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Jammu News: जम्मू के व्यापारी को किया डिजिटल अरेस्ट 4.4 करोड़ रुपये ठगे, तीन आरोपी गिरफ्तार

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crime news
- जम्मू में डिजिटल अरेस्ट कर आनलाइन ठगी का अब तक का सबसे बड़ा मामला
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- साइबर पुलिस जम्मू ने गुजरात के सूरत से तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार
- कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर ठगे पैसे, मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का झूठा आरोप लगाए
- आरोपियों से जुड़े विभिन्न बैंक खातों में 55,88,256 रुपये फ्रीज किए गए
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू में एक व्यापारी को डिजिटल अरेस्ट कर अब तक की सबसे बड़ी ऑनलाइन ठगी की गई है। इसमें साइबर अपराधियों ने कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर व्यापारी को कई बैंक खातों में कई बार लेनदेन के जरिए 4,44,20,000 रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। इस ऑनलाइन धोखाधड़ी का पर्दाफाश कर साइबर पुलिस जम्मू ने गुजरात से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें जम्मू लाया है जिनसे पूछताछ की जा रही है।
एसएसपी जम्मू जोगिंदर सिंह ने मंगलवार को इस मामले पर एक प्रेसवार्ता की। उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी का यह मामला दो अक्तूबर को सामने आया। साइबर पुलिस स्टेशन जम्मू में एक लिखित शिकायत मिली। पीड़ित ने आरोप लगाया कि साइबर अपराधियों ने कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर उसे डिजिटल अरेस्ट किया और बड़ी मात्रा में पैसा ठगा है। एसएसपी ने बताया कि साइबर ठगों ने व्यापारी का आधार और सिम कार्ड का इस्तेमाल कर उसे मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया। इसके बाद पीड़ित को डिजिटल रूप से गिरफ्तार किया। इसमें एक वर्चुअल कोड था जिसमें ठग कानून प्रवर्तन अधिकारी से लेकर न्यायाधीश तक बने थे। पीड़ित की तीन बार पेशी हुई है। इस दौरान उसे घर से बाहर जाने और किसी से कोई भी बात बताने से सख्ती से मना किया था। डर के कारण पीड़ित व्यापारी साइबर ठगों की हर बात मनाता गया।
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बारी-बारी कई बैंक खातों
से ठगे करोड़ों रुपये
एसएसपी ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट के दौरान ठगों ने धोखे से पीड़ित को कई बैंक खातों से 4,44,20,000 रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। एफआईआर के बाद एक विस्तृत जांच शुरू हुई। साइबर पुलिस स्टेशन जम्मू ने एक विशेष टीम बनाई। पहले धन के लेनदेन फिर बैंक लेनदेन, मोबाइल संचार की जांच की। धोखाधड़ी से जुड़े डिजिटल फुटप्रिंट का भी विश्लेषण किया। जांच से पता चला कि धोखाधड़ी में शामिल नेटवर्क मुख्य रूप से गुजरात से चल रहा है। खुफिया जानकारी के आधार पर एक विशेष जांच दल को सूरत भेजा। यहां एक सुव्यवस्थित अभियान में तीन आरोपी चौहान मनीष अरुणभाई, अंश विठानी और किशोरभाई करमशीभाई दियोरिया को गिरफ्तार किया। प्राथमिक चार्जशीट न्यायालय में पेश की।
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आरोपियों को जम्मू लाया कुछ और गिरफ्तारियां भी संभव
एसएसपी जम्मू ने बताया कि गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को पूछताछ के लिए जम्मू लाया गया है। उनके साथ सह-षड्यंत्रकारियों की पहचान करने, अतिरिक्त सबूतों को उजागर करने और अपराध से जुड़े अन्य वित्तीय संबंधों का पता लगाने के लिए लगातार पूछताछ की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी को बड़ी सफलता बताते हुए एसएसपी ने कहा कि साइबर पुलिस जम्मू ने अब तक आरोपियों से जुड़े विभिन्न बैंक खातों में 55,88,256 रुपये फ्रीज कर दिए हैं। धोखाधड़ी की गई राशि को शिकायतकर्ता को वापस करने के लिए सक्रिय प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें से छह लाख रुपये पहले ही पीड़ित के खाते में वापस जमा कर दिए गए हैं। सोमवार को गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ मामले में पहला आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया गया।
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सतर्क रहें, झांसे में न आएं, ऐसी किसी सजा का प्रावधान नहीं
इंचार्ज साइबर पुलिस स्टेशन जम्मू एसपी कामेश्वर सिंह ने बताया कि भारतीय कानून व्यवस्था में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई सजा नहीं है। ऐसे में अगर कोई आपको कानून प्रवर्तन अधिकारी या फिर कोई भी अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट करने की बात कहे तो उसके झांसे में न आएं। हमारी जागरूकता ही हमें इस तरह के साइबर अपराध से बचा सकती है। उन्होंने पहले भी डिजिटल अरेस्ट के मामले आए हैं।

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क्या है डिजिटल अरेस्ट
डिजिटल अरेस्ट एक साइबर स्कैम है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम में फोन करने वाले कभी पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स, आरबीआई और दिल्ली या मुंबई पुलिस अधिकारी बनकर आत्मविश्वास से बात करते हैं। वाट्सएप या स्काइप कॉल पर जब कनेक्ट करते हैं तो आपको फर्जी अधिकारी एकदम असली से लगते हैं। वे लोग पीड़ित को इमोशनली और मेंटली टॉर्चर करते हैं। यकीन दिलाते हैं कि उनके परिजन के साथ कुछ बुरा हो चका है या होने वाला है। सामने बैठा व्यक्ति पुलिस की वर्दी में होता है। ऐसे में ज्यादातर लोग डर जाते हैं और उनके जाल में फंसते चले जाते हैं। वे वीडियो काॅल या ऑडियो कॉल पर नकली पुलिस स्टेशन का सेटअप दिखाते हैं, झूठे सबूत पेश करते हैं और यह विश्वास दिलाते हैं कि पीड़ित किसी अवैध गतिविधि में शामिल है।

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23 से 24 दिन तक साइबर
ठगों ने पीड़ित को फंसाए रखा
साइबर पुलिस के अनुसार पीड़ित को एक अनजान नंबर से वीडियो कॉल आई थी। इस कॉल को उठाने के बाद से ब्लैकमेलिंग का सिलसिला शुरू हुआ जो 23 से 24 दिनों तक चला। कारोबारी की ऑनलाइन वीडियो कॉल से पेशी होती थी। उसके विभिन्न गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने की बात कही जाती थी। मनी लॉन्ड्रिंग सहित अन्य मामलों में उसके होने के झूठे सुबूत तक दिखाए जाते थे। इन दिनों में पीड़ित के कुछ घंटे तय होते जिसमें वह पूरी तरह डिजिटल अरेस्ट रहता था। इस अवधि के बाद वह अपने रोजमर्रा के काम करता रहता था। पीड़ित पर इतना ज्यादा दबाव बनाया गया कि वह किसी को यह सब नहीं बता पा रहा था। साइबर अपराधियों ने एक वर्चुअल कोट बनाया था यहां पीड़ित की पेशी होती थी। इन सभी मामलों से छुटकारा दिलाने के लिए ही उससे पैसे मांगे जाते थे।
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