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पुराने ढर्रे पर शहर, मास्टर प्लान अभी हवा में

Tue, 30 Dec 2014 01:59 PM IST
अमनदीप सिंह/अमर उजाला, जम्मू
अमनदीप सिंह/अमर उजाला, जम्मू Updated Tue, 30 Dec 2014 01:59 PM IST
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bye bye 2014, story about jammu infrastructure

वर्ष 2014 खत्म होने वाला है, लेकिन अभी तक मंदिरों का शहर पुराने ढर्रे पर चल रहा है। ट्र्रैफिक जाम, प्रदूषण, गंदे पानी के घर में आने की समस्या, अतिक्रमण आदि कई प्रकार की समस्याओं से रोजाना जूझते हुए लोग जीवन का निर्वाह कर रहे हैं। मुश्किलें इतनी ज्यादा हो गई है कि लोग इनका जिक्र करना भी भूल चुके हैं।

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वजह सिर्फ इतनी कि सरकार की ओर से शहर को आधुनिक सुख - सुविधाओं से परिपूर्ण करने का सपना साकार नहीं हो पाया है। हैरत की बात तो यह है कि अभी तक मास्टर प्लान नहीं बनाया जा सका है। एकाध प्रोजेक्ट को छोड़कर जम्मू विकास प्राधिकरण और नगर निगम के अधीन चल रहे ज्यादातर कार्य अधूरे हैं।
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जम्मू विकास प्राधिकरण शहर के मास्टर प्लान के लिए नई सरकार बनने का इंतजार कर रहा है। इसी तरह से नगर निगम की ओर से चल रहे प्रोजेक्टों को भी गति नहीं मिल सकी है। कई बड़े अधिकारी आए और चले गए, लेकिन लोगों को मुश्किलों से निजात दिलाकर उन्हें सुख-सुविधाओं के साथ जीने का अवसर किसी ने नहीं दिया।
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शहर को पहले से ज्यादा खूबसूरत बनाने में किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई है। जेडीए ने लोगों को बसाने के लिए बीर पुर, कोट भलवाल, गोल गुजराल और रूप नगर में कालोनियों के ड्रा तो निकाले, लेकिन प्लाट देने का कार्य अभी अधूरा है। मुट्ठी और गांधीनगर में फ्लैट दिया जाना विचाराधीन है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से बस स्टैंड की मल्टीस्टोरी पार्किगिं का शिलान्यास रखने के बाद कार्य शुरू होने का इंतजार है। जेडीए के रेवेन्यू रिकार्ड में 52 हजार कनाल भूमि पर भू-माफिया का कब्जा है, जिसे स्टाफ कम होने की बात कहकर अधिकारी बचने का प्रयास कर रहे है। कुछ दिन पहले हाईकोर्ट ने डीसी जम्मू और वीसी जेडीए को जमीन की निशानदेही करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का दावा है कि नया अतिक्रमण नहीं होने दिया जा रहा है।

कचरा निपटाने को मोहताज नगर निगम
नगर निगम भी कई मामलों में शहर के विकास में अपना अहम योगदान नहीं दे पाया है। शहर के 400 मीट्रिक टन कचरे को निपटाना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसके अलावा सालों से स्लाटर हाउस शहर से बाहर करने की मांग पर निगम लोगों के ही विरोध के आगे मजबूर है। खानपुुर नगरोटा में स्लाटर हाउस बनाने का पेच फंसा हुआ है। इसी तरह से कोट भलवाल में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीद कर मात्र चारदीवारी करके खाली छोड़ी हुई है।

कृत्रिम झील बनी नहीं
तवी किनारे सालों से बनाई जा रही कृत्रिम झील के कार्य को मुकम्मल करने की अवधि बीत चुकी है। अब दोबारा से कार्य जारी है। जेडीए झील बनने पर उसे पर्यटकों के लिए आकर्षण बनाने की योजना बनाए बैठा है।

अभी तक सीवरेज पाइप बिछाना जारी
शहर के कुछ हिस्से में अभी तक सीवरेज पाइप बिछाना जारी है। डिवकॉम शांतमानु ने कई बार संबंधित अधिकारियों के साथ रिव्यू मीटिंग करके उन्हें निर्देश दिए हैं, लेकिन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट अभी तक शुरू नहीं हो सका है। इस कारण निचले इलाके खासतौर पर कृष्ण नगर, मोहिंद्र नगर, भगवती नगर, तालाब तिल्लो, बस स्टैंड, गुम्मट, डोगरा चौक में बारिश के दिनों में गंदा पानी सड़क पर जमा होता है तथा लोगों के घरों में भी चल जाता है।


ट्रैफिक जाम की समस्या बरकरार
बीते साल में ट्रैफिक पुलिस कमरतोड़ प्रयास करती रही है, बावजूद शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या है। कहीं फुटपाथ पर रेहड़ी, फड़ी और दुकानदारों की ओर से अतिक्रमण कर रखा गया है तो कहीं ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम और संबंधित थानों के प्रभारियों की ओर से कोई एक्शन नहीं लेना। कनाल रोड, कनक मंडी, बीसी रोड और बिक्रम चौक, जानीपुर, अंबफला, रिहाड़ी, गुम्मट, परेड तथा कई अंदर के बाजार जाम से जकड़े रहते हैं।

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