मामले सिर्फ महिला पुलिस सेल के हैं। जम्मू जिले के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में भी दहेज उत्पीड़न के मामले सामने आए हैं। जिले में पुलिस स्टेशनों में करीब 50 मामले और भी शामिल हैं। राज्य महिला आयोग के पास भी इस वर्ष करीब 50 मामले दहेज उत्पीड़न के आए हैं। इनमें महिलाओं के साथ मारपीट, घर से निकालने और जान से मारने की कोशिश से संबंधित हैं।

लोगों को जागरूक करने के लिए कई गैर सरकारी संस्थाओं, पुलिस एवं अन्य संबंधित विभागों द्वारा सेमीनार और जागरूकता कार्यक्रम किए जाते हैं। हालांकि इनका कोई लाभ होता नजर नहीं आ रहा। साल भर में दहेज उत्पीड़न के मामले दुगने होने से साफ है कि समाज में दहेज नाम का जहर अभी समाज में है।  

दहेज देने की होड़

रसूख वालों में बेटियों को अधिक से अधिक दहेज देने की भी होड़ रहती है। इसका सीधा असर गरीब तबके पर पड़ रहा है। बेटियों को रुखसत करने वाले अभिभावकों पर दहेज की मार पड़ रही है।

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