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Jammu News: पंचतरणी में छड़ी मुबारक की हुई सायंकाल आरती
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श्रीनगर। श्री अमरनाथ की वार्षिक यात्रा के दौरान पवित्र छड़ी मुबारक दोपहर को पंचतरणी पहुंच गई। यहां सायंकाल की आरती हुई। यहां से 31 अगस्त की सुबह छड़ी मुबारक को रीति रिवाज के साथ अमरनाथ की पवित्र गुफा की ओर ले जाया जाएगा।
छड़ी मुबारक के संरक्षक महंत दीपेंदर गिरी ने कहा कि शेषनाग में रात्रि पड़ाव करने के बाद बुधवार सुबह करीब सात बजे वे अपने जत्थे के साथ पंचतरणी की ओर रवाना हुए। वे रास्ते में वॉबल में रुके। इसके बाद वे महागुनस टॉप में रुके जोकि समुद्र सतह से 14800 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। पोषपथरी में भी वे भंडारे में रुके, जिसके बाद सीधा पंचतरणी पहुंचे। उन्होंने बताया कि पंचतरणी शिविर में छड़ी मुबारक की सायंकाल की आरती की गई। रात्रि पड़ाव यहीं पंचतरणी में ही होगा। इसके बाद तड़के पवित्र अमरनाथ जी की गुफा की ओर चढ़ाई शुरू की जाएगी। बता दें कि जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के बडशाह चौक इलाके में स्थित दशनामी अखाड़े से गत शनिवार की सुबह पवित्र छड़ी मुबारक को संरक्षक महंत दीपेंदर गिरी की अगुवाई में श्रीनगर से पहलगाम के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना किया गया था। इस अवसर पर देश भर से आए साधु संत इस छड़ी के साथ पवित्र अमरनाथ जी की यात्रा के लिए रवाना हुए। महंत दीपेंदर गिरी ने कहा कि सुरेश्वर मंदिर श्रीनगर, पाम्पोर शिव मंदिर, बिजबिहाड़ा और फिर मार्तण्ड मंदिर में पूजन के बाद पहलगाम में लिद्दर नदी के पास गणेश जी के मंदिर में पूजन किया। पहलगाम में दशमी और एकादशी की रात विश्राम किया। द्वादसी (28 अगस्त) को चंदनवाड़ी में रुके। 29 अगस्त को शेषनाग में, चतुर्दशी (30 अगस्त) पंचतरणी में रुके। उन्होंने कहा कि 31 अगस्त को सूर्य उदय के साथ ही छड़ी मुबारक को पवित्र अमरनाथ गुफा में स्थापित कर वैदिक मंत्रों से पूजा की जाएगी। 31 अगस्त को रात्रि पड़ाव पंचतरणी में होगा। एक सितंबर को शेषनाग और चंदनबाड़ी होते हुए पहलगाम में रात्रि पड़ाव होगा। दो सितंबर में लिद्दर नदी के किनारे पूजन और विसर्जन के बाद महात्माओं के भोज के साथ इस वर्ष की पवित्र यात्रा पूर्ण होगी।
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छड़ी मुबारक के संरक्षक महंत दीपेंदर गिरी ने कहा कि शेषनाग में रात्रि पड़ाव करने के बाद बुधवार सुबह करीब सात बजे वे अपने जत्थे के साथ पंचतरणी की ओर रवाना हुए। वे रास्ते में वॉबल में रुके। इसके बाद वे महागुनस टॉप में रुके जोकि समुद्र सतह से 14800 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। पोषपथरी में भी वे भंडारे में रुके, जिसके बाद सीधा पंचतरणी पहुंचे। उन्होंने बताया कि पंचतरणी शिविर में छड़ी मुबारक की सायंकाल की आरती की गई। रात्रि पड़ाव यहीं पंचतरणी में ही होगा। इसके बाद तड़के पवित्र अमरनाथ जी की गुफा की ओर चढ़ाई शुरू की जाएगी। बता दें कि जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के बडशाह चौक इलाके में स्थित दशनामी अखाड़े से गत शनिवार की सुबह पवित्र छड़ी मुबारक को संरक्षक महंत दीपेंदर गिरी की अगुवाई में श्रीनगर से पहलगाम के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना किया गया था। इस अवसर पर देश भर से आए साधु संत इस छड़ी के साथ पवित्र अमरनाथ जी की यात्रा के लिए रवाना हुए। महंत दीपेंदर गिरी ने कहा कि सुरेश्वर मंदिर श्रीनगर, पाम्पोर शिव मंदिर, बिजबिहाड़ा और फिर मार्तण्ड मंदिर में पूजन के बाद पहलगाम में लिद्दर नदी के पास गणेश जी के मंदिर में पूजन किया। पहलगाम में दशमी और एकादशी की रात विश्राम किया। द्वादसी (28 अगस्त) को चंदनवाड़ी में रुके। 29 अगस्त को शेषनाग में, चतुर्दशी (30 अगस्त) पंचतरणी में रुके। उन्होंने कहा कि 31 अगस्त को सूर्य उदय के साथ ही छड़ी मुबारक को पवित्र अमरनाथ गुफा में स्थापित कर वैदिक मंत्रों से पूजा की जाएगी। 31 अगस्त को रात्रि पड़ाव पंचतरणी में होगा। एक सितंबर को शेषनाग और चंदनबाड़ी होते हुए पहलगाम में रात्रि पड़ाव होगा। दो सितंबर में लिद्दर नदी के किनारे पूजन और विसर्जन के बाद महात्माओं के भोज के साथ इस वर्ष की पवित्र यात्रा पूर्ण होगी।
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