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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   ceasefire violation in rajouri on krwachuth

जब देश भर में हो रहा था चांद का दीदार, तब LoC पर पाक को मुंहतोड़ जवाब दे रहे थे जवान

Sat, 22 Oct 2016 09:07 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Sat, 22 Oct 2016 09:07 PM IST
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ceasefire violation in rajouri on krwachuth
सीमा पर तैनात जवान - फोटो : File Photo
बुधवार की रात जहां बस्तियों में चांद की झलक पाकर पुलकित कलाइयों की खनक पतियों को मुदित कर रहीं थी वहीं घर से कोसों दूर सरहद की हिफ़ाजत में तैनात जवान चांद से आंखें मिलाकर मानो पत्नी का हाल पूछ रहे थे। शायद सोच रहे थे कि अपनी रात की छत पर कितना तन्हा होगा चांद ?
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अमर उजाला ने ऐसे कई जवानों से बात की। घर की याद सबको भावुक तो कर रही थी, लेकिन, उन्हें इस बात का कतई मलाल नहीं था कि ड्यूटी की वजह से घर नहीं जा पाए।

उन्हें इस बात पर फ़ख्र है कि हिम्मत वतन की हम से है, ताकत वतन की हम से है। सनद रहे कि रात लगभग नौ बजे जब सुहागिनें चांद का दीदार कर रहीं थीं तब एलओसी के राजोरी सेक्टर में तैनात जवान पाकिस्तानी गोलों का मुंहतोड़ जवाब दे रहे थे।
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'हमारे लिए ड्यूटी पहले, घर बाद में'

ceasefire violation in rajouri on krwachuth
border - फोटो : File Photo
करवाचौथ पर सुहागिनों ने चांद को निहारने के बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत तोड़ा। पूरे देश में ऐसी महिलाओं की तादाद लाखों में है जिनके पति सरहद पर हैं। उन्होंने परिवार के बीच निर्जला व्रत रखकर हजारों मील दूर तैनात सुहाग की लंबी उमर के लिए मन्नत मांगी। 

अमर उजाला टीम से बात करते हुए सेना और बीएसएफ के ज्यादातर जवानों ने अपना नाम न देने का आग्रह करते हुए कहा कि हमें तो घर से दूर त्योहार मनाने की आदत सी हो गई है।

हां घर की और अपनों की याद तो आती है। सरहद की सुरक्षा में तैनात राजस्थान निवासी जवान अनिल कहते हैं कि उनका परिवार तो पूरे साल ही सलामती की कामना करता है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए त्योहार तभी होता है, जब हम घर पहुंचते हैं। इसके अलावा तो हमारा पूरा ध्यान ड्यूटी पर ही रहता है।

'हम तो हैं परदेस में देश में निकला होगा चांद'

ceasefire violation in rajouri on krwachuth
Border Security - फोटो : File Photo
अनिल कहते हैं कि सुबह के समय पत्नी से बात हुई थी। एक से अधिक बार बातें करना हमारे लिए मुश्किल होता है, क्योंकि अन्य जवानों को भी घर पर बातेें करनी होती हैं। इस लिहाज से एक बार में ही हमारी कोशिश कोशिश होती है कि सभी का हालचाल ले लें और पर्व त्योहार संबंधी बात करें। इसके बाद अगले दिन ही फोन के जरिये बात करना संभव हो पाता है। 

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के रहने वाले जवान विकास कहते हैं कि दोपहर के समय उन्होंने पत्नी से बात की और हालचाल लिया। वह भी कहते हैं कि उनके लिए पहले ड्यूटी है, उसके बाद त्योहार। कुछ पलों को याद कर खिलखिला भी उठते हैं। कहते हैं, कभी पत्नी की काल आती है, तो उधर से ‘घर आजा परदेसी तेरा देश बुलाए रे...’ गुनगुनाती आवाज कानों में पड़ती है। राजस्थान के रहने वाले एक अन्य जवान आशीष कहते हैं कि उन्होंने दोपहर से पहले तक दो बार पत्नी से बात की और हाल जाना।

जवानों का कहना था कि हम जहां तैनात होते हैं वहीं पूरा हिंदुस्तान बन जाता है। अलग-अलग राज्यों से आए सब जवान परिवार की तरह रहते हैं और एक-दूसरे के सुख-दुख बांटते रहते हैं। जब उनसे पूछा कि करवा चौथ के चांद को देखकर कैसा लगता है तो ज्यादातर की जुबान पर राही मासूम रजा की ग़ज़ल के यही बोल आए, हम तो हैं परदेस में देश में निकला होगा चांद।
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