राजनाथ की रिपोर्ट पर सीजफायर बढ़ाने का फैसला लेगा केंद्र, सुरक्षा एजेंसियों ने सौंपी कंपाइल रिपोर्ट
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कश्मीर घाटी में आतंकवाद निरोधक अभियान (सीजफायर) पर रोक को बढ़ाने का फैसला केंद्र सरकार गृहमंत्री राजनाथ सिंह की रिपोर्ट के आधार पर लेगी। अपने दो दिवसीय दौरे में राजनाथ ने सुरक्षा एजेंसियों से रमजान के महीने में सीजफायर के परिणामों को लेकर इनपुट लिए हैं।
वहीं, मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने गृहमंत्री के समक्ष एक समारोह में केंद्र के फैसले से युवाओं के बीच अनुकूल वातावरण तैयार होने की बात करते हुए सीजफायर को आगे बढ़ाने की वकालत की है। माना जा रहा है कि दिल्ली लौटकर गृहमंत्री अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपेंगे। इस आधार पर सीजफायर को बढ़ाने पर फैसला लिया जा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों ने जो इनपुट दिए हैं उसमें बताया गया है कि सीजफायर के बाद भी रोजाना आतंकी हमले हुए हैं। राइफल लूट की घटनाएं हुईं। राजनीतिक लोगों को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई। दक्षिणी कश्मीर तथा श्रीनगर में खासकर घटनाएं अधिक हुई हैं। अब तो आतंकी आईईडी का भी इस्तेमाल करने लगे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने सौंपी कंपाइल रिपोर्ट
पत्थरबाजी की घटनाएं भी कम नहीं हुई हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने ये भी इनपुट दिए हैं कि ऑपरेशन ऑल आउट में कई टॉप कमांडरों के मारे जाने की वजह से आतंकी संगठनों का तानाबाना लगभग बिखर चुका था, लेकिन सीजफायर की वजह से दोबारा इन्हें संगठित होने का मौका मिल सकता है।
बताया गया कि आतंकी संगठनों ने नए युवाओं की भर्ती बढ़ा दी है। कम से कम 50 युवाओं के आतंकी संगठन का दामन थामने की सूचना है। आतंकी तंजीम जैश ने अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। इसके अलावा अल बदर ने भी पांव पसारने शुरू किए हैं। सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियां सीजफायर को बढ़ाए जाने के पक्ष में नहीं हैं।
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल और मौजूदा समय में सीजफायर के दौरान आतंकी घटनाओं की कंपाइल रिपोर्ट भी गृहमंत्री को सौंपी गई है। इस रिपोर्ट में आतंकी घटनाओं के साथ-साथ आतंकी तंजीमों और पत्थरबाजों की गतिविधियों का भी ब्योरा है। रिपोर्ट में सीजफायर की घोषणा से पहले की स्थिति का भी जिक्र है, जिसमें आतंकियों के सफाए और आतंकवाद निरोधक अभियान की पूरी जानकारी है।