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शाम ढलते ही घर छोड़ देते हैं सीमावर्ती ग्रामीण
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Sun, 12 Oct 2014 12:08 PM IST
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दो दिनों से आरएस पुरा सेक्टर की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी गोले नहीं गिरने से लोगों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, सीमावर्ती लोगों में अभी भय बना हुआ है। दहशतजदा सीमावर्ती ग्रामीण फिलहाल शिविरों में शरण लिए हैं।
पुरुष सुबह गांव में मवेशियों को चारा देने और फसलों की देखभाल करने के लिए चले जाते हैं। लेकिन शाम ढलते ही वह शिविरों में लौट आते हैं। उन्हें डर है कि पाकिस्तान कहीं फिर से गोले न बरसाने शुरू कर दे।
गांव अब्दुल्लिया के जनक राज, कुलदीप राज, मोहन सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार को अब पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाना चाहिए। मुंहतोड़ जवाब देने के बाद पाकिस्तान ने गोलाबारी रोक दी है।
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उनहोंने कहा कि सीमा अच्छा माहौल बने रहने पर ही ग्रामीण अपना काम कर सकेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि पाकिस्तान पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता है। पाकिस्तानी रेंजर्स अपनी पोस्टों से स्नाइपर राइफलों से निशाना बन रहे हैं।
गांव चंदू चक, लाईया के चरणदास, कृष्ण चौधरी, मुलख राज, बाल सिंह का कहना है कि गांव के लोग शाम ढलते ही बत्तियां बंद कर देते हैं।
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पुरुष सुबह गांव में मवेशियों को चारा देने और फसलों की देखभाल करने के लिए चले जाते हैं। लेकिन शाम ढलते ही वह शिविरों में लौट आते हैं। उन्हें डर है कि पाकिस्तान कहीं फिर से गोले न बरसाने शुरू कर दे।
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गांव अब्दुल्लिया के जनक राज, कुलदीप राज, मोहन सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार को अब पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाना चाहिए। मुंहतोड़ जवाब देने के बाद पाकिस्तान ने गोलाबारी रोक दी है।
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उनहोंने कहा कि सीमा अच्छा माहौल बने रहने पर ही ग्रामीण अपना काम कर सकेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि पाकिस्तान पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता है। पाकिस्तानी रेंजर्स अपनी पोस्टों से स्नाइपर राइफलों से निशाना बन रहे हैं।
गांव चंदू चक, लाईया के चरणदास, कृष्ण चौधरी, मुलख राज, बाल सिंह का कहना है कि गांव के लोग शाम ढलते ही बत्तियां बंद कर देते हैं।