{"_id":"6abc29e9bcf85cca8e0d1a94","slug":"court-news-jammu-news-c-10-jmu1052-1026007-2026-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: कोर्ट ने पाई जांच में लापरवाही व खामी\nअपहरण और दुष्कर्म का आरोपी बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: कोर्ट ने पाई जांच में लापरवाही व खामी अपहरण और दुष्कर्म का आरोपी बरी
विज्ञापन
- राजोरी की महिला को जम्मू बस स्टैंड से अपहरण कर पंजाब ले जाने का था आरोप
- मामले से जुड़े नौ जांच अधिकारियों में से एक से भी अभियोजन ने नहीं की पूछताछ
जम्मू। जांच में खामियां पाते हुए जम्मू की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपहरण और दुष्कर्म के आरोपी को बरी कर दिया। उस पर राजोरी जिले की एक महिला को बस स्टैंड से अपहरण कर पंजाब ले जाने का आरोप था। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ठोस, भरोसेमंद और विश्वसनीय सबूत पेश करने में नाकाम रहा।
मामला बस स्टैंड पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा था। आरोपी पर आरपीसी की धाराओं 366, 376 और 343 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। अभियोजन का आरोप था कि महिला को पंजाब में कई महीनों तक रखा गया और बार-बार यौन शोषण किया गया। उसे जून, 2011 में कटड़ा से बरामद किया गया था।
कोर्ट ने शिकायत और गुमशुदगी की रिपोर्ट से जुड़ी तारीखों के मामले में पुलिस रिकॉर्ड में गड़बड़ियों की ओर इशारा किया। हैरानीजनक यह था कि घटना से नौ जांच अधिकारी जुड़े थे, लेकिन अभियोजन की ओर से उनसे पूछताछ नहीं की गई। पीठासीन अधिकारी अमरजीत सिंह लंगेह की कोर्ट ने जांच को लापरवाही भरा और गैर-पेशेवर तरीके से किया हुआ मानते हुए आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया। जेएनएफ
विज्ञापन
अभियोजन की कहानी से मेल नहीं खाए बयान
अदालत को अभियोजन पक्ष की कहानी में काफी विसंगतियां मिलीं। कोर्ट ने गौर किया कि ट्रायल के दौरान जिस बस कंडक्टर से पूछताछ की गई, उसने कहा कि वह आदमी और महिला सुंदरबनी में उतरे थे। अभियोजन पक्ष पीड़िता को पंजाब के लुधियाना ले जाने की बात कह रहा था। कोर्ट ने पाया कि यह घटनाक्रम अभियोजन की मुख्य कहानी से मेल नहीं खाता।
गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने
वाले तक से पूछताछ नहीं
कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि अभियोजन पक्ष कई अहम गवाहों से पूछताछ करने में नाकाम रहा। इनमें वह व्यक्ति भी शामिल था, जिसने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पीड़िता के मामा से भी पूछताछ नहीं हुई, जिन्हें अपहरण के बारे में सूचित किया गया था। कोर्ट ने आदेश दिया कि उसकी टिप्पणियों के आधार पर जरूरी कार्रवाई के लिए फैसले की एक कॉपी जम्मू के आईजीपी को भी भेजी जाए।
विज्ञापन
- मामले से जुड़े नौ जांच अधिकारियों में से एक से भी अभियोजन ने नहीं की पूछताछ
जम्मू। जांच में खामियां पाते हुए जम्मू की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपहरण और दुष्कर्म के आरोपी को बरी कर दिया। उस पर राजोरी जिले की एक महिला को बस स्टैंड से अपहरण कर पंजाब ले जाने का आरोप था। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ठोस, भरोसेमंद और विश्वसनीय सबूत पेश करने में नाकाम रहा।
मामला बस स्टैंड पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा था। आरोपी पर आरपीसी की धाराओं 366, 376 और 343 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। अभियोजन का आरोप था कि महिला को पंजाब में कई महीनों तक रखा गया और बार-बार यौन शोषण किया गया। उसे जून, 2011 में कटड़ा से बरामद किया गया था।
विज्ञापन
कोर्ट ने शिकायत और गुमशुदगी की रिपोर्ट से जुड़ी तारीखों के मामले में पुलिस रिकॉर्ड में गड़बड़ियों की ओर इशारा किया। हैरानीजनक यह था कि घटना से नौ जांच अधिकारी जुड़े थे, लेकिन अभियोजन की ओर से उनसे पूछताछ नहीं की गई। पीठासीन अधिकारी अमरजीत सिंह लंगेह की कोर्ट ने जांच को लापरवाही भरा और गैर-पेशेवर तरीके से किया हुआ मानते हुए आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया। जेएनएफ
विज्ञापन
अभियोजन की कहानी से मेल नहीं खाए बयान
अदालत को अभियोजन पक्ष की कहानी में काफी विसंगतियां मिलीं। कोर्ट ने गौर किया कि ट्रायल के दौरान जिस बस कंडक्टर से पूछताछ की गई, उसने कहा कि वह आदमी और महिला सुंदरबनी में उतरे थे। अभियोजन पक्ष पीड़िता को पंजाब के लुधियाना ले जाने की बात कह रहा था। कोर्ट ने पाया कि यह घटनाक्रम अभियोजन की मुख्य कहानी से मेल नहीं खाता।
गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने
वाले तक से पूछताछ नहीं
कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि अभियोजन पक्ष कई अहम गवाहों से पूछताछ करने में नाकाम रहा। इनमें वह व्यक्ति भी शामिल था, जिसने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पीड़िता के मामा से भी पूछताछ नहीं हुई, जिन्हें अपहरण के बारे में सूचित किया गया था। कोर्ट ने आदेश दिया कि उसकी टिप्पणियों के आधार पर जरूरी कार्रवाई के लिए फैसले की एक कॉपी जम्मू के आईजीपी को भी भेजी जाए।