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Jammu News: बड़ी कंपनियों की मनमानी, कम तौल वाली पैकिंग से उलझन में तेल कारोबारी

सार

जम्मू में तेल कारोबारियों और उपभोक्ताओं को पैकिंग नियमों में बदलाव के बाद कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बड़ी कंपनियां अनियमित आकार में तेल बेच रही हैं, जिससे व्यापारी और ग्राहक दोनों भ्रमित और नुकसान में हैं।

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विस्तार

नोट - फोटो ट्रैक पर
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- विधिक माप विज्ञान अधिनियम में मिली छूट का फायदा उठा रहीं बड़ी कंपनियां

- ग्राहकों को भी लग रही चपत, बाजार में स्थिरता न होने से उलझन में व्यापारी





अमर उजाला ब्यूरो

जम्मू। तेल कारोबारियों और उपभोक्ताओं की परेशानियां इन दिनों बढ़ती जा रही है। वजह है पैकिंग नियमों में बदलाव के बाद बड़ी कंपनियों की चाल। पहले तेल और रिफाइंड केवल तय पैकिंग में बिकता था जैसे एक किलो, 500 ग्राम, पांच किलो या 15 किलो। तब यह भी साफ था कि एक किलो पैक में करीब 910 मिली लीटर तेल ही होगा। अब कंपनियों को छूट मिल चुकी है और वे 810 ग्राम, 750 ग्राम, 400 ग्राम जैसी अनियमित पैकिंग में भी तेल बाजार में उतार रही हैं। इस बदलाव से सबसे ज्यादा दिक्कत उन व्यापारियों को हो रही है जो थोक में माल उठाते हैं।
तेल कारोबारी अभिमन्यु गुप्ता कहते हैं कि पहले पैकिंग तय थी, तो माल उठाने में भरोसा रहता था। अब हर कंपनी अलग साइज निकाल रही है। अगर हम एक ब्रांड का स्टॉक ले लें और अगले दिन दूसरी कंपनी उससे कम का पैक उतार दे, तो रिटेलर उसी की ओर चला जाता है। इससे हमारा पुराना माल फंस जाता है। इसी तरह व्यापारी नितीश गुप्ता का कहना है, “ग्राहक बोतल देखकर सोचता है कि यह एक किलो होगी, जबकि असल में 810 या 750 ग्राम ही होता है। कारोबारियों की मांग है कि सरकार को फिर से मानक पैकिंग लागू करनी चाहिए। एक किलो, 500 ग्राम और पांच किलो जैसे तय आकार ही मान्य हों, ताकि ग्राहक को धोखा न हो और व्यापारी भी संतुलित ढंग से कारोबार कर सकें।
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ग्राहकों में भी नहीं है जारुकता, लग रही चपत

जहां व्यापारी बाजार की अस्थिरता से परेशान हैं, वहीं ग्राहक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। रेहाड़ी के रहने वाले अमित शर्मा बताते हैं कि मैंने बाजार से तेल की बोतल खरीदी, सोचा कि यह एक किलो होगी। बोतल की जब तौला तो 700 ग्राम के आसपास निकली। जब तक पढ़कर ध्यान न दें, पैक देखकर कोई समझ ही नहीं सकता कि इसमें कितना तेल है। व्यापारी दीपक जैन का कहना है कि इस असमान पैकिंग से हमें बार-बार ब्रांड बदलकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा उठानी पड़ रही है। न स्टॉक का हिसाब बैठ रहा है, न ग्राहक संतुष्ट हो पा रहे हैं। ऐसे में कारोबार संभालना मुश्किल हो गया है।
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2022 में नियमों में हुआ बदलाव, कंपनियों को मिली छूट

दरअसल, तेल की पैकिंग को लेकर पहले स्पष्ट कानून था। विधिक माप विज्ञान अधिनियम और पैकेज्ड वस्तु नियम 2011 के तहत कंपनियों को केवल तय पैकिंग में ही तेल बेचने की अनुमति थी। अगस्त 2022 में सरकार ने नियमों में संशोधन कर कंपनियों को छूट दे दी कि वे किसी भी आकार में पैकिंग कर सकती हैं, जैसे 810 ग्राम, 750 ग्राम या 400 ग्राम। अब कंपनियों को सिर्फ इतना करना होता है कि पैक पर सटीक वजन और मात्रा साफ लिख दें।
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