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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Chadi Mubarak reaches Sharika Bhavani temple, will reach holy cave on August 12

chhadee mubaarak: पवित्र छड़ी मुबारक शारिका भवानी मंदिर पहुंची, 12 अगस्त को पवित्र गुफा में होगी पूजा

Fri, 29 Jul 2022 09:55 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 29 Jul 2022 09:55 PM IST
सार

सात अगस्त को छड़ी मुबारक श्रीनगर स्थित दशनामी अखाड़े से मुख्य यात्रा के लिए प्रस्थान करेगी। रास्ते में पड़ने वाले पड़ावों पांपोर, बिजबिहाड़ा, गौतम नाग अनंतनाग, मार्तण्ड, अशमुकाम से होते हुए दशमी और एकादशी को छड़ी मुबारक पहलगाम में रात्रि पड़ाव करेगी।

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Chadi Mubarak reaches Sharika Bhavani temple, will reach holy cave on August 12
शारिका मंदिर में पूजा करते संत - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

पवित्र छड़ी मुबारक को शुक्रवार को महंत दीपेंद्र गिरि के नेतृत्व में श्रीनगर के हरि पर्वत स्थित प्राचीन शारिका भवानी मंदिर ले जाया गया। पूर्जा अर्चना करीब 90 मिनट तक चली। इसमें बड़ी संख्या में साधु-संतों और भक्तों ने भाग लिया। दशनामी अखाड़े के महंत दीपेंदर गिरि ने बताया कि 31 जुलाई को दशनामी अखाड़े में स्थित श्री अमरेश्वर मंदिर में छड़ी मुबारक का पूजन होगा और स्थापना की जाएगी।

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7 अगस्त को छड़ी मुबारक श्रीनगर स्थित दशनामी अखाड़े से मुख्य यात्रा के लिए प्रस्थान करेगी। रास्ते में पड़ने वाले पड़ावों पांपोर, बिजबिहाड़ा, गौतम नाग अनंतनाग, मार्तण्ड, अशमुकाम से होते हुए दशमी और एकादशी को छड़ी मुबारक पहलगाम में रात्रि पड़ाव करेगी।
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उसके बाद चंदनबाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी के पारंपरिक रास्ते से होते हुए 12 अगस्त को 13500 फुट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा में पहुंचेगी। दीपेंद्र गिरि ने कहा कि इस साल भी कम अवधि में मौसम खराब होने के बावजूद भी 2.50 लाख से अधिक यात्री दर्शन कर सकुशल घरों को लौट चुके हैं।
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उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में सबसे बड़ी यात्रा हुई है और 39 दिनों की यात्रा में 6.35 लाख यात्री दर्शनों के लिए पहुंचे। यह आज तक का रिकॉर्ड आंकड़ा है। उन्होंने कहा कि बालटाल और नुनवन आधार शिविरों से पिछले वर्ष तक प्रतिदिन 7500 यात्रियों को जाने की अनुमति होती थी। 

इस बार श्राइन बोर्ड ने संसाधनों में बढ़ोतरी की और दोनों मार्गों से 10-10 हजार यात्रियों को पवित्र गुफा की ओर जाने की अनुमति दी गई। महंत दीपेंदर गिरि ने कहा कि दो वर्ष यात्रा नहीं हुई इसलिए इस बार यात्रियों में काफी ज़्यादा उत्साह देखने को मिला। उन्होंने कहा कि बादल फटने की घटना के बाद भी उत्साह में कोई कमी नहीं देखने को मिली।

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