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गृहमंत्री राजनाथ के समक्ष उपद्रवियों का खौफ खत्म करने की चुनौती
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
Updated Thu, 25 Aug 2016 01:46 PM IST
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राजनाथ सिंह
- फोटो : Amar Ujala
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जम्मू-कश्मीर में शांति मिशन पर आए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष उपद्रवियों का खौफ खत्म करने की चुनौती सबसे बड़ी है। बीएसएफ की तैनाती से उपद्रवियों को सख्त संदेश देने की कोशिश जरूर हुई है, लेकिन, श्रीनगर से लेकर घाटी के गांवों तक उपद्रवियों के खौफ का असर अब भी कायम है।
आम लोग भय से प्रदर्शनों में शामिल होते हैं और पैसों का लालच बच्चों को पत्थरबाज बनाता है। आतंकी संगठन निचले स्तर के सरकारी मुलाजिमों पर इस्तीफे के लिए जवाब बनाने लगे हैं। मुख्यधारा के सियासी दलों के कुछ नेताओं में भी उपद्रवियों का खौफ है। हमले की आशंका के मद्देनजर घाटी में कुछ मंत्री अपने सरकारी आवासों में रात नहीं गुजारते हैं।
अलगाववादियों से बातचीत की राह में कई बाधाएं हैं। केंद्र सरकार संविधान के दायरे में ही वार्ता करेगी। अलगाववादियों को लगता है कि इस शर्त पर बातचीत से उनकी दुकानदारी बंद हो सकती है।
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आम लोग भय से प्रदर्शनों में शामिल होते हैं और पैसों का लालच बच्चों को पत्थरबाज बनाता है। आतंकी संगठन निचले स्तर के सरकारी मुलाजिमों पर इस्तीफे के लिए जवाब बनाने लगे हैं। मुख्यधारा के सियासी दलों के कुछ नेताओं में भी उपद्रवियों का खौफ है। हमले की आशंका के मद्देनजर घाटी में कुछ मंत्री अपने सरकारी आवासों में रात नहीं गुजारते हैं।
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अलगाववादियों से बातचीत की राह में कई बाधाएं हैं। केंद्र सरकार संविधान के दायरे में ही वार्ता करेगी। अलगाववादियों को लगता है कि इस शर्त पर बातचीत से उनकी दुकानदारी बंद हो सकती है।
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अलगाववादियों ने महिलाओं को मोर्चा संभालने को कहा
घाटी में हिंसक प्रदर्शन
- फोटो : PTI
अलगाववादियों को शांति के लिए वार्ता की मेज तक लाने की कोशिशें फिलहाल सफल नहीं होती दिख रहीं। हालांकि, अलगाववादियों का जनाधार सिमटा है। लेकिन, उनके बंद से अक्सर स्थिति बिगड़ जाती है और उपद्रवियों को उत्पात को मौका मिलता है।
राजनाथ के आते ही अलगाववादियों ने बंद और हड़ताल की अवधि 25 अगस्त से बढ़ाकर एक सितम्बर कर दी है। उपद्रवी पत्थरबाजी और सुरक्षा बलों के कैंपों पर हमले में बच्चों को आगे करते रहे हैं और अब महिलाओं से प्रदर्शन में शामिल होने का आह्वान कर रहे है। महिलाओं को बंद में हथियार बनाकर सरकारी मुलाजिमों को आफिस जाने से रोकने के रणनीति बनी है।
जानकारों का मामना है कि जब राजनाथ की सकारात्मक मुलाकात धार्मिक नेताओं और कश्मीरी समाज में प्रभाव रखने वाले नेताओं से होती है तभी मसले का कोई सही हल निकल पाएगा।
राजनाथ के आते ही अलगाववादियों ने बंद और हड़ताल की अवधि 25 अगस्त से बढ़ाकर एक सितम्बर कर दी है। उपद्रवी पत्थरबाजी और सुरक्षा बलों के कैंपों पर हमले में बच्चों को आगे करते रहे हैं और अब महिलाओं से प्रदर्शन में शामिल होने का आह्वान कर रहे है। महिलाओं को बंद में हथियार बनाकर सरकारी मुलाजिमों को आफिस जाने से रोकने के रणनीति बनी है।
जानकारों का मामना है कि जब राजनाथ की सकारात्मक मुलाकात धार्मिक नेताओं और कश्मीरी समाज में प्रभाव रखने वाले नेताओं से होती है तभी मसले का कोई सही हल निकल पाएगा।