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राजस्व रिकार्ड गायब करने के मामले में चार आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज
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जम्मू। राजस्व विभाग के गायब रिकार्ड मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जम्मू सीजेएम अरमजीत सिंह ने वीरवार को चार आरोपियों की जमानत अर्जी को खारिज कर दी है। प्रापर्टी डीलर सादिक पोसपाल, सेवानिवृत्त तहसीलदार मोहम्मद बशीर, सेवानिवृत्त गिरदावर धर्मपाल और गुलाम रसूल ने जमानत के लिए याचिका दायर की थी। इन लोगों को पुलिस और राजस्व विभाग ने सुंजवां इलाके में सरकारी जमीन का रिकार्ड गायब करने और अपने पास रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
सीजेएम ने बताया कि जांच में जो सबूत एकत्र किए हैं उनको विभिन्न पहलुओं से जोड़ना महत्वपूर्ण है। जांच का आधार शिकायतकर्ता की शिकायत पर तहसील बाहु के सुंजवां और चौआदी गांवों के राजस्व रिकॉर्ड के गायब होने की शिकायत पर आधारित है। मामला दर्ज होने के बाद 21 स्थानों पर दबिश दी गई, जिसमें कई दस्तावेज बरामद किए हैं।
मामला भ्रष्ट राजस्व अधिकारियों और याचिकाकर्ताओं जैसे निजी लाभार्थियों से जुड़ा एक घोटाला है, तो मामले में अभी तक छापा मारने और आरोपियों से घटिया राजस्व रिकॉर्ड की वसूली के अलावा कोई प्रगति नहीं हुई है। एसडीएम साउथ की तरफ से एसआईटी को मामले की सही जानकारी तक नहीं दी गई है। मामले में जब्त रिकार्ड की अभी जांच होनी चाहिए। इन सबके लिए एसआईटी को रोड मैप तैयार करने सहित लॉजिस्टिक्स की भी जरूरत है। जब तक ऐसा करने के लिए बाध्य लोगों द्वारा कानून को मजबूती से लागू नहीं किया जाता है, तब तक कानून की प्रक्रिया में जनता का विश्वास कायम नहीं रह सकता है। यह पहलू वास्तव में कानून की महिमा में बड़े पैमाने पर जनता के विश्वास के लिए झटका है। ऐसे में यदि आरोपियों को जमानत दी गई तो समाज में गलत संदेश जाएगा।
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सीजेएम ने बताया कि जांच में जो सबूत एकत्र किए हैं उनको विभिन्न पहलुओं से जोड़ना महत्वपूर्ण है। जांच का आधार शिकायतकर्ता की शिकायत पर तहसील बाहु के सुंजवां और चौआदी गांवों के राजस्व रिकॉर्ड के गायब होने की शिकायत पर आधारित है। मामला दर्ज होने के बाद 21 स्थानों पर दबिश दी गई, जिसमें कई दस्तावेज बरामद किए हैं।
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मामला भ्रष्ट राजस्व अधिकारियों और याचिकाकर्ताओं जैसे निजी लाभार्थियों से जुड़ा एक घोटाला है, तो मामले में अभी तक छापा मारने और आरोपियों से घटिया राजस्व रिकॉर्ड की वसूली के अलावा कोई प्रगति नहीं हुई है। एसडीएम साउथ की तरफ से एसआईटी को मामले की सही जानकारी तक नहीं दी गई है। मामले में जब्त रिकार्ड की अभी जांच होनी चाहिए। इन सबके लिए एसआईटी को रोड मैप तैयार करने सहित लॉजिस्टिक्स की भी जरूरत है। जब तक ऐसा करने के लिए बाध्य लोगों द्वारा कानून को मजबूती से लागू नहीं किया जाता है, तब तक कानून की प्रक्रिया में जनता का विश्वास कायम नहीं रह सकता है। यह पहलू वास्तव में कानून की महिमा में बड़े पैमाने पर जनता के विश्वास के लिए झटका है। ऐसे में यदि आरोपियों को जमानत दी गई तो समाज में गलत संदेश जाएगा।
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