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चार सप्ताह में नियुक्त करें मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष

Wed, 28 Oct 2015 06:32 PM IST
Updated Wed, 28 Oct 2015 06:32 PM IST
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chairman of the Human Rights Commission appointed in four weeks: HC
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एन पाल वसंथाकुमार और जस्टिस हसनैन मसूदी की खंडपीठ ने ऐतिहासिक फैसले में कानून एवं संसदीय मामलों के सचिव को निर्देश दिए कि चार सप्ताह के अंदर राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की जाए।
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उक्त निर्देश जम्मू कश्मीर पीपुल्स फोरम की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर दिया, जिसमें कहा गया कि 29 जून 2014 से मानवाधिकार आयोग पूरी तरह ठप पड़ा है, क्योंकि सरकार किसी न किसी कारण से उसके चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति करने में विफल रही है। याचिका में अपील की गई कि सरकार को निर्देश दिए जाएं कि तत्काल नियुक्तियां की जाएं।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने पाया कि राज्य विधायिका ने एसआरओ-1 (एक जनवरी 1999) जारी कर आयोग को अधिनियमित किया था, ताकि मानवाधिकार की सुरक्षा हो सके।
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अधिनियम के अनुसार मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, विधानपरिषद के चेयरमैन, गृह मंत्री, विधानसभा और विधानपरिषद में विपक्ष के नेता से युक्त कमेटी आयोग के चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्ति करेंगे।

अध्यक्ष हाईकोर्ट के वर्तमान या रिटायर्ड जज होंगे

chairman of the Human Rights Commission appointed in four weeks: HC

अध्यक्ष हाईकोर्ट के वर्तमान या रिटायर्ड जज होंगे। एक सदस्य कम से कम जिला जज स्तर के रिटायर्ड जज होंगे, जबकि अन्य तीन सदस्य मानवाधिकार का ज्ञान और अनुभव रखने वाले शख्स होंगे। इनका कार्यकाल तीन साल या 70 साल तक की उम्र का होगा। एक्ट में संशोधन कर इसका कार्यकाल पांच साल और उम्र 75 साल तक बढ़ाई गई।

याचिकाकर्ता के अनुसार अंतिम अध्यक्ष ने 24 अक्तूबर 2011 तक सेवाएं प्रदान कीं। उसके बाद नए अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति नहीं की गई। सिर्फ समय समय पर सीनियर सदस्यों को अध्यक्ष बनाकर वैकल्पिक व्यवस्था की गई। 29 जून 2014 से यह प्रक्रिया भी समाप्त हो गई।

इस संबंध में कई बार सरकार से अपील की गई, लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। आयोग के कार्यशील न होने से बड़ी संख्या में मानवाधिकार के मामले लंबित पड़े हैं। अदालत ने कहा कि सरकार इस मामले में अपना कर्तव्य का पालन करने में विफल रही है। अदालत ने कहा कि इस मामले में यदि सरकार विफल रहती है तो कोर्ट का कर्तव्य है कि वह इसमें हस्तक्षेप कर निर्देश जारी करे।

प्रतिवादी ने इस संबंध में कई बार कोर्ट को कहा कि सरकार इस मामले में गंभीरता से विचार कर रही है। 15 सितंबर को एडवोकेट जनरल ने कहा था कि राज्य जवाबदेही आयोग के गठन की प्रक्रिया चल रही है। इसके तुरंत बाद मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों का चयन कर लिया जाएगा।

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