कुपवाड़ा में आतंकियों से लोहा लेते हुए कर्नल शहीद, आपरेशन जारी
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उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में जारी मुठभेड़ में मंगलवार को आतंकियों से लोहा लेते हुए कर्नल संतोष महादिक शहीद हो गए। कर्नल संतोष 41 राष्ट्रीय राइफल (आरआर) के कमांडिंग आफिसर (सीओ) थे।
1998 में भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेज में कमीशन लेने वाले महाराष्ट्र के कर्नल संतोष को आतंकियों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशनों में उनके कुशल नेतृत्व और अदम्य साहस के लिए सेना मेडल से भी सम्मानित किया गया था।
इस मुठभेड़ में दो जवान भी घायल हुए हैं। इलाके में आतंकियों के खिलाफ सर्च अभियान अब भी जारी है। सैन्य सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुपवाड़ा के ननिगाह - हायगाम बेल्ट में एलओसी के करीब सेना को आतंकियों के होने की खबर मिली थी।
जिस पर सेना की 41 आरआर और जम्मू कश्मीर पुलिस के स्पेशल आपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने इलाके में तलाशी अभियान चलाया। सर्च आपरेशन के दौरान आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां चलानी शुरू कर दी।
आपरेशन के दौरान आतंकियों से लोहा लेते हुए आरआर के कमांडिंग आफिसर (सीओ) कर्नल संतोष महादिक समेत टेरीटोरियल आर्मी के मज्लून अहमद और एसओजी का एक जवान घायल हो गया।
अंधेरे का फायदा उठा कर आतंकी फरार होने में कामयाब
जिन्हें तुरंत इलाज के लिए दृगमुला में स्थित सेना के अस्पताल में लाया गया। कर्नल संतोष की हालत गंभीर होने के चलते उन्हें एयर लिफ्ट करके श्रीनगर के बादमीबाद छावनी स्थित 92 बेस अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।
वहीं घायल दोनों जवानों को इलाज 92 बेस अस्पताल में जारी है। खबर लिखे जाने तक सुरक्षा बलों द्वारा इलाके में सर्च अभियान जारी था।गौरतलब है कि सोमवार शाम को बेहक जंगल क्षेत्र में सेना की 41 आरआर और 4 पैरा द्वारा लश्कर के आतंकियों को इंटरसेप्ट किया गया और सर्च अभियान चलाया गया।
लेकिन अंधेरे का फायदा उठा कर आतंकी फरार होने में कामयाब हो गए। इससे पहले भी आतंकियों के इसी दल ने मनिगाह इलाके सेना को चकमा दिया था और उस दौरान दो जवान भी घायल हुए थे।