{"_id":"3858b56370c5f6b52c16d1baf1e12dcf","slug":"contract-lecturer-did-not-found-6-months-salary-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कांट्रैक्चुअल लेक्चरर्स को 6 माह से नहीं मिला वेतन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कांट्रैक्चुअल लेक्चरर्स को 6 माह से नहीं मिला वेतन
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 16 Dec 2014 10:29 PM IST
विज्ञापन
श्रीनगर में कांट्रैक्चुअल लेक्चरर्स ने मंगलवार को उच्च शिक्षा विभाग और कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि उन्हें पिछले छह महीनों से वेतन नहीं दिया गया है, जिसके कारण उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है।
विज्ञापन
श्रीनगर की प्रेस कॉलोनी में गांदरबल डिग्री कॉलेज के कांट्रैक्चुअल लेक्चरर्स ने जमकर प्रदर्शन किया। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन और उच्च शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मांग की कि उन्हें जल्द वेतन दिया जाए।
विज्ञापन
प्रदर्शन कर रहे मोहम्मद रफीक सोफी के अनुसार, डिग्री कॉलेज गांदरबल का अधिकतर कार्यभार उनके ऊपर है, जिसे करने में वह कभी नहीं कतराते। इन सबके बावजूद उन्हें पिछले 6 महीनों से वेतन से वंचित रखा जा रहा है।
विज्ञापन
कॉलेज में कुल 81 कांट्रैक्चुअल लेक्चरर्स हैं, जिनमें से अधिकतर श्रीनगर जिले से हैं। हम सभी हाल ही में बाढ़ से प्रभावित भी हुए हैं। ऐसे में उन्हें वेतन न मिलने से और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, अपने परिवार की जीविका चलाने के लिए उन्हें पाई-पाई के लिए तरसना पड़ रहा है।
एक और कांट्रैक्चुअल लेक्चरर मुफीद के अनुसार, अगर एक अध्यापक को नेशन बिल्डर के रूप में देखा जाता है तो फिर उसे उसके हक से वंचित क्यों रखा जाता है। कॉलेज प्रबंधन के अनुसार, उनके पास वेतन देने के लिए फंड नहीं है।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अगर कांट्रैक्चुअल लेक्चरर्स के लिए फंड नहीं तो फिर परमानेंट लेक्चरर और परमानेंट नॉन टीचिंग स्टाफ को कैसे वेतन दिया जा रहा है। इस संबंध में गांदरबल डिग्री कॉलेज की प्रिंसिपल नसरीन मलिक ने बताया कि उनके पास फंड की कमी है, जिसके कारण इन कांट्रैक्चुअल लेक्चरर्स का वेतन रुका हुआ है।
फिलहाल कुछ पैसा उन्हें मिला है, जिससे वह जल्द ही कांट्रैक्चुअल लेक्चरर्स को कम से कम तीन महीनों का वेतन दे देंगी। उन्होंने इस बात का भी आश्वासन दिलाया कि वह वित्तीय विभाग के अधिकारियों से जल्द बात कर बाकी के तीन महीनों का वेतन भी दिलवाने की कोशिश करेंगी।