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Ladakh Tourism: लद्दाख में तैयार होगी देश की पहली नाइट स्काई सेंक्चुअरी, खगोल पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

Sun, 04 Sep 2022 04:03 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/लेह
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/लेह Published by: विमल शर्मा Updated Sun, 04 Sep 2022 04:03 AM IST
सार

हनले में ऑप्टिकल इंफ्रा-रेड और गामा रे टेलीस्कोप स्थापित किए गए हैं, जो दुनिया में सबसे ऊंचाई वाली जगहों में से एक है। नाइट स्काई सेंक्चुअरी परियोजना के लिए लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद, लद्दाख प्रशासन और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स में त्रिपक्षीय समझौता हुआ है। इस परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को पंख लगेंगे।

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Country first night sky sanctuary will be ready in Ladakh
आकाशगंगा - फोटो : iStock

विस्तार

लद्दाख के हनले क्षेत्र में देश की पहली नाइट स्काई सेंक्चुअरी अगले तीन माह में बनकर तैयार हो जाएगी। विज्ञान एवं तकनीकी विभाग इस महत्वपूर्ण परियोजना को निर्धारित समय में पूरा करेगा। इससे खगोल पर्यटन को पंख लगेंगे। नई दिल्ली में मुलाकात के लिए पहुंचे लद्दाख के उप राज्यपाल आरके माथुर से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह बात कही।

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हनले में टेलीस्कोप स्थापित किए गए

डॉ. जितेंद्र ने कहा कि देश की पहली नाइट स्काई सेंक्चुअरी लद्दाख में चंगथंग वन्यजीव अभयारण्य का हिस्सा होगी, जिससे खगोल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। हनले में ऑप्टिकल इंफ्रा-रेड और गामा रे टेलीस्कोप स्थापित किए गए हैं, जो दुनिया में सबसे ऊंचाई वाली जगहों में से एक है।

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  • नाइट स्काई सेंक्चुअरी परियोजना के लिए लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद, लद्दाख प्रशासन और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स में त्रिपक्षीय समझौता हुआ है। इस परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को पंख लगेंगे।
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क्या होती है नाइट स्काई सेंक्चुअरी 

नाइट स्काई सेंक्चुअरी वह क्षेत्र होता है, जहां रोशनी के प्रदूषण को नियंत्रित किया जाता है। रात को अधिक से अधिक अंधेरा सुनिश्चित किया जाता है ताकि आसमान में ग्रहों और सितारों का अध्ययन किया जा सके। नाइट स्काई सेंक्चुअरी क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही का समय निर्धारित किया जाता है।


घरों की रोशनी बाहर न आए, इसके लिए मोटे पर्दे व बल्ब की दिशा पहले से तय होती है। जितना अंधेरा होगा, आसमान में तारे उतने साफ नजर आते हैं। लद्दाख चूंकि ठंडे मरुस्थल की तरह है। यहां तकरीबन साल भर आसमान साफ रहता है। चंगथंग दूरदराज क्षेत्र है, जिसके आस पास बहुत कम आबादी है।

लद्दाख में खुलेगी केंद्रीय चमड़ा अनुसंधान संस्थान की शाखा

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि लद्दाख में जल्द ही केंद्रीय चमड़ा अनुसंधान संस्थान (सीएलआरआई) की क्षेत्रीय शाखा खोली जाएगी। इसके लिए चेन्नई से संस्थान के विशेषज्ञ इस साल अंत में लद्दाख का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि लद्दाख के चंगथंग में पश्मीना बकरी, भेड़ें और दुर्लभ याक जैसे चार लाख जानवर हैं।

लेह बेरी से बनेंगे 100 उत्पाद 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लद्दाख प्रशासन ने लेह बेरी (सी बकथॉर्न) की व्यावसायिक खेती शुरू करवाई है। सीएसआईआर की मदद से लेह बेरी के करीब 100 उत्पाद तैयार करवाने की योजना है, जिससे स्थानीय किसानों की आर्थिक में सुधार होगा। वहीं, लद्दाख के एलजी आरके माथुर ने बताया कि 15 हजार फुट की ऊंचाई पर लद्दाख में संजीवनी बूटी कही जाने वाली सोलो समेत तीन औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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