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यहां पर रहस्यमय बीमारी का शिकार हो रहे बच्चे

Sun, 03 Jan 2016 01:45 PM IST
Updated Sun, 03 Jan 2016 01:45 PM IST
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children get mysterious Illness in kathua

सोलह बरस का पवन पढ़ने में होशियार है, लेकिन अब वह स्कूल नहीं जाता। चौथी कक्षा तक वह बिल्कुल ठीक था। फिर उसके पांव की नसें और हडि्डयों में विकार आने लगे।

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नतीजतन उसके लिए चलना मुश्किल हो गया। जैसे तैसे वह स्कूल जा पाता था। आठवीं तक पहुंचते-पहुंचते उसके हाथ की अंगुलियों ने भी काम करना बंद कर दिया। अब पीठ पर कूबड़ हो गया है।
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पढ़ाई छोड़कर अब घर पर ही है। उसके चचेरे भाई राजू की हालत और भी दयनीय है। 23 साल से बिस्तर पर पड़ा राजू घरवालों की मदद से ही करवट बदल सकता है।

कठुआ जिले के गोविंदसर गांव और सटे इलाकों में रहस्यमय बीमारी से जूझ रहे ऐसे दर्जन मामले हैं, जिसके शिकार बच्चे या तो पैदाइशी अंगहीन हैं या फिर शरीर के विकास क्रम में उनके लिए चलना-फिरना तो दूर अपने हाथों से निवाला खाना भी मुश्किल हो गया।
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पवन के पिता अशोक कुमार बताते हैं कि गांव में ऐसे दर्जनों मामले हैं। बच्चे के इलाज के लिए वह देहरादून भी गए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उनकी आंखों के सामने पवन का शरीर तिल-तिल मर रहा है।

डाक्टरों ने भी बच्चे की उम्र कुछ साल तक ही बताई। राजू की मां शारदा देवी की आंखें बेटे का जिक्र छिड़ने पर छलक जाती हैं। शारदा देवी के अनुसार हर मुमकिन कोशिश करने के बावजूद कुछ भी हासिल नहीं हो पाया है।

दोनों बच्चों के अभिभावक कहते हैं कि बीमारी का इलाज भले न हो, लेकिन बीमारी की वजह तो पता की जानी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां बची रहें।

इसी मोहल्ले से सटे दूसरे मोहल्ले का सोलह वर्षीय शम्मी कुमार जन्म से एक पांव और एक हाथ से मोहताज है। पिता नरवंत कुमार के अनुसार बीमारी का आज तक पता नहीं चल पाया है तो इलाज कैसे करवाते।

आठ बच्चों की हो चुकी है मौत: जनसेवा संस्थान

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गांव में सक्रिय जनसेवा संस्थान के अध्यक्ष शशि शर्मा के अनुसार दर्जनों बच्चे रहस्यमय बीमारी से ग्रस्त हैं। आठ बच्चों की तो मौत भी हो चुकी है। इसके बावजूद बीमारी की सही जांच के लिए ठोस कोशिश नहीं की गई है।

त्वरित रूप से मेडिकल जांच के लिए टीम तैनात की जानी चाहिए। साथ ही प्रभावित बच्चों के लिए पुनर्वास केंद्र खोला जाना चाहिए। गांव के युवा संगठन के अध्यक्ष गोपाल सिंह परमार भी बच्चों में बीमारी की जांच की मांग करते हैं।

बकौल परमार औद्योगिक क्षेत्र से सटे गोविंदसर में इस तरह की बीमारी के कारणों के कयास लगाने से बेहतर है कि इसकी वैज्ञानिक जांच करवाई जाए।

डा. बसंत के अनुसार गोबिंदसर में शीघ्र चिकित्सा टीम भेजकर बच्चों की जांच करवाई जाएगी। प्रारंभिक तौर पर यह कहा जा सकता है कि ऐसी कोई बीमारी जेनेटिक हो सकती है।

जीएमसी जम्मू के आर्थो विभाग के डा. अब्दुल गनी के अनुसार ऐसी बीमारी जेनेटिक हो सकती है, लेकिन अगर यह ज्यादा बच्चों को अपनी चपेट में ले रही है तो यह चिंता का विषय है।

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