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मुआवजा और किराया दिए बगैर निजी जमीन अपने पास नहीं रख सकती सरकार : हाईकोर्ट
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- कहा - सरकार को जमीन के इस्तेमाल के मामले में उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा
जम्मू। संपत्ति के सांविधानिक अधिकार से जुड़े एक फैसले में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार को जमीन के इस्तेमाल के मामले में उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा। वह जमीन के मालिक को उचित मुआवजा और किराया दिए बगैर निजी जमीन पर कब्जा नहीं रख सकती। न ही उसका इस्तेमाल सार्वजनिक कार्यों के लिए कर सकती है।
जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अजीम की डिवीजन बेंच ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा। इसमें सरकार को राजोरी के एक निवासी को मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। इस निवासी की जमीन का इस्तेमाल बिना मुआवजा दिए पंचायत घर बनाने के लिए किया गया था।
मामला जिला राजोरी के गांव उधान का है। यहां खसरा नंबर 287 के तहत आने वाली दो कनाल जमीन निक्का राम के बेटे प्रकाश चंद की है। जमीन के मालिक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दावा किया कि उनकी जमीन वर्ष 2004 में ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत घर बनाने के लिए इस भरोसे पर ली थी कि उन्हें चौकीदार की नौकरी दी जाएगी। जमीन सौंपने के बावजूद नौकरी नहीं दी गई।
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कोर्ट ने माना कि जमीन मालिक को बिना मुआवजे के उसकी संपत्ति से वंचित किया गया, जिससे भारत के संविधान के अनुच्छेद 300ए के तहत उसके संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन हुआ। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जमीन मालिक उचित मुआवजे के साथ-साथ उस अवधि के लिए उपयोग और कब्जे का शुल्क पाने का भी हकदार है, जिस दौरान सरकार का जमीन पर कब्जा रहा। जेएनएफ
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जम्मू। संपत्ति के सांविधानिक अधिकार से जुड़े एक फैसले में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार को जमीन के इस्तेमाल के मामले में उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा। वह जमीन के मालिक को उचित मुआवजा और किराया दिए बगैर निजी जमीन पर कब्जा नहीं रख सकती। न ही उसका इस्तेमाल सार्वजनिक कार्यों के लिए कर सकती है।
जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अजीम की डिवीजन बेंच ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा। इसमें सरकार को राजोरी के एक निवासी को मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। इस निवासी की जमीन का इस्तेमाल बिना मुआवजा दिए पंचायत घर बनाने के लिए किया गया था।
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मामला जिला राजोरी के गांव उधान का है। यहां खसरा नंबर 287 के तहत आने वाली दो कनाल जमीन निक्का राम के बेटे प्रकाश चंद की है। जमीन के मालिक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दावा किया कि उनकी जमीन वर्ष 2004 में ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत घर बनाने के लिए इस भरोसे पर ली थी कि उन्हें चौकीदार की नौकरी दी जाएगी। जमीन सौंपने के बावजूद नौकरी नहीं दी गई।
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कोर्ट ने माना कि जमीन मालिक को बिना मुआवजे के उसकी संपत्ति से वंचित किया गया, जिससे भारत के संविधान के अनुच्छेद 300ए के तहत उसके संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन हुआ। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जमीन मालिक उचित मुआवजे के साथ-साथ उस अवधि के लिए उपयोग और कब्जे का शुल्क पाने का भी हकदार है, जिस दौरान सरकार का जमीन पर कब्जा रहा। जेएनएफ