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Jammu News: बचपन से खेल रहे दावे, मजदूरी में जवान हो रहा बाल
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अरुण कुमार
जम्मू। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस आज है। सभी के लिए सामाजिक न्याय, बाल श्रम का खात्मा की थीम को लेकर जगह-जगह कार्यक्रम होंगे। दूसरी ओर, विभागीय अनदेखी के कारण बाल श्रमिक बढ़ रहे हैं। दुकानों, ढाबों, रेहड़ियों के साथ घरों में 14 साल से कम बच्चे काम कर रहे हैं, लेकिन श्रम विभाग के कानून में शायद ये बाल श्रमिक नहीं हैं, क्योंकि संभाग के 10 जिलों में साढ़े तीन साल में हुए 2648 निरीक्षण यह साबित कर रहा है। जांच के दौरान सिर्फ चार बाल श्रमिक मिले, जबकि अमर उजाला की शहर में एक सप्ताह की पड़ताल में ही एक दर्जन से अधिक बच्चे मजदूरी करते दिखे।
दरअसल, श्रम विभाग ने बाल श्रम अधिनियम के तहत 2020-21 में 990 निरीक्षण किए, जिसमें एक भी बाल श्रमिक नहीं मिला। 2021-22 में 6789 निरीक्षण हुए और एक श्रमिक मिला। 2022-23 में 829 निरीक्षण में तीन बाल श्रमिक मिले। मई 2023 तक 151 निरीक्षण में कोई नहीं मिला। साढ़े तीन साल में बरामद चार बच्चे जम्मू और रियासी जिले से हैं। दावों की पड़ताल करने को जब टीम पांच से 11 मई तक विभिन्न क्षेत्रों में गई तो 14 साल से कम दस बच्चे ऐसे मिले, जो रेहड़ी, फुटपाथ पर सामान बेचने और ढाबों पर काम कर रहे थे। अधिकांश बच्चे परिवार की आर्थिक मदद के लिए मजदूरी कर रहे हैं। सबसे ज्यादा बाल श्रमिक घरों में काम करते हैं, लेकिन शिकायत के अभाव के कारण विभाग कार्रवाई नहीं कर पाता।
तीन मामलों से समझें
केस 1- इंदिरा चौक में बिहारी के तीन भाई फुटपाथ पर सामान बेच रहे हैं। इनमें दो 15 साल से कम और एक की आयु 10 साल है। परिवार का पालन पोषण करने के लिए तीनों काम करते हैं। दो साल से ऐसे ही दुकान लगाते हैं। पहले छन्नी में काम करते थे।
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केस 2 - गांधी नगर रेहड़ी जोन में यूपी निवासी बच्चा भुट्टा बेचता है। दो साल से काम कर रहा है। 13 साल में स्कूल कभी नहीं देखा। मात-पिता गांव में रहते हैं। जम्मू में रिश्तेदार के आया था, उसके बाद वापस नहीं गया।
केस-3 गांधी नगर रेहड़ी जोन में गाड़ी आते ही मेन्यू कार्ड दिखाने बच्चा दौड़ता है। उसकी आयु 13 साल है और छह महीने से काम कर रहा है। उसने कहा कि परिवार के पालन पोषण भी जिम्मेदारी है। मर्जी से काम कर रहा हूं। इसी तरह ढाबों-दुकानों पर बच्चे काम कर रहे हैं। आरएसपुरा के ईंट-भट्ठों में मजदूर बने बच्चों की आयु भी 14 साल से कम है।
इसलिए मनाया जाता दिवस - अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ ने पहली बार बाल श्रम को रोकने का मुद्दा उठाया था। इसके बाद 2002 में सर्वसम्मति से कानून पारित हुआ, जिसके तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से मजदूरी करवाना अपराध माना गया है।
अभियान चला रहे, लोगों को सहयोग जरूरी
श्रम आयुक्त अब्दुल राशिद वार ने कहा कि विभाग समय-समय पर जागरूक अभियान चलाता है। बाल श्रम को मिटाने में समाज का योगदान जरूरी है। अगर लोग रिपोर्ट करें तो बच्चों का बचपन बचाकर उनका पुनर्वास करवाएंगे। नेशनल चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1089 पर शिकायत जरूर करें।
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जम्मू। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस आज है। सभी के लिए सामाजिक न्याय, बाल श्रम का खात्मा की थीम को लेकर जगह-जगह कार्यक्रम होंगे। दूसरी ओर, विभागीय अनदेखी के कारण बाल श्रमिक बढ़ रहे हैं। दुकानों, ढाबों, रेहड़ियों के साथ घरों में 14 साल से कम बच्चे काम कर रहे हैं, लेकिन श्रम विभाग के कानून में शायद ये बाल श्रमिक नहीं हैं, क्योंकि संभाग के 10 जिलों में साढ़े तीन साल में हुए 2648 निरीक्षण यह साबित कर रहा है। जांच के दौरान सिर्फ चार बाल श्रमिक मिले, जबकि अमर उजाला की शहर में एक सप्ताह की पड़ताल में ही एक दर्जन से अधिक बच्चे मजदूरी करते दिखे।
दरअसल, श्रम विभाग ने बाल श्रम अधिनियम के तहत 2020-21 में 990 निरीक्षण किए, जिसमें एक भी बाल श्रमिक नहीं मिला। 2021-22 में 6789 निरीक्षण हुए और एक श्रमिक मिला। 2022-23 में 829 निरीक्षण में तीन बाल श्रमिक मिले। मई 2023 तक 151 निरीक्षण में कोई नहीं मिला। साढ़े तीन साल में बरामद चार बच्चे जम्मू और रियासी जिले से हैं। दावों की पड़ताल करने को जब टीम पांच से 11 मई तक विभिन्न क्षेत्रों में गई तो 14 साल से कम दस बच्चे ऐसे मिले, जो रेहड़ी, फुटपाथ पर सामान बेचने और ढाबों पर काम कर रहे थे। अधिकांश बच्चे परिवार की आर्थिक मदद के लिए मजदूरी कर रहे हैं। सबसे ज्यादा बाल श्रमिक घरों में काम करते हैं, लेकिन शिकायत के अभाव के कारण विभाग कार्रवाई नहीं कर पाता।
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तीन मामलों से समझें
केस 1- इंदिरा चौक में बिहारी के तीन भाई फुटपाथ पर सामान बेच रहे हैं। इनमें दो 15 साल से कम और एक की आयु 10 साल है। परिवार का पालन पोषण करने के लिए तीनों काम करते हैं। दो साल से ऐसे ही दुकान लगाते हैं। पहले छन्नी में काम करते थे।
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केस 2 - गांधी नगर रेहड़ी जोन में यूपी निवासी बच्चा भुट्टा बेचता है। दो साल से काम कर रहा है। 13 साल में स्कूल कभी नहीं देखा। मात-पिता गांव में रहते हैं। जम्मू में रिश्तेदार के आया था, उसके बाद वापस नहीं गया।
केस-3 गांधी नगर रेहड़ी जोन में गाड़ी आते ही मेन्यू कार्ड दिखाने बच्चा दौड़ता है। उसकी आयु 13 साल है और छह महीने से काम कर रहा है। उसने कहा कि परिवार के पालन पोषण भी जिम्मेदारी है। मर्जी से काम कर रहा हूं। इसी तरह ढाबों-दुकानों पर बच्चे काम कर रहे हैं। आरएसपुरा के ईंट-भट्ठों में मजदूर बने बच्चों की आयु भी 14 साल से कम है।
इसलिए मनाया जाता दिवस - अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ ने पहली बार बाल श्रम को रोकने का मुद्दा उठाया था। इसके बाद 2002 में सर्वसम्मति से कानून पारित हुआ, जिसके तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से मजदूरी करवाना अपराध माना गया है।
अभियान चला रहे, लोगों को सहयोग जरूरी
श्रम आयुक्त अब्दुल राशिद वार ने कहा कि विभाग समय-समय पर जागरूक अभियान चलाता है। बाल श्रम को मिटाने में समाज का योगदान जरूरी है। अगर लोग रिपोर्ट करें तो बच्चों का बचपन बचाकर उनका पुनर्वास करवाएंगे। नेशनल चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1089 पर शिकायत जरूर करें।