पाक फायरिंग ने छीनी किसानों की रोजी-रोटी
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पाकिस्तानी गोलाबारी ने सीमांत इलाकों में रहने वाले लोगों की रोजी-रोटी पर भी संकट खड़ा कर दिया है। पहले से ही हजारों हेक्टेयर पर किसान गोलाबारी के कारण फसल नहीं लगा पाए। अब जो कुछ फसल लगाई गई है।
उसमें किसान खाद सहित अन्य काम नहीं कर पा रहे। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फसलों पर वक्त से खाद और कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं किया तो फसलों की पैदावार पर असर पड़ेगा। पिछले कई दिनों से लगातार फायरिंग होने से फसलों पर व्यापक असर पड़ा है।
जम्मू संभाग में एलओसी के अधीन आने वाले इलाकों में कुल 25 हजार हेक्टेयर पर मक्की की फसल लगाई जाती है। इसमें से पचास फीसदी क्षेत्र पर ही फसल लगाई गई थी। अब किसानों को मक्की की फसल से घास हटाने, खाद डालने का काम करना है, लेकिन पाकिस्तान लगातार इन इलाकों में गोले दाग रहा है।
पुंछ और राजोरी जिले की 150 किलोमीटर लंबी एलओसी पर 15 हजार से अधिक हेक्टेयर पर लगी फसल पर पाक गोलों ने ग्रहण लगा दिया है। पुंछ जिले के मेंढर, बालाकोट सेक्टर के अधीन आने वाले गांव कंगागली के रहने वाले अब्दुल हमीद का कहना है कि वह खेतों में नहीं जा रहे। खेतों में जुताई नहीं कर पा रहे।
एलओसी का असर आईबी पर भी
एलओसी पर फायरिंग के बाद पाकिस्तान ने आरएस पुरा इंटरनेशनल बार्डर पर भी फायरिंग की। जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में 35 हजार हेक्टेयर पर धान की फसल लगाई जाती है।
गोलाबारी की वजह से 15 हजार हेक्टेयर पर फसल नहीं लग पाई, जबकि जो लगाई गई, उसमें किसानों को अभी कीटनाशक और खाद का इस्तेमाल करना है, लेकिन गोलाबारी की वजह से किसान खेतों में जाने से कतराने लगे हैं।
आरएस पुरा के गांव बासपुर बंगलों के सरपंच एसोसिएशन के पूर्व प्रधान चौधरी देव राज का कहना है कि किसानों के लिए रोजी-रोटी कमाना भी मुश्किल हो गया है।