अमरनाथ यात्रा पर सीधे पीएम मोदी की नजर
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श्री अमरनाथ यात्रा आरंभ होने में मात्र दो दिन बचे हैं। वर्ष 2008 में श्री अमरनाथ भूमि आंदोलन के बाद से ही हमेशा यात्रा के दौरान तनाव की स्थिति बनी रहती है, लेकिन यह पहला अवसर है, जब भाजपा के शासनकाल में जम्मू-कश्मीर में श्री अमरनाथ यात्रा का आयोजन होगा।
एक ओर आतंकी यात्रा बाधित करने के लिए कोई मौका नहीं खोना चाहते, वहीं दूसरी ओर भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार यात्रा की सुरक्षा को लेकर कोई कमी नहीं रखना चाहती है। यही कारण है कि गठबंधन सरकार के तमाम मंत्री कश्मीर घाटी में लगातार तैयारियों का जायजा ले रहे हैं।
केंद्र सरकार ने भी इस बार यात्रा को प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। भाजपा की केंद्रीय टीम का मानना है कि यात्रा किसी तरह से बाधित हुई तो पार्टी की भारी किरकिरी होगी।
मांगी थी 70 दी 90 कंपनियां
इसलिए केंद्र सरकार यात्रा को सफल बनाने में लगातार प्रयासरत है। रियासती सरकार ने यात्रा के लिए केंद्र से अर्द्धसैनिक बलों की 70 अतिरिक्त कंपनियां मांगीं थीं, लेकिन केंद्र ने 90 कंपनियां भेज संकेत दिया कि यात्रा किसी हाल में बाधित नहीं होनी चाहिए।
पवित्र गुफा के आसपास के क्षेत्र को सेना ने अपने घेरे में ले लिया है, जबकि अर्द्धसैनिक बल बालटाल, पहलगाम आधार शिविरों के अलावा लखनपुर से लेकर श्रीनगर तक तैनात किए जाएंगे।
यात्रा को लेकर केंद्र से लगातार उच्च अधिकारियों की टीम रियासत के दौरे पर हैं। केंद्रीय गृह सचिव एलसी गोयल को यात्रा शुरू होने से पहले अंतिम जायजा लेने के लिए भेजा गया है।
केंद्र ने भेजे दो सुपरकॉप
इससे पहले गृह मंत्रालय के दो शीर्ष अधिकारी यात्रा की सुरक्षा तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे थे। इनमें एक विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) अशोक प्रसाद हैं, जो जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी रहे हैं और उन्हें रियासत में लंबे समय तक काम करने का अनुभव है।
दूसरे विशेष सचिव (प्रभारी जम्मू कश्मीर) रजीत पुनहानी हैं। दोनों अधिकारियों ने सेना, पुलिस अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ बैठक करने के बाद अपनी रिपोर्ट केंद्र को सौंपी है।
जून माह में कश्मीर में कई आतंकी घटनाओं और सुरक्षा बलों व आतंकियों के बीच लगातार मुठभेड़ों के कारण सुरक्षा एजेंसियों ने पहले ही सतर्कता बरतने की सलाह दी है।