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अब हर साल होंगे विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह

Sat, 15 Nov 2014 03:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Sat, 15 Nov 2014 03:31 PM IST
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convocation will organized every year in universities

जम्मू विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और राज्यपाल एनएन वोहरा ने रियासत के सभी नौ विश्वविद्यालयों में सहयोगात्मक संबंध बनाने पर बल दिया। जम्मू विश्वविद्यालय में आयोजित विशेष दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति वोहरा ने कहा कि तमाम विश्वविद्यालयों और अकादमी संस्थानों के बीच संबंध होने चाहिएं, ताकि तमाम स्रोतों का भरपूर उपयोग किया जा सके।

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यह प्रयास उन विद्यार्थियों के लिए जरूरी है, जो यूनिवर्सिटी से सफलतापूर्वक पढ़ाई करने के बाद प्रतिस्पर्धा से भरी जॉब मार्केट में भविष्य तलाशते हैं। राज्यपाल ने कहा कि इस संबंध में रियासत और राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के बीच आपसी समझौते होने चाहिएं। जरूरत पड़े तो विदेशों के जाने-माने संस्थानों से भी इस पर प्रयास होने चाहिएं। इससे शिक्षा और स्किल अपग्रेडेशन के लिए विख्यात शिक्षण संस्थानों से लाभ उठाने के अवसर हमारे विद्यार्थियों को मिलेंगे।
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रियासत के तमाम वाइस चांसलर से उन्होंने कहा कि समय के साथ शिक्षा के बदलते सिस्टम पर नजर रखनी होगी और मौजूदा सिस्टम में जरूरी बदलाव भी करने होंगे। साथ ही जरूरत के अनुसार नए कोर्स भी लागू करने होंगे। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना होगा कि जब तक आधारभूत ढांचा और अनुभवी फैकल्टी नहीं होती, तब तक आफ साइट कैंपस आरंभ करने की इजाजत नहीं देनी चाहिए।
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कुलाधिपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती छात्रों के बीच तमाम कोर्सों को आकर्षक बनाना है। जो विश्व कारोबार और उद्योगों के लिए आवश्यक है। इसके लिए लगातार अकादमी आडिट कर कमजोर क्षेत्रों को मजबूत करना होगा।

राज्यपाल वोहरा ने कहा कि वर्ष 2007 के पास आउट को सात साल बाद डिग्री हासिल हो रही है। रियासत के मुख्यमंत्री और प्रो वाइस चांसलर के साथ हुई बैठक में फैसला लिया गया है कि अब हर साल विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह आयोजित होंगे, ताकि विद्यार्थियों को लंबा इंतजार न करना पड़े।


उन्होंने यूनिवर्सिटी के शिक्षकों और फैकल्टी को विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में भी प्रभावशाली भूमिका अदा करने को कहा। शिक्षकों की बड़ी जिम्मेदारी बनती है कि उनके विद्यार्थियों में नैतिकता और नैतिक मूल्य हों, ताकि वे स्थायी समाज के निर्माण में योगदान कर सकें। यूनिवर्सिटी से निकलने के बाद छात्र जब देश के किसी भी हिस्से में काम करने जाएं, तो उनके चरित्र से जम्मू विश्वविद्यालय का नाम रोशन हो।

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