फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   court warns police on slow investigation

आतंकवाद के मामले में ढुलमुल जांच पर जम्मू-कश्मीर पुलिस को लगी फटकार

Tue, 31 Jan 2017 12:04 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू Updated Tue, 31 Jan 2017 12:04 AM IST
विज्ञापन
court warns police on slow investigation
अदालत ने लगाई कड़ी फटकार - फोटो : Demo Pic.

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से जुड़े एक मामले में पुलिस की ढुलमुल जांच पर अदालत ने कड़ी फटकार लगाकर चालान ही लौटा दिया। अदालत ने जांच अधिकारी की काबिलियत और मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, आतंकवाद ग्रस्त राज्य में भी यदि मामले की निष्पक्ष जांच करने के बजाए पुलिस केवल अपने मन मुताबिक काम पर उतर आए तो समाज को क्या संदेश जाएगा।

विज्ञापन


चालान लौटाते हुए अदालत ने एसएसपी रामबन को नए सिरे से जांच करने के आदेश जारी किए। साथ ही पुलिस महानिदेशक को आदेश की प्रति भेजकर दोषी अधिकारियों से जवाब तलब करने का अनुरोध किया।
विज्ञापन


अदालत ने कहा, पुलिस महानिदेशक को मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी जांच की मानीटरिंग करवानी चाहिए। रामबन जिले के उखड़ाल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रेम सागर की अदालत में एसएचओ रामसू द्वारा चालान पेश किया गया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

अभियोजन ने फाइल को अच्छे से जांचने की ही जहमत नहीं उठाई: कोर्ट

court warns police on slow investigation
कोर्ट - फोटो : डेमो फोटो

अदालत ने पाया कि थाना प्रभारी आरोपी अब्दुल लतीफ के साथ पेश हुए हैं। दूसरा आरोपी सलमान खान फरार बताया गया है। कोर्ट ने पाया कि हिजबुल मुजाहिदीन के कथित ओवर ग्राउंड वर्कर संबंधी मामले में जांच अधिकारी ने आरोपी को अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (उलफा) की धारा 13, 17 और 21 के चार्ज से बाहर कर दिया है।

इसके लिए पुलिस ने महज इतनी ही वजह बताई है कि आरोपी ने पुलिस द्वारा जब्त किए गए वायरलेस सेट का इस्तेमाल नहीं किया है। केवल वायरलेस सेट पास होने भर से चार्ज नहीं लगाया जा सकता। अदालत ने कहा, सीडी फाइल को कई मर्तबा जमा करवाया जा चुका है लेकिन हर बार कोई न कोई खामी के साथ इसे फिर पेश कर दिया जाता है। इ

इससे साफ होता है कि अभियोजन पक्ष जांच की खामी को दूर करने में रुचि ही नहीं रखता। वरिष्ठ अफसरों को अंधेरे में रखकर अपने स्तर पर ही आरोपी को संगीन अपराध के चार्ज से बाहर कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा, अभियोजन की एक अन्य दलील है जिसमें कहा गया है कि जिन आतंकियों के लिए काम करने का आरोप है, वे मारे जा चुके हैं।

ऐसे में उल्फा के चार्ज नहीं बनाए जा सकते। अदालत ने कहा, असल में अभियोजन ने फाइल को अच्छे से जांचने की ही जहमत नहीं उठाई। गवाहों के बयानों से साफ होता है कि आरोपी का हिजबुल मुजाहिदीन के साथ सीधा संपर्क था। इस सब के बावजूद चार्ज हटाना हैरत में डालने वाला है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed